Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण से फिलहाल राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में अगले तीन दिन यानी 7 से 9 नवंबर तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गंभीर श्रेणी में रह सकता है। इसके बाद भी अगले छह दिनों तक हवा की गुणवत्ता गंभीर से बेहद खराब श्रेणी के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, अगले चार दिनों तक सुबह के समय हल्के से मध्यम कोहरे की संभावना है। शुक्रवार को 22 जगहों पर AQI का स्तर चिंताजनक स्थिति में दर्ज किया गया।
6 नवंबर को भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में रही। औसत एक्यूआई शाम 4 बजे 382 दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, 8 और 9 नवंबर को प्रदूषकों के फैलाव के लिए मौसम की परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहेंगी। 8 नवंबर को वेंटिलेशन इंडेक्स 3000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड और 9 नवंबर को 4000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड रहने का अनुमान है। जबकि 6000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम वेंटिलेशन इंडेक्स और 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम औसत हवा की रफ्तार प्रदूषकों के फैलाव के लिए प्रतिकूल मानी जाती है।
मौसम विभाग के अनुसार, 7 और 8 नवंबर को सुबह कई स्थानों पर हल्का कोहरा या धुंध छाई रह सकती है। 9 नवंबर को सुबह अधिकांश स्थानों पर मध्यम कोहरा रहने की संभावना है। तीनों दिन अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। राजधानी दिल्ली में फिलहाल मौसम में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है। आने वाले दिनों में बारिश होने के आसार नहीं है। वातावरण में धुंध छाने की आशंका है।
पंजाबी बाग – 453
जहांगीरपुरी – 447
रोहिणी – 444
डीटीयू – 443
आरके पुरम – 441
नॉर्थ कैंपस – 440
मुंडका – 437
बवाना – 426
अलीपुर – 425
जेएनयू – 408
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार दिल्ली के एक्यूआई डेटा में फर्जीवाड़ा कर रही है। आप प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इसके चलते दिल्लीवालों को सतर्क रहने की अपील की है। भारद्वाज ने कहा कि दीपावली से पहले ही जहरीली हो चुकी हवा में लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे में सरकार की ओर से फर्जीवाड़ा कर प्रदूषण की असल स्थिति छिपाना लोगों के लिए और भी खतरनाक हो सकता है। वहीं, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार होने पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार की शीतकालीन कार्ययोजना प्रदूषण रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एनसीआर में रहने वाले वकीलों को निर्धारित शर्तों के तहत बीएस-6 से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों से दिल्ली आने की छूट दे दी है। यह छूट केवल अदालत में कामकाज वाले दिनों में लागू होगी। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर दिया। इसमें एनसीआर से दिल्ली आने वाले वकीलों को हो रही परेशानी से राहत की मांग की गई थी।
सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के ‘डीडी न्यूज’ से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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