How long Pakistan fight war against India: भारत और पाकिस्तान में युद्ध की संभावनाएं दिन-प्रतिदिन मजबूत होती जा रही हैं. लेकिन अगर जंग छिड़ी तो पाकिस्तान कितनों तक भारत की सेना का मुकाबला कर पाएगा, इस सवाल का जवाब अब मिल गया है.
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Pakistan Military Capabilities Against India: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान जंग के मुहाने पर खड़े हैं. ऐसे में सवाल है कि अगर जंग छिड़ी तो शक्तिशाली हो चुके भारत के सामने पाकिस्तान कितने दिनों तक टिक पाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना तोपखाना गोला-बारूद की गंभीर कमी का सामना कर रही है. इसके चलते उसकी जंग लड़ने की क्षमता सीमित होकर रह गई है. इसकी कई वजहें हैं, जिसके चलते पाकिस्तानी सेना के जनरलों में घबराहट और चिंता है. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि भारत कब और कैसे अटैक करेगा. अगर अटैक हुआ तो पाकिस्तान सेना बेहद कम संसाधनों से उसका मुकाबला कैसे कर पाएगी.
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना सिर्फ चार दिन तक ही युद्ध लड़ सकती है, क्योंकि तोपों के गोला-बारूद की भारी कमी है. गोला-बारूद के बिना पाकिस्तान की तोपें और हथियार निष्क्रिय और असहाय हो गए हैं.
पाकिस्तान में कैसे हो गई हथियारों की कमी?
सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक संकट के चलते पाकिस्तान ने 2022 से यूक्रेन (और संभवतः इज़राइल) को भारी मात्रा में गोला-बारूद बेचा. कहा जा रहा है कि फरवरी–मार्च 2023 के बीच पाकिस्तान ने यूक्रेन को 42,000 बीएम-21 (122mm) रॉकेट, 60,000 155mm हॉवित्जर गोले और 130,000 122mm रॉकेट सप्लाई किए. इससे 364 मिलियन डॉलर की कमाई हुई.
सूत्रों का कहना है कि 80% मुनाफा कथित तौर पर रावलपिंडी स्थित जीएचक्यू यानी पाकिस्तानी मिलिट्री हेडक्वार्टर को गया. इस सप्लाई की वजह से 2022–23 में पाकिस्तान का रक्षा निर्यात बढ़कर 415 मिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 3000% की वृद्धि है.
कमजोर हो गई पाकिस्तानी सेना?
डॉलर कमाने के चक्कर में दूसरे देशों को मिलिट्री हार्डवेयर सप्लाई करने से पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं कमजोर हो गई हैं. इसके चलते 155mm गोले जो M109 हॉवित्जर और SH-15 MGS जैसी तोपों के लिए जरूरी हैं, वे अब बेहद कम स्टॉक में हैं. इन गोलों की कमी से उन्हें चलाने वाली तोपें भी अप्रभावी हो गए हैं.
जंग के लिए पाकिस्तान का सैन्य सिद्धांत
पाकिस्तान की रणनीति भारत के खिलाफ तेज जवाबी कार्रवाई और भारी तोपखाना इस्तेमाल पर आधारित है. गोला-बारूद की कमी के चलते पाकिस्तान की रोकथाम और बचाव की क्षमता कमजोर हो गई है.
इन वजहों ने बांध दिए हैं हाथ
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सामने पसरा आर्थिक संकट बेहद गंभीर है, जिसके चलते उसकी सैन्य प्रतिक्रिया पर सीमाएं लग गई हैं. पाकिस्तान में बढ़ती मुद्रास्फीति, कर्ज और ईंधन की कमी के कारण वहां पर सेना को दिए जा रहे भोजन में कटौती की जा रही है. वहां होने वाले सैन्य अभ्यासों पर रोक लगा दी गई है.
आर्थिक तंगी की वजह से पाकिस्तान में वार गेम्स स्थगित कर दिए गए हैं.
पूर्व सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने भी माना था कि पाकिस्तान के पास लंबी लड़ाई के संसाधन नहीं हैं.
सैन्य मुनाफाखोरी से लोगों में बढ़ रही नाराजगी
पाकिस्तानी सेना पर डॉलर के लालच में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लग रहा है. आम लोगों में इस बात को लेकर नाराज़गी बढ़ रही है कि सेना ने मुनाफा कमाया और देश को खतरे में डाल दिया.
पाकिस्तान की तैयारी पर क्या पड़ रहा असर?
भारत के खिलाफ सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए पाकिस्तानी सेना ने भारत-पाक सीमा के पास गोला-बारूद डिपो बनाए हैं, लेकिन खाली स्टॉक के कारण ये भी बेकार साबित हो सकते हैं. जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान चार दिन से ज्यादा युद्ध नहीं लड़ सकता.
सैन्य नेतृत्व में चिंता और हलचल
पाकिस्तान की सैन्य उच्च कमान में गंभीर चिंता और घबराहट का माहौल है. यह मुद्दा 02 मई 2025 को हुई स्पेशल कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में प्रमुखता से उठाया गया लेकिन इसका कोई जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं था.
(रिपोर्टर अनुवेश रथ का इनपुट)
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