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जब सूर्य की तपिश प्रचंड होती है, तब ज्येष्ठ की गर्मी तपाती है. घर से बाहर निकलो तो जलाती है. छांव में बैठने से भी शरीर पसीने से तरबतर रहता है. 2 मई से ज्येष्ठ माह शुरू हो रहा है. ज्योतिष के जानकारों का दावा है कि इस बार ज्येष्ठ के साथ अधिक मास भी जुड़ रहा है, जिससे ज्येष्ठ माह बढ़कर 59 दिन का हो गया है. इस बार ज्येष्ठ माह 2 मई से लेकर 29 जून तक रहने वाला है. इस बीच 17 मई से लेकर 17 जून तक अधिक मास भी रहेगा.
क्या है अधिक मास?
चंद्रमा के आधार पर एक साल लगभग 354-355 दिनों का होता है. जबकि सूर्य के आधार पर एक वर्ष 365 दिन का माना जाता है. इसी अंतर को कम करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं. इस मास का स्वामी भगवान विष्णु को माना जाता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है.
ज्येष्ठ महीने की शुभ तिथियां
ज्येष्ठ माह में मंगलवार की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. इसे बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है. इस दिन लोग पूरी श्रद्धा के साथ वीर बजरंगबली की पूजा करते हैं. हालांकि इस बार ज्येष्ठ में 4 या 5 की जगह 8 बड़े मंगल आने वाले हैं. इस बार ज्येष्ठ में 5 मई, 12 मई, 19 मई, 26 मई, 2 जून, 9 जून, 16 जून और 23 जून बड़ा मंगल पड़ रहा है. इसके अलावा 13 मई को अपरा एकादशी, 16 मई को शनि जयंती और वट सावित्री व्रत, 25 मई को गंगा दशहरा और 25 जून को निर्जला एकादशी मनाई जाएगी.
ज्येष्ठ माह में कैसे कमाएं पुण्य?
ज्येष्ठ के महीने में गंगा स्नान परम पुण्यकारी माना गया है. इसलिए इस महीने में समय मिलता की गंगा में आस्था की डुबकी जरूर लगाएं. ज्येष्ठ महीने में रविवार का व्रत रखने का बहुत महत्व है. पूजा के बाद दान-पुण्य के कार्य भी करें. इस महीने जल का दान करना या जल के पात्र का दान करना बहुत ही शुभ माना गया है. पशु-पक्षियों के लिए पीने का पानी रखें. पेड़-पौधों को नियमित पानी दें. आप सत्तू या मौसमी फलों का दान करना भी कर सकते हैं.
ज्येष्ठ माह की पूजन विधि
ज्येष्ठ माह में हनुमान जी की पूजा से बड़ा लाभ मिलता है. इस माह के सभी मंगलवार को लाल या केसरिया रंग के कपड़े पहनकर हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान बजरंगबली के सामने चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें. हनुमान जी को रोट का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए इसे अर्पित किया जा सकता है. साथ ही लड्डू, गुड़-चना या नारियल भी भोग के रूप में चढ़ाया जा सकता है. यदि आप चाहें तो इस दिन हनुमान जी को चोला भी चढ़ा सकते हैं. इसके लिए चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर उनका लेप तैयार करें और उसे प्रतिमा पर लगाएं. फिर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या हनुमान अष्टक का पाठ करें.
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