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संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने, Epstein Files के नाम से जारी सन्देशों और तस्वीरों व वीडियो सामग्री के भंडार को ‘व्यथित करने देने वाले और ठोस सबूतों’ का भंडाफोड़ करने वाली सामग्री क़रार दिया है. उन्होंने इस मामले की तह तक जाने के लिए व्यापक, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच कराए जाने की मांग करते हुए कहा है कि चाहे कोई कितने भी धनी या शक्तिशाली हों, क़ानून से ऊपर कोई नहीं है. आइए जानते हैं कुछ सवालों के जवाब.
स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने सोमवार को जारी एक वक्तव्य में ऐपस्टीन फ़ाइल्स मामले को, सम्भवतः एक ऐसा वैश्विक आपराधिक नैटवर्क क़रार दिया है, जिसमें व्यवस्थागत यौन शोषण, तस्करी और महिलाओं व लड़कियों का शोषण शामिल है.
स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि इन फ़ाइलों में दर्ज कथाकथित कृत्य और गतिविधियाँ, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अन्तर्गत कुछ गम्भीरतम अपराधों की श्रेणी में गिनी जा सकती हैं.
ग़ौरतलब है कि स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ, यूएन मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, और अपनी व्यक्तिगत क्षमता में काम करते हैं, उन्हें संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं मिलता है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, इन फ़ाइलों में नज़र आने वाले व्यवहार को यौन दासता, प्रजनन हिंसा, जबरन गुमशुदगी, उत्पीड़न, अमानवीय और असम्मानजनक व्यवहार, और भ्रण हत्या परिभाषित किया जा सकता है.
विशेषज्ञों ने कहा है, “महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध इन अत्याचारों का स्तर, प्रकृति, चरित्र और देशों की सीमाओं से परे तक दायरा इतना विशाल है कि उनमें से कुछ तो, मानवता के विरुद्ध अपराधों की श्रेणी में भी शामिल हो सकते हैं.”
अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अन्तर्गत, मानवता के विरुद्ध अपराध तब घटित होते हैं जब किसी आबादी के विरुद्ध व्यापक पैमाने या व्यवस्थागत रूप में, बलात्कार, यौन दासता, जबरन वेश्यावृत्ति, तस्करी, दमन, प्रताड़ना या हत्याओं को अंजाम दिया जाता है. इसमें हमले की जानकारी होना भी शामिल होता है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि इन फ़ाइलों में दर्ज किए गए रुझान, इस कसौटी को पूरा कर सकते हैं और इनके लिए राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर के तमाम सक्षम न्यायालयों में मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि इन फ़ाइलों के बारे में जानकारी, ऐपस्टीन फ़ाइल्स पारदर्शिता अधिनियम (Epstein Files Transparency Act) के बाद सामने आई है जो 19 नवम्बर 2025 को दस्तख़त किए जाने के बाद क़ानून बना.
संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने कुछ देरी के बाद 30 जनवरी 2026 को, इस सम्बन्ध में भारी मात्रा में सामग्री जारी की जिसमें 30 लाख से अधिक पन्ने, 2,000 वीडियो और 1 लाख 80 हज़ार तस्वीरें शामिल हैं.
न्यूयॉर्क की एक जेल में 66 वर्ष की आयु में, अगस्त 2019 में आत्महत्या के बाद, जैफ़्री ऐपस्टीन का निधन हो गया था. जैफ़री ऐपस्टीन का मिलना-जुलना राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं, मशहूर और कारोबारी हस्तियों के साथ था.
उस पर संयुक्त राज्य अमेरिका में इस तरह के आपराधिक आरोप लगे थे कि उसने एक ऐसी व्यवस्था चलाई जिसमें युवतियों को शोषण के लिए भर्ती किया जाता था, और उनमें से बहुत सी लड़कियाँ तो नाबालिग़ और नाज़ुक हालात वाली थीं.
