Explainer: अंतिम दौर में राम मंदिर के पहले CEO की तलाश, जानिए योग्यता, जिम्मेदारियां और सामने खड़ी बड़ी चुनौत – India.com

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के संचालन को अधिक पेशेवर और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति करने जा रहा है. CEO के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. 11 और 12 अगस्त को करीब 20 उम्मीदवारों का इंटरव्यू प्रस्तावित है. इसके बाद चयन समिति तीन नामों की सिफारिश ट्रस्ट के सामने करेगी. ये पद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि बेहद महत्वपूर्ण संस्थागत जिम्मेदारी वाला होगा. CEO को मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था से लेकर वित्त, सुरक्षा, मानव संसाधन, श्रद्धालु सुविधाओं और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय तक कई मोर्चों को संभालना होगा.
ट्रस्ट ने इस पद के लिए काफी विस्तृत पात्रता मानदंड तय किए हैं. उम्मीदवार की उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम स्नातक की डिग्री होनी जरूरी है. इसके अलावा उम्मीदवार के पास किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, संस्थान, सरकारी विभाग या कंपनी में कम से कम 20 वर्षों का प्रबंधकीय या कार्यकारी अनुभव होना चाहिए. यानी ट्रस्ट ऐसे व्यक्ति की तलाश में है, जो बड़े और जटिल संस्थान को चलाने का पर्याप्त अनुभव रखता हो. उम्मीदवार को सामान्य प्रशासन के साथ-साथ वित्त एवं लेखा, HR, IT, जनसंपर्क, सुरक्षा और कानूनी मामलों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की समझ होना भी जरूरी माना गया है. हिंदी और अंग्रेजी भाषा में दक्षता भी चयन के मानदंडों में शामिल है.
इस पद के लिए केवल प्रशासनिक योग्यता को ही महत्व नहीं दिया गया है. उम्मीदवार का सक्रिय रूप से हिंदू धर्म का पालन करने वाला होना जरूरी बताया गया है. भगवान राम का भक्त और वैष्णव परंपरा से जुड़ा होना वांछनीय माना गया है. अगर किसी उम्मीदवार ने पहले किसी मंदिर, हिंदू धार्मिक संस्था या धर्मार्थ संगठन का प्रबंधन किया है तो उसे प्राथमिकता मिल सकती है. मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर काम कर चुके उम्मीदवारों का अनुभव भी उपयोगी माना गया है. रिटायर्ड सरकारी अधिकारी भी इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित अनुभव और अन्य योग्यताएं पूरी करते हों.

CEO मंदिर प्रशासन का प्रमुख कार्यकारी चेहरा होगा, हालांकि वह ट्रस्ट से ऊपर नहीं होगा. उसे ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करना होगा और ट्रस्ट की ओर से सौंपे गए अधिकारों के तहत काम करना होगा. उसकी जिम्मेदारियों में मंदिर का रोजमर्रा का प्रशासन, वित्त और लेखा व्यवस्था, कर्मचारियों का प्रबंधन, सुरक्षा, कानूनी और वैधानिक मामले, IT व्यवस्था तथा जनसंपर्क शामिल होंगे. इसके अलावा लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर दर्शन व्यवस्था, प्रवेश और निकास, भीड़ प्रबंधन, सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी. सरकारी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय भी CEO के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ मंदिर प्रशासन का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में ट्रस्ट को केवल धार्मिक समझ रखने वाले व्यक्ति के बजाय ऐसा वरिष्ठ प्रशासक चाहिए, जो बड़े पैमाने पर संस्थागत प्रबंधन कर सके. CEO का पद तीन साल के शुरुआती कार्यकाल के साथ बनाया गया है और पदाधिकारी को अयोध्या में रहना होगा. इससे स्पष्ट है कि यह कोई औपचारिक या प्रतीकात्मक पद नहीं बल्कि पूर्णकालिक और जमीन पर काम करने वाली जिम्मेदारी होगी. रिपोर्टों के अनुसार हजारों आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है. चयन समिति की कोशिश है कि अंतिम व्यक्ति के पास अनुभव, प्रबंधन क्षमता, ईमानदारी और धार्मिक संवेदनशीलता का संतुलन हो.
CEO के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और दान की पारदर्शिता भी शामिल होगी. मंदिर को देश-विदेश से बड़ी मात्रा में दान प्राप्त होता है. ऐसे में वित्तीय नियंत्रण, ऑडिट, रिकॉर्ड-कीपिंग और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था बनाना जरूरी होगा. सोने-चांदी सहित विभिन्न प्रकार के चढ़ावे की जांच और मूल्यांकन के लिए भी व्यवस्थित व्यवस्था की जरूरत होगी. CEO को यह सुनिश्चित करना होगा कि दान और मंदिर की संपत्तियों का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ हो.
अयोध्या में राम मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ा है. इसके साथ होटल, परिवहन, रेस्टोरेंट, पार्किंग, दुकानें और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार हो रहा है. CEO के सामने चुनौती केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं होगी. उसे श्रद्धालुओं की सुविधा, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, आपातकालीन व्यवस्थाओं और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल पर भी ध्यान देना होगा. सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि आधुनिक और पेशेवर प्रशासन के साथ मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी पूरी तरह सुरक्षित रहे. यही वजह है कि राम मंदिर के पहले CEO का चयन आने वाले वर्षों में मंदिर प्रशासन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है.
राम मंदिर CEO बनने की मुख्य योग्यता क्या है?
उम्मीदवार की उम्र 50 से 70 वर्ष, स्नातक डिग्री और बड़े संगठन या सरकारी विभाग में कम से कम 20 वर्षों का प्रबंधकीय अनुभव होना चाहिए.
CEO को किन क्षेत्रों का अनुभव होना चाहिए?
उम्मीदवार को प्रशासन, वित्त, HR, IT, सुरक्षा, जनसंपर्क और कानूनी मामलों जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रबंधन का व्यापक अनुभव होना महत्वपूर्ण माना गया है.
राम मंदिर CEO की प्रमुख जिम्मेदारी क्या होगी?
CEO मंदिर का दैनिक प्रशासन, वित्त, सुरक्षा, श्रद्धालु सुविधाएं, कर्मचारियों का प्रबंधन और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं संभालेगा.
CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
बढ़ती श्रद्धालु संख्या, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, दान में पारदर्शिता, वित्तीय व्यवस्था और तेजी से विकसित हो रहे अयोध्या के धार्मिक पर्यटन तंत्र को संभालना बड़ी चुनौती होगी.
CEO का चयन कैसे किया जाएगा?
शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद चयन समिति तीन नामों की सिफारिश करेगी, जिनमें से अंतिम नियुक्ति श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करेगा.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2018 में इन्होंने अपने सफर की शुरुआत ETV भारत से की. बतौर एंकर 3 साल तक अनगिनत खबरें पढ़ीं, लिखीं और … और पढ़े
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News