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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO और भारतीय नौसेना ने ओडिशा के तट पर बंगाल की खाड़ी में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. भारतीय नौसेना के हेलिकॉप्टर से पहली बार नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का ‘सैल्वो लॉन्च’ सफलतापूर्वक किया गया.
इस टेस्ट में एक ही हेलिकॉप्टर से बहुत कम समय के अंतराल पर दो मिसाइलें लगातार दागी गईं. यह भारत की पहली सैल्वो लॉन्चिंग है, जिसमें हवा से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल हुआ.
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सैल्वो लॉन्च क्या होता है?
सैल्वो लॉन्च का मतलब है एक ही प्लेटफॉर्म से एक के बाद एक कई हथियारों को बहुत कम समय में दागना. युद्ध के समय यह तकनीक बहुत जरूरी होती है. इससे दुश्मन के जहाज पर एक साथ कई वार किए जा सकते हैं. दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को तो रोक सकता है, लेकिन जब एक साथ 2-3 मिसाइलें आएंगी तो उसे चकमा देना आसान हो जाता है. इससे टारगेट को नष्ट करने की संभावना बहुत बढ़ जाती है.
NASM-SR मिसाइल की खासियतें
NASM-SR भारत की पहली स्वदेशी हवा से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल है. इसकी कुछ बड़ी खासियतें ये हैं…
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क्यों जरूरी है यह टेस्ट?
भारतीय नौसेना अभी तक एंटी-शिप मिसाइलों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थी. NASM-SR के आने से नौसेना को स्वदेशी विकल्प मिल गया है. इसे सीकिंग और MH-60R जैसे नौसेना के हेलिकॉप्टरों से दागा जा सकेगा. यह मिसाइल छोटे युद्धपोत, गश्ती नौकाओं और दुश्मन के सप्लाई जहाजों के खिलाफ बहुत कारगर है.
सैल्वो लॉन्च की सफलता के बाद अब इस मिसाइल का बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होगा. DRDO इसे और अपग्रेड करके इसकी रेंज 150 किमी तक बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. यह मिसाइल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत नौसेना को मजबूत करेगी और हिंद महासागर में भारत की ताकत बढ़ाएगी.
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