Banke Bihari Corridor : वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर को लेकर विवाद हो रहा है. कॉरिडोर का विरोध पूजा पाठ करनेवाला गोस्वामी समाज कर रहा है. इनका कहना है कि अगर कॉरिडोर बना तो वृंदावन से बांके बिहारी पलायन कर जाएंगे. कॉरिडोर के विरोध में गोस्वामी समाज के तर्क का हम विस्तार से विश्लेषण करेंगे.
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Banke Bihari Corridor news: अब डीएनए में विश्वेषण आस्था बनाम रास्ता का तो गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के सुंदरकांड में वर्णन किया है कि प्रभु श्रीराम समुद्र किनारे हैं. सामने अथाह जल है और सेना को समुद्र पार करना है. रास्ता कैसे बनेगा? सेना कैसे समुद्र पार जाएगी. श्रीराम अपने करीबी लोगों से विमर्श करते हैं. विभीषण सलाह देते हैं – प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय बिचारि॥ बिनु प्रयास सागर तरिहि सकल भालु कपि धारि॥
विभीषण ने कहा- हे प्रभु,समुद्र आपके कुलगुरु हैं, उन्हीं से उपाय पूछिए. वो विचार कर आपको ऐसा रास्ता बताएंगे कि बिना किसी प्रयास के आपकी सेना पार उतर जाएगी. श्रीरामचरित मानस के इस प्रसंग को हम इसलिए याद कर रहे हैं क्योंकि आज फिर आस्था और रास्ता का विवाद खड़ा हो गया है.
आस्था बनाम रास्ता
वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर को लेकर विवाद हो रहा है. कॉरिडोर का विरोध पूजा पाठ करनेवाला गोस्वामी समाज कर रहा है. इनका कहना है कि अगर कॉरिडोर बना तो वृंदावन से बांके बिहारी पलायन कर जाएंगे. कॉरिडोर के विरोध में गोस्वामी समाज के तर्क का हम विस्तार से विश्लेषण करेंगे. लेकिन पहले आपको इस कॉरिडोर पर छोटी सी जानकारी देतें हैं
बांके बिहारी मंदिर के आस-पास 5 एकड़ में कॉरिडोर बनेगा.
कॉरिडोर के डिजाइन में मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखा गया है.
मंदिर तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते बनाएं जाएंगे.
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब 37 हजार वर्गमीटर मे पार्किंग बनाई जाएगी.
श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है- ‘धन्यम् वृंदावनम् तेन, भक्ति नृत्यति यत्र च’
अर्थात वो वृंदावन धाम धन्य है, जहां हर ओर साक्षात भक्ति महारानी नृत्य करती हैं. इसी वृंदावन में साल 1864 में भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त स्वामी हरिदास ने बांके बिहारी मंदिर का निर्माण करवाया था. मंदिर में हर महीने करीब 10 लाख श्रद्धालु आते हैं.
बांके बिहारी कॉरिडोर की जरूरत क्यों?
होली, अक्षय तृतीया, नए साल के साथ ही वीकेंड शनिवार और रविवार को औसतन 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु भगवान बांके बिहारी के दर्शन करने वृंदावन पहुंचते हैं. कॉरिडोर के बनने के बाद करीब 10 हजार श्रद्धालु इस मंदिर में एक साथ दर्शन कर सकेंगे. मंदिर तक पहुंचने का रास्ता कुंज गलियों से होकर जाता है. इन गलियों के बारे में धारणा है कि भगवान श्रीकृष्ण यहां खेलते थे, रास रचाते थे, माखन चुराते थे. बिहारी जी मंदिर के पास 22 गलियां हैं. गलियों की चौडाई 3 से 10 फीट तक है.
#DNAWithRahulSinha | ‘आस्था Vs रास्ता’..आंखें खोलने वाला विश्लेषण… बांके बिहारी के ‘पलायन’ की धमकी क्यों?
