Gym Tips for Beginners: इंस्टाग्राम रील्स देखकर जिम जाने वाले हो जाएं सावधान! बिना सोचे-समझे एक्सरसाइज करने से हो रहीं ये समस्याएं – AajTak

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इंस्टाग्राम हो या फेसबकु, आप जैसे ही स्कॉल करेंगे तो देखेंगे कि लोग हैवी डेडलिफ्ट और इंटेस ट्रेनिंग करते नजर आते हैं. ऐसे में लोग उन्हें देखकर मोटिवेशन लेते हैं और जिम जाकर उनकी ही तरह वेट उठाने की कोशिश करते हैं. सोशल मीडिया पर फिटनेस वाले वीडियोज देखकर आजकल जिम जाना भी एक ट्रेंड बन गया है. कम उम्र से लेकर अधिक उम्र वाले लोग भी रोजाना जिम जा रहे हैं. हालांकि जिम जाना शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है लेकिन जब कोई जिम में जाकर ईगो लिफ्टिंग करता है या जरूरत से अधिक वेट उठाता है तो उसे खतरनाक चोट भी लग सकती है.
पिछले कुछ सालों में हुई रिसर्च बताती हैं कि फिटनेस के प्रति जिस तरह से लोगों को रुझान बढ़ा है, उतनी ही तेजी से उनमें चोट लगने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. साइंस डायरेक्ट में पब्लिश्ड रिसर्च का कहना है आधे से अधिक चोटें वर्कआउट शुरू करने के शुरुआती 3 महीनों के अंदर लगती हैं. 
क्या कहते हैं डॉक्टर
श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. अखिलेश राठी का कहना है, ‘पिछले कुछ महीनों में जिम जाने वाले युवाओं में स्लिप डिस्क, लोअर बैक पेन और घुटने की इंजरी (ACL Tear) के मामले 35 से 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं. इसका सबसे बड़ा कारण ब्लाइंड रील्स फॉलोइंग यानी सोशल मीडिया वीडियोज को आंख मूंदकर कॉपी करना है. बिगिनर्स बिना कोर स्ट्रेंथ बनाए एडवांस हैवी लिफ्टिंग शुरू कर देते हैं जिससे रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर अचानक दबाव पड़ता है और वे गंभीर रूप से चोटिल हो जाते हैं.’
‘ज्यादातर शुरुआती लोगों को चोट एक्सरसाइज करने से नहीं लगती, बल्कि गलत तरीके से एक्सरसाइज करने से लगती है. हम ऐसे लोगों में लिगामेंट में खिंचाव, पीठ के निचले हिस्से में चोट और कंधे की समस्याओं के अधिक मामले देख रहे हैं जिन्होंने अपनी नींव बनाए बिना ही हैवी एक्सरसाइज करनी शुरू कर दी. बायोमैकेनिक्स रिसर्च भी इस बात का समर्थन करती हैं कि गलत पोजीशन, अत्यधिक भार और थकान जोड़ों पर तनाव और चोट के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा देते हैं.’
रील्स की अंधी नकल क्यों खतरनाक?
रिपोर्ट के अनुसार, बिगिनर्स सबसे बड़ी गलती ईगो लिफ्टिंग यानी दिखावे के लिए बहुत भारी वजन उठाकर करते हैं. सोशल मीडिया पर 30 सेकंड की क्लिप में जो एक्सरसाइज आसान दिखती है, उसके पीछे एथलीट्स की सालों की मेहनत होती है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट बताती है कि बिना सही फॉर्म और टेक्निक के एडवांस लेवल की वेट ट्रेनिंग करने से मसल्स टियर और स्लिप डिस्क जैसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी खड़ी हो रही हैं. 
WebMD के अनुसार, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स का बॉडी टाइप और उनकी स्ट्रेंथ बिल्कुल अलग होती है, इसलिए किसी रील को देखकर खुद प्रयोग करना भारी पड़ सकता है.
सुरक्षित ट्रेनिंग के लिए क्या करें?
मायो क्लीनिक और फिटनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिम में खुद को चोट से बचाने के लिए इन बुनियादी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. जैसे
वॉर्म-अप कभी न छोड़ें: बिना वॉर्म-अप के सीधे हैवी वेट उठाने से नस चढ़ने या गंभीर खिंचाव का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. वर्कआउट से पहले 10 मिनट स्ट्रेचिंग जरूर करें.
रील्स नहीं, ट्रेनर की सुनें: जिम में मौजूद सर्टिफाइड कोच से अपना पर्सनल वर्कआउट चार्ट बनवाएं और उनके सामने ही एक्सरसाइज करें.
प्रोग्रेसिव ओवरलोड अपनाएं: पहले ही दिन से भारी वजन उठाने की जगह हल्के डंबल्स से शुरुआत करें. जब आपका पोस्चर बिल्कुल सही हो जाए, तब धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं.
बॉडी सिग्नल्स को पहचानें: वर्कआउट के नॉर्मल पेन और इंजरी के दर्द में अंतर होता है. अगर किसी जॉइंट में तेज दर्द हो, तो तुरंत एक्सरसाइज रोक दें और डॉक्टर से संपर्क करें.
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