चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट ने सबको चौंका दिया. लेकिन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़ों को देखें तो एक सेक्टर ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया है. इस बार सर्विस सेक्टर ने इकोनॉमी में जान फूंकने का काम किया है.
दरअसल, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1) में GDP ग्रोथ रेट 7.8% रही, इतना अनुमान किसी ने नहीं लगाया था. अनुमान लगाया गया था कि अधिकतम 6.7 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट रह सकती है. जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5% रही थी.
सर्विस सेक्टर ने किया कमाल
भारत की GDP में शानदार ग्रोथ के पीछे सर्विस सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा है. सर्विस सेक्टर ने 9.3% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज कर यह साबित किया है कि अर्थव्यवस्था की असली रफ्तार यहीं से आ रही है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के मुताबिक GDP के कुल उत्पादन में सर्विस सेक्टर (Service Sector) की हिस्सेदारी 55% से अधिक है. यानी, हर ₹100 के GDP में से लगभग ₹55 सर्विस सेक्टर से आता है. यही वजह है कि इसमें तेजी आने पर पूरी अर्थव्यवस्था का ग्रोथ ट्रैक बदल जाता है.
सर्विस सेक्टर में कौन-कौन सेक्टर्स शामिल-
वित्तीय सेवाएं (Financial Services): बैंकिंग, बीमा, निवेश सेवाएं
आईटी एवं बिजनेस सर्विसेज (IT & BPO): सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट
ट्रेड एवं होटल-रेस्टोरेंट: घरेलू और विदेशी पर्यटन, होटल उद्योग
कम्यूनिकेशन एवं ट्रांसपोर्ट: एयरलाइंस, रेलवे, लॉजिस्टिक्स
रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाए: प्रॉपर्टी मार्केट, कंसल्टिंग
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इन सभी सेक्टर्स ने अच्छा प्रदर्शन किया है. खासकर IT-BPM और वित्तीय सेवाओं ने निर्यात और घरेलू मांग को बढ़ावा दिया.
आंकड़ों पर गौर करें तो सेवा सेक्टर की 9.3% की बढ़ोतरी ने कुल GDP ग्रोथ को 7.8% तक ऊपर खींचा है. क्योंकि पिछले साल समान तिमाही में सेवा सेक्टर की ग्रोथ रेट 6.8% रही थी, जिससे पिछले साल समान तिमाही में कुल GDP ग्रोथ रेट 6.5 फीसदी ही रही थी.
इसलिए अगर इस बार भी सर्विस सेक्टर का योगदान सामान्यतौर पर 6-7% पर रहतीं तो GDP की कुल बढ़ोतरी दर भी 7% से कम हो सकती थी. यही नहीं, इस सेक्टर की वृद्धि ने खपत (Consumption) को भी बढ़ाया, क्योंकि अधिक रोजगार और वेतन से लोगों की क्रय शक्ति (Buying Power) मजबूत हुई.
क्यों बढ़ा सर्विस सेक्टर?
– डिजिटलाइजेशन और आईटी एक्सपोर्ट्स में मजबूती.
– पर्यटन और घरेलू हवाई यात्रा में रिकॉर्ड बढ़ोतरी.
– वित्तीय सेवाओं और डिजिटल पेमेंट्स की तेजी.
जानकारों की मानें तो आने वाले वर्षों में भारत का सर्विस सेक्टर ही GDP ग्रोथ का मुख्य इंजन रहेगा. हालांकि कृषि सेक्टर का जीडीपी को सपोर्ट मिला है. 2025-26 की पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.7% रही. यह पिछले वर्ष की समान तिमाही (Q1 2024-25) में दर्ज 1.5% की तुलना में कहीं बेहतर है.
NSO के आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही के दौरान भारत की GDP में कृषि और संबद्ध गतिविधियों का योगदान लगभग 15-18% है. यानी, हर ₹100 के GDP में से लगभग ₹16-17 रुपये खेती, पशुपालन और मत्स्य पालन से आते हैं. इसका मतलब है कि कृषि उत्पादन में इस बार अच्छा सुधार हुआ है. कृषि क्षेत्र 50% से ज्यादा भारतीय आबादी को रोजगार देता है. खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), वस्त्र उद्योग (Textile), डेयरी और FMCG पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं.
इसके अलावा निर्माण और विनिर्माण दोनों ही क्षेत्रों में लगभग 7.6–7.7% की मजबूत बढ़ोतरी हुई. हालांकि, खनन और उत्खनन क्षेत्र में –3.1% की गिरावट देखी गई. बिजली, गैस, जल आपूर्ति जैसी सेवाओं में वृद्धि बेहद सीमित रही और यह केवल 0.5% रही.
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