एक तरफ अमेरिका-ईरान के बीच जारी जंग ने दुनिया के सामने कारोबार और सप्लाई चेन को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है, तो दूसरी तरफ भारत लगातार नए बाजारों के दरवाजे खोलने में जुटा है. पिछले कुछ महीनों में ब्रिटेन, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, ईयू और ओमान के साथ भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किए हैं. यानी एक तरफ दुनिया में ट्रेड को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है, वहीं भारत अपने निर्यातकों के लिए नए बाजार और कम शुल्क वाली पहुंच तैयार कर रहा है. अब इसके शुरुआती नतीजे भी आंकड़ों में नजर आने लगे हैं.
लंबे समय से भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) को लेकर सवाल उठते रहे हैं कि आखिर इन समझौतों का भारतीय निर्यातकों को कितना फायदा मिल रहा है. लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों के आंकड़े कुछ अलग तस्वीर दिखा रहे हैं. अप्रैल से जुलाई के बीच FTA पार्टनर देशों को भारत का निर्यात करीब 24% बढ़ा है. खास बात यह है कि इन बाजारों में निर्यात की रफ्तार नॉन-FTA देशों के मुकाबले ज्यादा रही. इसी दौरान इन देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा भी कम हुआ है. इसका बड़ा मतलब यह है कि भारत अब व्यापार के मोर्चे पर किसी एक देश या किसी एक क्षेत्र के भरोसे नहीं है, बल्कि अलग-अलग बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान FTA पार्टनर देशों को भारत का निर्यात 23.9% बढ़कर 57.2 अरब डॉलर पहुंच गया. इसके मुकाबले नॉन-FTA बाजारों में निर्यात की वृद्धि 13.9% रही. यानी जिन देशों के साथ भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं, वहां भारतीय सामान की मांग अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ी है. इस दौरान इन देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा भी 34.2 अरब डॉलर से घटकर 32.6 अरब डॉलर रह गया. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि FTA बाजारों में भारतीय निर्यातकों की पकड़ मजबूत हो रही है.
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कुल एक्सपोर्ट में FTA देशों की हिस्सेदारी बढ़ी
FTA पार्टनर देशों की भारत के कुल निर्यात में हिस्सेदारी भी बढ़ी है. अप्रैल-जुलाई की अवधि में यह हिस्सेदारी 31.1% से बढ़कर 32.9% हो गई. इन देशों को भारत का निर्यात 46.2 अरब डॉलर से बढ़कर 57.2 अरब डॉलर पहुंच गया. यानी सिर्फ निर्यात की रकम ही नहीं बढ़ी, बल्कि भारत के कुल निर्यात में FTA बाजारों का महत्व भी बढ़ा है. यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में यह आलोचना होती रही थी कि भारत ने कई देशों के साथ FTA तो किए, लेकिन भारतीय निर्यातक इन समझौतों का पूरी तरह फायदा नहीं उठा पा रहे हैं.
आखिर FTA से कैसे मिल रहा है फायदा?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत दो देशों के बीच कई सामान पर शुल्क कम या खत्म किया जाता है. इससे संबंधित देशों में भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं. पीयूष गोयल के मुताबिक, पहले निर्यातकों के सामने नियमों के तहत यह साबित करने की कागजी प्रक्रिया बड़ी अड़चन थी कि सामान वास्तव में भारत में बना है. इसे रूल्स ऑफ ओरिजिन की प्रक्रिया कहा जाता है. उनके मुताबिक, पहले इन समझौतों का फायदा कई बार आयातकों ने ज्यादा उठाया, जिससे FTA का फायदा एकतरफा नजर आता था. अब भारतीय निर्यातकों की बढ़ती हिस्सेदारी इस तस्वीर में बदलाव का संकेत दे रही है.
