Gurgaon News: नगर निगम ने शहर में जलनिकासी के नाम पर पांच साल में 150 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं। कई नाले तो बनाए पर जल निकासी के इंतजाम ही नहीं किए। आईआईटी की एक विशेष टीम की ओर से तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। निगम के पिछले पांच साल में किए गए तमाम दावे और प्रयास नाकाम साबित हुए हैं। इस वजह से शहर में जलभराव हो रहा है।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि निगम अधिकारियों ने अपनी प्लानिंग में बड़ी लापरवाही बरतते हुए पिछले पांच साल में बनाए गए दस से अधिक नालों को मुख्य नालों से जोड़ना ही भूल गए। इस गंभीर खुलासे के बाद अब निगम अधिकारी नए सिरे से पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम करने में जुट गए हैं। अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण शहर में बीते डेढ दशक से जलभराव हो रहा है।
आईआईटी की रिपोर्ट में जुलाई 2025 में हुई भीषण बारिश के आंकड़ों का विशेष अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जब गुरुग्राम में लगातार तीन घंटे तेज बारिश होती है, तो हालात बेहद विकट हो जाते हैं। केवल तीन घंटे के दौरान पूरे शहर में 10.7 सेंटीमीटर यानी 107.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसमें सबसे तेज दौर में एक घंटे के भीतर 73 मिमी पानी बरसा था। इस भारी बारिश के कारण महज छह घंटे के भीतर शहर में कुल 3148 करोड़ लीटर पानी इकट्ठा हो जाता है। इसमें से 3098 करोड़ लीटर पानी सीधे आसमान से बरसता है, जबकि 50 करोड़ लीटर पानी अरावली की पहाड़ियों और बाहरी इलाकों से बहकर शहर के अंदर आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जलभराव केवल एक चौराहे की समस्या नहीं है, बल्कि शहर के 117 सेक्टर आपस में 257 रास्तों से जुड़े हैं, जहां से पानी एक सेक्टर से दूसरे में बहकर बाढ़ जैसी स्थिति बनाता है। छह घंटे के भीतर शहर में लगभग 294 करोड़ लीटर पानी एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में बहता है। सबसे ज्यादा पानी सेक्टर 1 से 111 की तरफ (4.42 करोड़ लीटर), सेक्टर 55 से 56 की तरफ (3.24 करोड़ लीटर) और सेक्टर 36ए से 36बी की तरफ (2.81 करोड़ लीटर) बहता है। इसके अलावा, 107.3 मिमी बारिश होने पर राजीव चौक के पास 500 मीटर के दायरे में 8.42 करोड़ लीटर, सुभाष चौक पर 7.68 करोड़ लीटर और शीतला माता रोड पर 5.26 से 10.80 करोड़ लीटर पानी जमा हो जाता है, जहां पानी आधा मीटर तक उठ जाता है।
आईआईटी टीम द्वारा नगर निगम आयुक्त को सौंपी गई रिपोर्ट में इंजीनियरिंग विंग के काम और प्लानिंग को बेहद खराब बताया गया है। रिपोर्ट में उन प्रमुख नालों का खुलासा हुआ है जिन्हें बिना जोड़े ही छोड़ दिया गया है:
– आइनॉक्स मॉल से चिंतपूर्णी मंदिर तक का नाला आज तक मुख्य नाले से नहीं जोड़ा गया है।
– दौलताबाद फ्लाईओवर से द्वारका एक्सप्रेस वे तक का नाला भी अधूरा पड़ा है।
– सेक्टर-नौ से लेकर सूर्या विहार तक का नाला मुख्य नाले से नहीं जुड़ा है।
– भोंडसी गांव में तालाब तक का नाला गलत तरीके से बना दिया गया है।
– चौमा रोड पर बना नाला भी मुख्य नाले से कनेक्ट नहीं है।
– सेक्टर-4 में बनाया गया छोटा नाला मुख्य नाले से नहीं जोड़ा गया है।
– न्यू पालम विहार क्षेत्र में पानी की निकासी के लिए नाला ही मौजूद नहीं है।
आईआईटी गांधी नगर की टीम द्वारा किए गए सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जलभराव की रोकथाम के लिए योजना तैयार की जा रही है। जहां नाले नहीं जुड़े हैं, उनको भी मुख्य नालों से जोड़ा जाएगा।
– विजय ढाका, मुख्य अभियंता, नगर निगम, गुरुग्राम
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