Madhubani News: गवेंद्र मिश्रा मधुबनी। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ने और नेपाल सरकार की सख्त भंसार (सीमा शुल्क) व्यवस्था का असर अब सीमावर्ती बाजारों पर साफ दिखने लगा है। जयनगर, लदनियां, लौकहा, लौकही, बासोपट्टी, उमगांव, हरलाखी, साहरघाट और मधवापुर के बाजारों में नेपाली ग्राहकों की संख्या तेजी से घटी है। इससे सीमावर्ती बाजारों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि पहले जहां दिनभर बाजारों में चहल-पहल रहती थी, वहीं अब अधिकांश दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहता है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी अनिल बैरोलिया और पवन यादव ने बताया कि जयनगर अनुमंडल के सीमावर्ती बाजारों में पहले प्रतिदिन करीब सात करोड़ रुपये का खुदरा और थोक कारोबार होता था। मौजूदा समय में यह कारोबार सामान्य दिनों की तुलना में 20 प्रतिशत से भी कम रह गया है। व्यापारी अजय गुप्ता के अनुसार इन बाजारों का लगभग 70 प्रतिशत कारोबार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर है, जबकि स्थानीय ग्राहकों से 20 से 30 प्रतिशत ही बिक्री होती है।
नेपाल सरकार ने 500 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य का घरेलू सामान भारत से ले जाने पर भंसार शुल्क अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही सीमा पर कस्टम जांच भी कड़ी कर दी गई है। आटा, चावल, दाल, चीनी, खाद्य तेल, कपड़ा, बर्तन और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं पर शुल्क लगने से नेपाली नागरिकों की खरीदारी प्रभावित हुई है। कई लोग कम सामान खरीद रहे हैं, जबकि कुछ अतिरिक्त शुल्क के कारण भारतीय बाजारों में खरीददारी करने नहीं आ रहे हैं। 48वीं बटालियन एसएसबी मुख्यालय जयनगर के उप कमांडेंट हरि नारायण जाट ने बताया कि आम लोगों की सुविधा को देखते हुए घरेलू उपयोग के लिए पांच किलो तक आलू, प्याज तथा 20 किलो तक चावल ले जाने की छूट है। लेकिन बोरी ले जाने की कोई अनुमति नहीं है।
धनुषा, महोत्तरी, सिरहा, लहान, बरियारपट्टी और आसपास के क्षेत्रों से वर्षों से हजारों नेपाली नागरिक रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के लिए जयनगर, महिनाथपुर, बासोपट्टी और मधवापुर के बाजारों में आते रहे हैं। भारतीय बाजारों में सामान सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था काफी रही है।
स्थानीय लोग व जयनगर-बेतौन्हा सीमा पर स्थित दुकानदार धनेश्वर कुमार नायक, जय कुमार गुप्ता, अमित कुमार, अमित कुमार, पप्पू पूर्वे, संतोष कुमार पूर्वे ने बताया कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों से बेटी-रोटी के रिश्ते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों का सामाजिक और आर्थिक जीवन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। ऐसे में रोजमर्रा के सामान के आवागमन पर बढ़ी सख्ती से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उनका कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन आम नागरिकों की जरूरतों और सीमावर्ती व्यापार को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
भारत-नेपाल सीमा से घरेलू उपयोग के लिए सीमित मात्रा में खुला सामान ले जाने की अनुमति है। बोरी पैक या व्यावसायिक मात्रा में सामान ले जाना नियमों के विरुद्ध है। व्यापारिक उद्देश्य से सामान नेपाल भेजने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित जयनगर के बेतौन्हा और हरलाखी के पिपरौन कस्टम मार्ग का उपयोग करना होगा। कस्टम की सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही सामान सीमा पार ले जाया जा सकता है।
-राजेन्द्र कुमार, कमांडेंट,एसएसबी मुख्यालय जयनगर, 48वीं बटालियन।
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