कॉरिडोर से कृष्ण भक्तों को क्या परेशानी है?#DNA #BankeBihariTemple #Vrindavan #BankeBihariCorridor @RahulSinhaTV pic.twitter.com/SINHqHc8uh
— Zee News (@ZeeNews) June 2, 2025
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जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है तो गलियां भीड़ के भर जाती हैं. दुर्घटना की आशंका रहती है. इसलिए सरकार कॉरिडोर बनाकर श्रद्धालुओं के लिए भगवान बांके बिहारी के दर्शन को सुगम बनाना चाहती है.
कॉरिडोर बनाने के लिए मंदिर के आसपास के 300 मकान और 100 दुकानों का अधिग्रहण होगा. अधिग्रहण को लेकर भी नाराजगी है. इस नाराजगी का विश्लेषण हम करेंगे. लेकिन यहां हमारे लिए काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल कॉरिडोर के विषय में जरूर जानना चाहिए.
काशी- उज्जैन में कॉरिडोर कैसे बना?
काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए करीब 300 भवनों का अधिग्रहण किया गया था.
प्रभावित लोगों को 1000 करोड़ से अधिक का मुआवजा दिया गया.
दुकानदारों को दूसरी जगह पर दुकानें दी गई. कुछ को मुआवजा दिया गया.
बिल्डिंग तोड़ने के दौरान 40 से अधिक प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिले थे. इन्हें संरक्षित किया गया
उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर बनाने के लिए करीब 250 से ज्यादा मकान और दुकानें अधिग्रहित की गईं. सरकार ने कुल 150 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा दिया. सरकार भरोसा दिला रही है कि बांके बिहारी कॉरिडोर के सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा.
दुनिया के ये फैसले बने मिसाल
यहां हम आपको बताना चाहेंगे दुनिया के कई देशों में तीर्थ स्थलों के विकास के साथ ही दूसरे विकास कार्यों के लिए धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया या उन्हें दूसरी तरह शिफ्ट किया गया.
*अक्टूबर 2014 में सऊदी अरब सरकार ने मस्जिद अल-हरम और पैगंबर की मस्जिद का विस्तार करने के लिए मक्का और मदीना के आसपास के कई अन्य विरासत स्थलों को ध्वस्त कर दिया था.
*दिसंबर 2018 में तुर्किए के हसनकैफ शहर में बांध बनाने के लिए 600 साल पुरानी एय्यूबी मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट किया.
*2007 में जर्मनी के ह्यूर्सडॉर्फ में कोयला खदान के लिए 800 साल पुराने चर्च को 9 किलोमीटर दूर शिफ्ट किया गया.
*रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में 1982 से 1988 के बीच एक दर्जन चर्चों को बचाने के लिए दूसरी जगह शिफ्ट किया गया.
जैसे ही हम आपको बता चुके हैं बांके बिहारी कॉरिडोर में मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखा जाएगा. सिर्फ कुछ दुकानों और मकानों का अधिग्रहण होगा. बांके बिहारी कॉरिडोर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बन रहा है. तर्क है कि इससे स्थानीय लोगों का हित भी होगा. यहां हम आपको बताना चाहेंगे कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने से
वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या 500% से ज्यादा बढ़ी है.
वाराणसी का टूरिज्म आधारित व्यापार का वार्षिक राजस्व 15 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है.
महाकाल कॉरिडोर बनने से उज्जैन में 300% तक श्रद्धालु बढ़े हैं.
उज्जैन में पर्यटन आधारित व्यापार से सरकार को 2 हजार करोड़ से ज्यादा की आय हो रही है.
यानी श्रद्धालुओं को सुविधा मिली तो स्थानीय लोगों की आय बढ़ी. ये तथ्य हमारे सामने है. इसलिए बांके बिहारी कॉरिडोर पर हो रहे विमर्श में इन तथ्यों को भी ध्यान में रखना चाहिए.
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