News9 Global Summit Germany Edition: 9-10 अक्टूबर को जर्मनी में सजेगा न्यूज-9 ग्लोबल समिट का मंच – TV9 Bharatvarsh

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टीवी9 नेटवर्क के न्यूज-9 ग्लोबल समिट का दूसरा संस्करण 9 से 10 अक्टूबर तक जर्मनी के स्टटगार्ट में आयोजित होने जा रहा है. वैश्विक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है और भारत जैसी नई शक्तियां गर्व और आत्मविश्वास के साथ अपना सिर उठा रही हैं, ऐसे में यह आयोजन भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का वादा करता है. आगामी न्यूज-9 ग्लोबल समिट का विषय है ‘लोकतंत्र, जनसांख्यिकी, विकास: भारत-जर्मनी संबंध’. यह दोनों देशों के बीच संबंधों पर केंद्रित है, जो पिछले कुछ वर्षों में लगातार मज़बूत होते गए हैं.
गौरतलब है कि पिछले साल टीवी9 नेटवर्क के एमडी और सीईओ बरुण दास ने कहा था, न्यूज-9 ग्लोबल समिट का मकसद भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करना है, और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों को एक साथ लाकर आपसी विकास के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करना है. यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते जर्मनी भारत का एक प्रमुख साझेदार है. यह समिट किसी भारतीय समाचार मीडिया संगठन द्वारा इस तरह की पहली पहल है.
‘लोकतंत्र, जनसांख्यिकी, विकास: भारत-जर्मनी संबंध’ विषय दोनों देशों के बीच 25 साल की रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है. 9 अक्टूबर 2025 को सुबह 10 बजे इस विषय पर मुख्य भाषण लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित और व्यापार, स्थिरता और नवाचार में साझा महत्वाकांक्षाओं द्वारा सुदृढ़ द्विपक्षीय यात्रा की समीक्षा करेगा.
आज बदलती विश्व व्यवस्था के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पुनर्संयोजित हो रही हैं. यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता ने नई गति पकड़ी है. ऐसे परिदृश्य में भारत और जर्मनी आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से अपने सहयोग को और गहरा करने की कगार पर हैं. भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है. इसलिए, यह संबोधन भारत-जर्मनी की कहानी में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है, जो मजबूत नीतिगत समन्वय, गहरे व्यावसायिक संबंधों और दोनों देशों द्वारा साझा किए गए लचीले वैश्विक नेतृत्व के दृष्टिकोण से परिभाषित होगा.
शिखर सम्मेलन में अन्य बातों के अलावा इस बात पर भी चर्चा होगी कि भारत और जर्मनी की रणनीतिक साझेदारी किस प्रकार काम कर रही है. औद्योगिक सहयोग और जलवायु नेतृत्व से लेकर शैक्षिक और कूटनीतिक संबंधों तक और साथ ही अगले 25 साल के लिए एक दिशा भी तय की जाएगी. आज भारत और जर्मनी के पास वैश्विक नेतृत्व में एक नया अध्याय लिखने का एक अनूठा अवसर है.

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