अमेरिका-ईरान में युद्ध (US-Iran War) तेज हो गया है और ताबड़तोड़ अमेरिकी हमलों के बीच ईरान ने फिर पुराना रुख अपनाया है और पलटवार करते हुए दुनिया की तेल जरूरत को पूरा करने के लिए जरूरी समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट को बंद (Hormuz Strait Close Again) कर दिया है, जो दुनिया की कुल तेल जरूरत के 20 फीसदी की आपूर्ति के लिए अहम है. इस कदम से ग्लोबल टेंशन बढ़ गई है और होर्मुज संकट फिर से खड़ा होने से दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस के क्राइसिस को लेकर चिंता बढ़ गई है.
बता दें फिर से छिड़ी इस जंग से पहले करीब 100 दिनों से ज्यादा समय तक चले युद्ध के दौरान Hormuz के बंद होने से पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन, साउथ कोरिया समेत भारत ने Oil Gas Crisis का सामना किया था और इस दौरान एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी (LPG Price Hike) के साथ ही पेट्रोल-डीजल के भाव में इजाफा (Petrol-Diesel Price Hike) देखने को मिला था. अब ताजा संकट के बीच दिग्गज अर्थशास्त्रियों ने अलर्ट किया है और कहा है कि भारत को बहुत बड़े तेल भंडार की जरूरत है.
इकोनॉमिस्ट बोले- करना होगा ये काम
योजना आयोग के पूर्व डिप्टी चेयरमैन और दिग्गज अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने ‘Hormuz Crisis Return’ को लेकर कहा है कि, ‘हर जगह कमी थी और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन हो सकता है कि हमें ऐसे संकट का सामना करना पड़े, जो सिर्फ हमें प्रभावित करे.’ इसके लिए उन्होंने बचाव का तरीका बताते हुए कहा कि भारत को अपने नियंत्रण में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को काफी बढ़ाना चाहिए, क्योंकि वेस्ट एशिया संकट ने दिखाया है कि सीमित सप्लाई रूट और कम इमरजेंसी स्टॉक पर निर्भरता के जोखिम क्या हैं.
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में आए पिछले संकट से मिले सबक लेते हुए हमें बहुत बड़े भारतीय भंडार की जरूरत है और इसका मूल रूप से मतलब है देश के अलग-अलग हिस्सों में स्टोरेज क्षमता बनाना. उन्होंने बताया कि भारत की कुल स्ट्रेटिजिक क्रूड ऑयल रिजर्व की क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) है. इन्हें तीन जगहों पर स्टोर किया जाता है, जिनमें विशाखापत्तनम (1.33 MMT), मंगलुरु (1.5 MMT) और पादुर (2.5 MMT) शामिल हैं.
भारत के Plan-B ने किया काम
अहलूवालिया ने कहा कि भारत ने इससे पहले होर्मुज संकट को काफी अच्छे तरीके से संभाला. इस जरूरी समुद्री रूट में रुकावट ने अलग-अलग स्रोतों से एनर्जी सप्लाई, बड़े घरेलू भंडार की जरूरत को उजागर किया. आयात स्त्रोतों में विविधता और घरेलू प्रोडक्शन में इजाफे समेत संकट में भारत सरकार द्वारा प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) के तहत उठाए गए कदमों ने स्थिति को संभाला और होर्मुज संकट उतना बुरा असर नहीं डाल सका, जितना लोगों ने सोचा था.
उन्होंने कहा कि, ‘इस बीच बड़ा सबक सिर्फ तेल के लिए नहीं है, बल्कि आजकल हर चीज के लिए मिला है कि आपके पास सप्लाई के अलग-अलग स्रोत होने चाहिए, क्योंकि एक ही जगह पर निर्भरता का जोखिम (जिसे ‘चोकपॉइंट’ कहते हैं) मुसीबत खड़ा कर सकता है. जाने-माने अर्थशास्त्री ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दो प्राथमिकताएं बताईं हैं. एक विविधता लाना और दूसरी हमारे रणनीतिक भंडार को बढ़ाना.
फिर ग्लोबल टेंशन हाई, क्रूड में आग
एक बार फिर Hormuz Strait Crisis और वेस्ट एशिया में युद्ध की स्थिति बनी है. इससे तेल सप्लाई कम होने की आशंका गहरा गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है. Brent Crude Price 76 डॉलर प्रति बैरल, तो WTI Crude 71 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा था. बता दें कि बीते मार्च-अप्रैल में जब US-Iran War चरम पर था, तो उस समय तेल की कीमतें लगभग $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं.
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