Rashmi Singh
Date: 18-10-26 11:48
Navratri Havan: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ हवन करने का भी विशेष महत्व है. नौ दिनों तक व्रत और पूजा करने वाले भक्त महाअष्टमी या महानवमी के दिन हवन करके अपनी साधना संपन्न करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हवन के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है और परिवार की सुख-शांति, खुशहाली व समृद्धि की कामना की जाती है. हवन के बाद कई घरों में कन्या पूजन किया जाता है और कन्याओं को भोजन कराकर उपहार या दक्षिणा दी जाती है. अगर आप भी नवरात्रि में हवन करने की तैयारी कर रहे हैं, तो इसकी सामग्री, विधि और मंत्रों के बारे में जानना आपके लिए उपयोगी होगा.
महाअष्टमी और महानवमी पर हवन का शुभ समय
नवरात्रि में हवन करने के लिए अष्टमी या नवमी तिथि का चयन अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार करना चाहिए. कुछ भक्त सुबह स्नान और मां दुर्गा की पूजा के बाद हवन करते हैं, जबकि कई लोग शुभ मुहूर्त देखकर अनुष्ठान संपन्न करते हैं. साल 2026 में अष्टमी और नवमी की तिथियों को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अंतर बताया जा रहा है. ऐसे में हवन का समय तय करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग में तिथि और मुहूर्त की पुष्टि कर लें.
महाअष्टमी पर हवन के लिए शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर को हवन के लिए सुबह 8:27 बजे से शाम 5:49 बजे तक का समय बताया गया है. वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक बताया गया है. सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 3:38 बजे से शुरू होने की जानकारी भी दी गई है. 19 अक्टूबर को हवन के लिए सुबह 6:24 बजे से 10:51 बजे तक का समय बताया गया है. हालांकि, इन समयों का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय पंचांग या किसी जानकार पुरोहित से पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि मुहूर्त स्थान और तिथि के अनुसार अलग हो सकते हैं.
नवरात्रि में हवन क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं में हवन को नवरात्रि की पूजा और साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. नौ दिनों तक व्रत रखने, मंत्र जाप करने और मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के बाद हवन के जरिए भक्त अपनी पूजा को पूर्णता प्रदान करते हैं. इस दौरान अग्नि में आहुतियां अर्पित करके देवी से परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है. साथ ही, पूजा के दौरान अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा भी मांगी जाती है. हवन के बाद आरती, कन्या पूजन और प्रसाद वितरण की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है.
हवन के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी?
नवरात्रि का हवन शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह रख लेना बेहतर रहता है. इसके लिए हवन कुंड, आम की सूखी लकड़ियां या उपले, शुद्ध देसी घी, कपूर और हवन सामग्री की जरूरत होती है. इसके अलावा जौ, तिल, चावल, शक्कर, पान, सुपारी, लौंग, फूल और जल से भरा पात्र भी रखा जा सकता है. पूर्णाहुति के लिए नारियल या गोला और पूजा के बाद वितरण के लिए हलवा, पूरी व काले चने का प्रसाद तैयार किया जा सकता है. सामग्री में स्थानीय परंपरा के अनुसार कुछ बदलाव भी हो सकते हैं.
नवरात्रि हवन की विधि क्या है?
हवन के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ कर लें. इसके बाद हवन कुंड को सुरक्षित स्थान पर स्थापित करें और मां दुर्गा का ध्यान करते हुए हवन का संकल्प लें. पूजा की शुरुआत आचमन और पवित्रीकरण से की जा सकती है. इस दौरान “ॐ केशवाय नमः”, “ॐ नारायणाय नमः” और “ॐ माधवाय नमः” मंत्रों का जाप किया जाता है. इसके बाद हवन कुंड में सूखी लकड़ियां व्यवस्थित करके सुरक्षित तरीके से अग्नि प्रज्वलित करें और अग्नि देव का स्मरण करें.
इन मंत्रों के साथ दें हवन में आहुति
अग्नि प्रज्वलित होने के बाद परंपरा के अनुसार शुरुआती आहुतियां “ॐ अग्नये स्वाहा”, “ॐ सोमाय स्वाहा” और “ॐ प्रजापतये स्वाहा” मंत्रों के साथ दी जा सकती हैं. इसके बाद भगवान गणेश, नवग्रह, कुलदेवता और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का स्मरण करते हुए आहुतियां अर्पित करें. हवन के दौरान मंत्रों का उच्चारण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करना चाहिए. यदि मंत्रों के सही उच्चारण या विधि को लेकर कोई संदेह हो, तो पुरोहित के मार्गदर्शन में अनुष्ठान करना बेहतर है.
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के हवन मंत्र
नवदुर्गा की आराधना के दौरान मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक सभी नौ स्वरूपों का स्मरण किया जाता है. हवन में परंपरा के अनुसार प्रत्येक स्वरूप के मंत्र के साथ आहुति अर्पित की जा सकती है. मां शैलपुत्री के लिए “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः स्वाहा”, मां ब्रह्मचारिणी के लिए “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः स्वाहा” और मां चंद्रघंटा के लिए “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः स्वाहा” मंत्र का जाप किया जाता है. इसी क्रम में मां कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के मंत्रों से आहुति अर्पित की जा सकती है.
पूर्णाहुति के बाद करें आरती और कन्या पूजन
हवन के समापन पर अपनी परंपरा के अनुसार पूर्णाहुति अर्पित करें और मां दुर्गा की आरती करें. इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते हुए पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें. कई घरों में हवन के बाद कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें कन्याओं को भोजन कराया जाता है और उन्हें उपहार या दक्षिणा देकर सम्मानित किया जाता है. अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया जाता है. हवन करते समय आग से सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और हवन कुंड को कभी भी बिना निगरानी के न छोड़ें.
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