सिंगापुर और ओमान से मिला बड़ा सपोर्ट
FTA पार्टनर देशों में सिंगापुर भारतीय निर्यात के लिए अहम बाजार बनकर सामने आया. इस देश को शिपमेंट करीब दोगुने हुए और निर्यात में लगभग 4 अरब डॉलर की बढ़ोतरी में इसका योगदान रहा. वहीं, 1 जून 2026 से व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता लागू होने के बाद ओमान के साथ भारत का निर्यात करीब 0.6 अरब डॉलर बढ़ा. नॉन-FTA बाजारों में भी भारत को नए मौके मिले. तंजानिया से मांग में करीब 2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई.
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अफ्रीकी बाजारों में भी बढ़ रहा एक्सपोर्ट
अफ्रीका के बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में भारत के निर्यात में करीब 1.7 अरब डॉलर और केन्या में 1.1 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. पीयूष गोयल के मुताबिक, अफ्रीकी बाजारों में बड़ी युवा आबादी है और ये अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही हैं. फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटोमोबाइल, खाद्य उत्पाद, टेक्सटाइल और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए यहां अच्छी संभावनाएं हैं.
अब अगर भारत के कुल विदेशी कारोबार की तस्वीर देखें तो अप्रैल-जुलाई के बीच कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 173.8 अरब डॉलर रहा. एक साल पहले इसी अवधि में यह 148.5 अरब डॉलर था. यानी निर्यात में करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, इसी अवधि में भारत का कुल आयात 292.3 अरब डॉलर रहा. हालांकि आयात का आंकड़ा बड़ा है, लेकिन निर्यात की रफ्तार में भी मजबूत बढ़ोतरी दर्ज हुई है. सेवाओं के निर्यात से 145 अरब डॉलर जोड़ने पर अप्रैल-जुलाई में भारत का कुल एक्सपोर्ट करीब 319 अरब डॉलर रहा.
कृषि उत्पादों के निर्यात में भी आई बढ़ोतरी
भारतीय कृषि उत्पादों की विदेशी मांग में भी सुधार देखने को मिला. अप्रैल-जुलाई के दौरान कृषि निर्यात 4.5 फीसदी बढ़कर 18.18 अरब डॉलर पहुंच गया. बासमती चावल का निर्यात 25.4 फीसदी बढ़कर 1.05 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा कैस्टर ऑयल करीब 423 मिलियन डॉलर, अन्य खाद्य उत्पाद 284 मिलियन डॉलर और झींगा व प्रॉन का निर्यात करीब 226 मिलियन डॉलर रहा. इंस्टेंट कॉफी का निर्यात भी 200 मिलियन डॉलर से ऊपर रहा.
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आयात में इलेक्ट्रॉनिक की बड़ी हिस्सेदारी
दूसरी तरफ भारत के आयात में इलेक्ट्रॉनिक सामान और उससे जुड़े उत्पादों की बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है. अप्रैल-जुलाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का आयात 21.6 अरब डॉलर, कंप्यूटर हार्डवेयर और दूसरे उपकरणों का आयात 12 अरब डॉलर और बैटरी व एक्युमुलेटर का आयात 2.8 अरब डॉलर रहा. यानी भारत जहां अपने निर्यात बाजारों का विस्तार कर रहा है, वहीं कई क्षेत्रों में विदेशी सामान और इनपुट पर निर्भरता भी बनी हुई है.
FTA से बदल गई है एक्सपोर्ट की तस्वीर?
अभी सिर्फ चार महीने के आंकड़ों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि FTA ने भारत के निर्यात की पूरी तस्वीर बदल दी है. खुद पीयूष गोयल ने भी माना है कि चार महीने की अवधि छोटी है और इसमें कुछ बड़े वनटाइम शिपमेंट का असर हो सकता है. फिर भी शुरुआती आंकड़े एक सकारात्मक संकेत जरूर दे रहे हैं. FTA पार्टनर देशों को निर्यात की वृद्धि नॉन-FTA बाजारों से तेज रही है और कुल निर्यात में इन देशों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है. अगर आने वाले महीनों में यही रफ्तार बनी रहती है, तो यह भारत के लिए अहम साबित हो सकता है.
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