Explainer: राम मंदिर दान विवाद क्या है? कितने करोड़ रुपये गायब होने का है दावा…कैसे होती है पैसों की गिनती, जानें सबकुछ – India.Com

Ayodhya Ram Temple Donation Controversy: अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद श्रद्धालु देश-विदेश से यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. मंदिर में खूब दान भी किया जा रहा है. ऐसे में अब मंदिर में आने वाले दान को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. इन आरोपों ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर विवाद छेड़ दिया है.

दरअसल, आरोप लगाए गए हैं कि मंदिर के दानपात्रों में जमा करोड़ों रुपये की राशि का हिसाब सही नहीं है और कुछ धनराशि गायब हो सकती है. हालांकि, मंदिर ट्रस्ट इन सभी आरोपों को निराधार बता रहा है. ये मामला तब सुर्खियों में आया जब अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि राम मंदिर में आने वाले दान में भारी गड़बड़ी हुई है.
अयोध्या के पूर्व विधायक ने पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की राशि का सही हिसाब नहीं मिल रहा है. इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई. बाद में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं की तरफ से चढ़ाई गई करोड़ों रुपये की राशि के बारे में सवाल उठ रहे हैं. इसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया. वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी करीब 7 करोड़ रुपये के कथित गबन का दावा किया है.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में आने वाले हर दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाता है और सभी वित्तीय लेन-देन की नियमित ऑडिट होती है. ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि मंदिर में नकद, चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर, UPI और अन्य माध्यमों से मिलने वाले दान का अलग-अलग रिकॉर्ड रखा जाता है. ट्रस्ट से जुड़े महंत दीनेंद्र दास महाराज ने भी कहा कि मंदिर प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक प्रेरित हैं और जांच से पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया. इस टीम की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं. इसके अलावा लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को भी जांच टीम में शामिल किया गया है. सरकार का मकसद है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो इसपर कड़ा एक्शन लिया जाए. जांच टीम को शुरुआती रिपोर्ट 7 दिनों में और अंतिम रिपोर्ट 15 दिनों में देने का निर्देश दिया गया है.
राम मंदिर में दान प्रबंधन के लिए एक डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. मंदिर प्रशासन के अनुसार दान मुख्य रूप से तीन माध्यमों से प्राप्त होता है नकद दान, ऑनलाइन भुगतान और बैंक ट्रांसफर. नकद दान को मंदिर कर्मचारी सिस्टम में दर्ज करते हैं. वहीं UPI, RTGS, NEFT और अन्य डिजिटल भुगतान सीधे बैंक रिकॉर्ड से मिलान किए जाते हैं. इसके लिए SBI, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी बैंकों की सहायता ली जाती है. सिस्टम में दैनिक, साप्ताहिक और मासिक रिपोर्ट तैयार होती है, जिससे हर लेन-देन की निगरानी की जा सके.
राम मंदिर दान विवाद क्या है?
कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर के दान में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई है, जबकि ट्रस्ट इन आरोपों को गलत बता रहा है.
कितनी राशि गायब होने का दावा किया गया?
विभिन्न आरोपों में 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की राशि के गायब होने की बात कही गई है.
मामले की जांच कौन कर रहा है?
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से गठित तीन सदस्यीय SIT इस पूरे मामले की जांच कर रही है.
ट्रस्ट का क्या कहना है?
ट्रस्ट का दावा है कि सभी दान का पूरा हिसाब रखा जाता है और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है.
दान की गिनती कैसे होती है?
नकद, ऑनलाइन और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से मिले दान को डिजिटल सिस्टम में दर्ज कर बैंक रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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