NHAI की स्कीम, KYC अपडेट और QR कोड स्कैन… फास्टैग यूजर्स के साथ ऐसे फ्रॉड कर रहे साइबर क्रिमिनल! – AajTak

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साइबर ठग समय के साथ ठगी के नए-नए तरीके इजाद कर रहे हैं. अब ठगों ने फास्टैग के जरिए लोगों से ठगी करने की नई तरकीब खोज निकाली है. ये शातिर अपराधी KYC के नाम पर ऑनलाइन लिंक या SMS भेजकर लोगों के वॉलेट खाली कर रहे हैं. यही नहीं QR कोड स्कैन कराकर लोगों के फोन तक हैक कर ले रहे हैं.
साइबर ठग हर बार अलग-अलग तरीके से लोगों को जाल में फंसाते हैं. कभी कैशबैक और डिस्काउंट का लालच देकर, तो कभी फ्री सामान का ऑफर दिखाकर. ये सभी फ्रॉड लिंक या फेक SMS के जरिए किए जाते हैं. जैसे ही लोगों को एक तरीका समझ आता है, तब तक ये शातिर ठग कोई नया पैंतरा ले आते हैं. पैसों को मिनटों में गायब कर देते हैं. 
इस बार नया फ्रॉड फास्टैग के नाम पर सामने आया है. 15 अगस्त से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने 3 हजार रुपए का सालाना फास्टैग पास लॉन्च किया है. इसमें सालभर या 200 ट्रिप तक टोल प्लाजा पर चार्ज देने की जरूरत नहीं है. इस नई योजना से वाहन चालकों में उत्साह बढ़ा है. लेकिन उनकी खुशी पर ठगों की नजर पड़ गई.
साइबर ठगों ने अब फास्टैग को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. ये अपराधी फास्टैग यूजर्स के वॉलेट से पैसे गायब कर रहे हैं. ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सिर्फ एक लिंक पर क्लिक करने से ही लोगों का फास्टैग वॉलेट खाली हो गया. ये ठग KYC अपडेट या फास्टैग बंद होने का डर दिखाकर लोगों को फंसाते हैं. उनके पैसे लूट लेते हैं.
साइबर ठगी के नए तरीकों से ऐसे बचे, रहें सावधान
लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि वे फास्टैग से जुड़े किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा करें. फास्टैग से जुड़े काम केवल NHAI की ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप के जरिए ही करें. OTP, पिन या पासवर्ड किसी भी हालत में अजनबी नंबर पर न बताएं. 
अनजान QR कोड को कभी स्कैन न करने की सलाह
इसके अलावा पेमेंट के लिए किसी अनजान QR कोड को स्कैन न करें, क्योंकि ऐसा करते ही फोन हैक हो सकता है और निजी जानकारी चोरी हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर फास्टैग वॉलेट का बैलेंस और हिस्ट्री चेक करना जरूरी है. यदि कुछ भी संदिग्ध लगे तो तुरंत शिकायत करें या कानूनी कार्रवाई करें.
फास्टैग रिचार्ज के बहाने दो लाख की साइबर ठगी
ठगी के मामलों की बात करें तो मुंबई के एक 47 साल के शख्स के साथ फास्टैग रिचार्ज के बहाने 2.4 लाख रुपए की साइबर ठगी हो गई. दरअसल, उसे फास्टैग रिचार्ज कराने में परेशानी आ रही थी. उसने इंटरनेट पर कस्टमर केयर का नंबर खोजा और कॉल कर दिया. लेकिन विक्टिम को नहीं पता था कि नंबर असल में साइबर ठग का है.
साइबर ठगों ने फास्टैग को बनाया नया हथियार
इसी तरह कर्नाटक में भी एक शख्स को फास्टैग रिचार्ज कराने में दिक्कत हुई. उसने भी कस्टमर केयर नंबर सर्च करके कॉल किया. कॉल रिसीव करने वाले साइबर ठगों ने चालाकी से उसके अकाउंट से एक लाख रुपए उड़ा लिए. इस तरह साइबर ठग अब फास्टैग को नया हथियार बनाकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं. 
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