जैफ़्री ऐपस्टीन के सहयोगी गिज़लैन मैक्सवैल को 2021 में यौन तस्करी व अन्य अपराधों में, दोषी पाया गया था और उसे 2022 में 20 वर्ष के कारावस की सज़ा हुई थी.
अलबत्ता इन आपराधिक गतिविधियों में, कुछ अन्य व्यक्तियों के शामिल होने, वित्तीय ढाँचे और इनका दायरा देशों की सीमाओं से भी परे तक फैले होने के बारे में अब भी प्रश्न बने हुए हैं.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस मामले में जवाबदेही निर्धारित किए जाने की माँग करने में भुक्तभोगियों के साहस और लगन की सराहना की है.
उन्होंने ज़ोर देकर कह है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के तहत देशों की ये ज़िम्मेदारी है कि वो महिलाओं व लड़कियों के विरुद्ध हिंसा को होने से रोकें, हिंसा हो जाने पर उसकी जाँच करें और दोषियों को दंडित करें.
विशेषज्ञों ने कहा कि ऐपस्टीन फ़ाइल्स मामले में सामने आए तमाम आरोप बहुत भयावह हैं और उनकी स्वतंत्र, व्यापक, व निष्पक्ष जाँच किए जाने की आवश्यकता है. साथ ही यह पता लगाए जाने के लिए जाँच किए जाने की भी ज़रूरत है कि इस तरह के अपराध, इतने लम्बे समय तक किस तरह जारी रहे.
उन्होंने कहा है, “इन अपराधों को, श्रेष्ठता की मानसिकता, नस्लभेद, भ्रष्टाचार, अत्यन्त गम्भीर स्त्री विरोध मानसिकता, और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली महिलाओं व लड़कियों को, उपभोग की चीज़ बना दिए जाने व उनका अमानवीयकरण कर दिए जाने की मानसिकता के साथ अंजाम दिया गया.”
स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने, ऐपस्टीन फ़ाइलों को जारी किए जाने की प्रक्रिया में हुईं गम्भीर त्रुटियों की तरफ़ भी ध्यान आकर्षित किया है और साथ ही ऐसी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की ज़रूरत को रेखांकित किया है जिसमें किसी भी भुक्तभोगी को, आगे हानि का सामना नहीं करना पड़े.
उन्होंने कहा कि भुक्तभोगियों की निजता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकामी से, वो बदला लिए जाने और बदनाम कर दिए जाने के जोखिम का सामना करते हैं.
स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने आगे और ज़ोर देकर कहा है कि इन मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के इस्तीफ़े भर, उनका आपराधिक जवाबदेही के लिए पर्याप्त नहीं हैं.
उन्होंने कुछ देशों द्वारा, ऐपस्टीन फ़ाइलों में सामने आए नामों के बाद, मौजूदा और पूर्व अधिकारियों व निजी व्यक्तियों की जाँच कराए जाने के निर्णय का स्वागत किया है. उन्होंने साथ ही, अन्य देशों से भी ऐसा ही करने का आहवान किया है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है, “इस तरह के सुझावों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता कि अब समय हो गया है कि ऐपस्टीन फ़ाइलों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ा जाए. ये स्थिति, भुक्तभोगियों के प्रति ज़िम्मेदारी की नाकामी को दर्शाती है.”
उनके अनुसार, “यह बहुत ज़रूरी है कि देशों की सरकारें, अपराधियों की जवाबदेही निर्धारित करने के लिए, निर्णायक कार्रवाई करें. कोई भी इतने धनी या शक्तिशाली नहीं हैं कि वो, क़ानून से ऊपर हो जाएँ.”
संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने, संयुक्त राज्य अमेरिका में पूर्व वित्त प्रबन्धक जैफ़्री ऐपस्टीन द्वारा किशोरियों के यौन शोषण मामले में अदालत में एक हज़ार से अधिक दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किए जाने की पृष्ठभूमि में कहा है कि कोई भी व्यक्ति क़ानून से ऊपर नहीं है.
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