Delhi Weather Update: दिल्ली-एनसीआर के लोगों को शनिवार से गर्मी और उमस से राहत मिलने के आसार हैं। इस दौरान कई हिस्सों में हल्की बारिश होगी, जबकि रविवार को तेज बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट दर्ज किया जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार के बाद भी हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
शुक्रवार को दिनभर बादलों की आवाजाही रही, लेकिन केवल छिटपुट बूंदाबांदी हुई, जिससे उमस और बढ़ गई। दिल्ली में महसूस होने वाली गर्मी (फील लाइक टेंपरेचर) का स्तर 48 डिग्री सेल्सियस पर रहा। सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 28.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति सामान्यतः 10 किमी प्रति घंटा से कम रही, जबकि नमी 58 से 91 प्रतिशत के बीच रही।
मौसम विभाग का अनुमान है कि शनिवार को हवा की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा और रविवार को 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। रविवार के बाद भी हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
शुक्रवार को भी सफदरजंग, पालम, लोधी रोड और आयानगर मौसम केन्द्रों ने हल्की बूंदाबांदी दर्ज की है। दिल्ली व आसपास के एक बड़े इलाके में अच्छी बारिश नहीं होने के चलते लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिली है। शुक्रवार की दोपहर ढाई बजे नमी का स्तर 61 फीसदी, तापमान 35.8 डिग्री और हवा की रफ्तार 5.6 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रही। इन कारकों के चलते महसूस होने वाली गर्मी का स्तर 48 डिग्री सेल्सियस पर रहा। शाम के साढ़े पांच बजे नमी का स्तर 73 फीसदी, तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस और हवा की रफ्तार 9.3 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रही। यानी इस समय महसूस होने वाली गर्मी का स्तर 46.2 डिग्री सेल्सियस पर रहा। गर्मी के चलते दिन भर लोग पसीने से सराबोर रहे।
दिल्ली में मानसून आगमन की सामान्य तिथि 27 जून है। इस बार पांच दिनों की देरी से 2 जुलाई को मानसून का दिल्ली में आगमन हुआ। दिल्ली के ज्यादातर स्थानों पर गुरुवार को हल्की बारिश दर्ज की गई थी। इसके साथ ही हवा की दिशा में बदलाव, नमी के स्तर में बढ़ोतरी और बादलों की स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने मानसून आगमन की आधिकारिक घोषणा कर दी। हालांकि, अच्छी बारिश नहीं होने के चलते दिल्ली में गर्मी और उमस की स्थिति बनी हुई है।
कम बारिश के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में मानसून की आधिकारिक घोषणा पर उठ रहे सवालों के बीच मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के आगमन का मतलब उसी दिन भारी बारिश होना नहीं है। पूर्वी हवाएं, बढ़ी हुई नमी और बादलों का आच्छादन जैसे तकनीकी मानदंड पूरे होने के कारण दिल्ली में मानसून की घोषणा की गई है।
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 107 रहा, जो ‘मॉडरेट’ (सामान्य) कैटेगरी में आता है। सीपीसीबी के अनुसार, 0 से 50 के बीच AQI को ‘अच्छा’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मॉडरेट’ (सामान्य), 201-300 को ‘खराब’, 301-400 को ‘बहुत खराब’ और 401-500 को ‘गंभीर’ माना जाता है।
सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के ‘डीडी न्यूज’ से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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