Gurgaon News: टेंडर गड़बड़ी में फंसे ड्राफ्ट्समैन के भाई और सोसाइटी के खिलाफ मामला दर्ज – Hindustan

Gurgaon News: गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। नगर निगम गुरुग्राम में सरकारी टेंडरों में गड़बड़ी करने वाले हेड ड्राफ्ट्समैन, उसके भाई और सोसायटी के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता प्रवीण राघव की शिकायत पर सदन थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की है। अब इस मामले की पुलिस जांच करने में जुट गई है। आरोप है कि टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने का एक बड़ा खेल इनके द्वारा किया गया। इस पूरे मामले में शामिल हेड ड्राफ्ट्समैन सोमबीर सैनी को निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस और व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही मुख्य अभियंता जोन-5 प्रवीण राघव की शिकायत पर थाना सदर गुरुग्राम में आरोपी राहुल ठेकेदार और जेआर कॉपरेटिव एल-एंड-सी सोसाइटी लिमिटेड फर्म के खिलाफ मुकदमा नंबर 456 दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336(3), 338, 340 और 61 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है。

खुफिया रिपोर्ट और विभागीय जांच के अनुसार, टेंडर हासिल करने वाली फर्म का आरोपी राहुल वास्तव में बर्खास्त कर्मचारी सोमबीर सैनी का पिता है और संबंधित कंपनी उसके भाई की है। सोमबीर सैनी ने नगर निगम में अपने पद पर रहते हुए टेंडरों की जांच और पात्रता नियमों का उल्लंघन किया। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने एक जनवरी 2021 से 13 जुलाई 2026 के बीच सरकारी टेंडरों में गलत तरीके से पात्रता पाने के लिए ईएसआई, ईपीएफ और टर्नओवर के जाली व फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभाग में जमा कराए थे। शिकायत मिलने के बाद जब उच्चाधिकारियों ने तकनीकी अभिलेखों की गहनता से पड़ताल की, तो इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस को आधिकारिक शिकायत दी गई।

बता दें कि ड्राफ्ट्समैन को नगर निगम ने कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम सौंपा हुआ था। ड्राफ्ट्समैन एक डिविजन के टेंडरों को खोलने, कागजों की जांच करने काम करता था, लेकिन ड्राफ्ट्समैन ने कुर्सी पर रहते हुए अपने भाई और पिता के नाम एजेंसी बनाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर अपने फर्म के नाम खोल दिए। इस मामले को लेकर जब शिकायत हुई तो आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार ने चार जून को इस खबर को कम्प्यूटर ऑपरेटर खुद टेंडरों में कर रहे आवेदन शीर्षक के साथ खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर पर संज्ञान लेते हुए शहरी स्थानीय निकाय विभाग मुख्यालय ने निगम आयुक्त से इस मामले को लेकर जवाब मांगा था। इसके बाद निगम आयुक्त ने मुख्य अभियंता और अतिरिक्त निगम आयुक्त यश जालुका को इसकी जांच सौंपी थी।

विभागीय जांच में पुष्टि हुई है कि सोमबीर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने पिता और नजदीकी रिश्तेदारों से जुड़ी एजेंसियों को कुल एक करोड़ एक लाख रुपये के चार टेंडर दिलाए। नगर निगम के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद मुख्य अभियंता से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई गई थी। जांच के दौरान टेंडर दस्तावेजों, तकनीकी अभिलेखों और संबंधित पक्षों के जवाबों की गहनता से पड़ताल की गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि टेंडर दस्तावेजों की स्क्रूटनी के दौरान जानबूझकर गंभीर लापरवाही बरती गई। पात्रता पूरी नहीं होने के बावजूद फर्जी कागजात के सहारे तीन टेंडर 25-25 लाख रुपये के और एक टेंडर 26 लाख रुपये का संबंधित एजेंसियों को आवंटित कर दिया गया।

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