Parliament Special Session 2026 Live: 'ये ऐतिहासिक पल है…', महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में बोल रहे हैं पीएम मोदी – AajTak

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Parliament Session: अखिलेश यादव ने बीजेपी पर उठाए सवाल
सपा ने किया परिसीमन बिल का विरोध
अर्जुन राममेघवाल ने लोकसभा में पेश किया परिसीमन बिल
Parliament’s Special Sitting: लोकसभा पहुंचे राहुल गांधी, संसद सत्र में लेंगे हिस्सा
Parliament’s Special Sitting: विधेयक का सिद्धांत सही, सरकारी के तरीके पर आपत्तिः मल्लिकार्जुन खड़गे
संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू बोले- परिसीमन पर दक्षिण भारत में फैलाया जा रहा है भ्रम
Parliament’s Special Sitting: संसद में पेश होने वाले तीन बिलों के प्रस्ताव क्या हैं?
संसद मे आज पेश होंगे तीन बिल
Special Parliament Session Live Updates: संसद का विशेष सत्र आज गुरुवार से शुरू हो गया. बिल पेश होते सदन में हंगामा मच गया. कांग्रेस ने बिल पेश होते ही कहा कि सरकार संविधान को हाइजैक करना चाहती है.वहीं सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा. तब इसका मतलब नहीं है. इस पर अमित शाह ने कहा- मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, अखिलेश यादव ने कहा- पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है. तीनों बिल सदन में पेश हो या नहीं, इसे लेकर वोटिंग कराई गई, जिसमें 207 वोट हां के पक्ष में हैं.
संसद के विशेष सत्र से जुड़े ताजा अपडेट्स के लिए जुड़े रहें… 
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की रणनीति से इनकी मंशा पर सवाल खड़े हुए हैं. SIR के जरिए उनकी रणनीति का भंडाफोड़ हुआ है. जब पहली गिनती में विपक्ष वोट बचाने में सफल हुआ, तो भाजपा फॉर्म 7 लेकर आई और उसे बड़े पैमाने पर बांटना शुरू किया गया. इसे भी पकड़ लिया गया, जिससे यह सामने आया कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल संदिग्ध तरीके से किया जा रहा था. चुनाव आयोग को इसकी जानकारी दी गई, तो वोट कटना रुका, लेकिन फर्जी हस्ताक्षरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस पूरे घटनाक्रम से भाजपा की मंशा पर सवाल खड़े हुए हैं.
अखिलेश यादव बोले- असल मुद्दा यह है कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है, खासकर जातीय जनगणना के कारण, क्योंकि अगर जातीय आंकड़े सामने आएंगे, तो आरक्षण की वास्तविक मांग और दबाव बढ़ेगा, जिसे भाजपा टालना चाहती है. यही वजह है कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़कर इसे लागू करने में देरी की जा रही है. इससे साफ संकेत मिलता है कि मंशा आरक्षण देने की नहीं, बल्कि उसे टालने की है.
अखिलेश यादव ने कहा-  ‘हम साफ तौर पर कहते हैं कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर सवाल भी हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया हमेशा महिलाओं को हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर हिस्सेदारी देने की बात करते थे. उनका मानना था कि अगर महिला जागरूक होती है, तो पूरा समाज जागरूक होता है. उत्तर प्रदेश में पंचायत स्तर पर महिलाओं को सबसे ज्यादा आरक्षण देने का काम समाजवादी पार्टी ने किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि भाजपा को इतनी जल्दबाजी क्यों है?’
अखिलेश यादवः भाजपा यह बताए कि 21 राज्यों में जहां उनकी सरकारें हैं, वहां कितनी महिलाएं मुख्यमंत्री हैं. दिल्ली में जो महिला नेतृत्व दिखाया जाता है, उसे भी “हाफ सीएम” कहा जाता है। सवाल यह है कि उनके पास वास्तविक अधिकार कितने हैं? देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा अपने ही ढांचे में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दे पा रही है? पूरे देश में इनके विधायक चुने गए हैं, लेकिन 10 प्रतिशत से ऊपर महिला प्रतिनिधित्व नहीं पहुंच पा रहा. लोकसभा में भी उनकी संख्या क्या है, यह भी सवालों के घेरे में है.
अखिलेश यादव ने कहा कि, उत्तर प्रदेश में पंचायत में महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा आरक्षण लागू करने का काम सपा ने किया है. हमारा सवाल है कि भाजपा को इतनी जल्दी क्यों है. सच ये है कि वे जनगणना को टालना चाहती है. जनगणना जातीय जनगणना की वजह से टालना चाहती है. क्योंकि वे आरक्षण देना नहीं चाहते हैं. 
सपा नेता अखिलेश यादव ने परिसीमन बिल पर बीजेपी और सरकार की नीयत पर आरोप लगाए. उन्होंने कहा- सपा महिला आरक्षण के पक्ष हैं. डॉ. लोहिया हमेशा जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस के पक्ष में रहे. हम भी उसी राह पर हैं. ये आरक्षण हमारे आह्वान को और मजबूत कर रहा है. अब भारतीय जनता पार्टी नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही है.  जिन्होंने नारी को अपने संगठन में नहीं रखा वे उसके मान सम्मान को कैसे रखेंगे? पिछले कई साल से ये लोग सरकार में हैं, लेकिन हम दुनिया के आंकड़े देखें तो हम जेंडर इक्वालिटी में कहां खड़े हैं. इनकी खुद की सरकार को देखें तो इनकी 21 जगह सरकार है, लेकिन कितना महिला मुख्यमंत्री हैं.
तेजस्वी सूर्या ने सदन में सभी राज्यों का आंकड़ा भी सामने रखा और बताया कि परिसीमन के बाद किसकी कितनी सीटें बढ़ेंगी. उन्होने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू नहीं किया जाएगा. सीएम एमके स्टालिन गलत जानकारी फैला रहे हैं. परिसीमन के जरिए तमिलनाडु से सांसदों की संख्या 39 से बढ़कर 59 हो सकती है. इससे तो तमिलनाडु का भी रिप्रेजेंटेशन बढ़ेगा.
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने परिसीमन को लेकर कहा कि दक्षिण भारत में लोगों में बहुत बड़ा भ्रम फैलाया जा रहा है. पिछले तीन दिनों में हमने दक्षिण भारत में विपक्ष का विरोध अराजक होता जा रहा है और विपक्ष भ्रम भी फैला रहा है. परिसीमन कोई बैकडोर प्रोसेस नहीं है, ये संविधान के निर्धारित नियमों के आधार पर ही हो रहा है. तेजस्वी सूर्या ने कहा कि अगर लोकसभा सीटों को फ्रीज रखा जाता है और महिला आरक्षण को उसी रूप में लागू किया जाता है, तो इससे वोटों के असल वैल्यू का नुकसान हो जाएगा. 
“महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था, जिसके प्रावधानों को 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा. लोकसभा की सदस्य संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे कुल सीटें बढ़कर 815 हो जाएंगी. इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो सदन की कुल संख्या का एक-तिहाई है. किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा और उनकी मौजूदा ताकत बरकरार रहेगी.”
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने परिसीमन बिल पर बोलना शुरू किया है. उन्होंने कहा- कानून मंत्री कि बात से ऐसा लग रहा था कि, पहली बार सदन में महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही है. अपने भाषण में उन्होंने ऐसा ढांचा बनाने की कोशिश की. आज से ही 3 साल पहले गृह मंत्री ने ऐसी ही बातें की थीं. अगर दोनों की बातें सुनेंगे तो 90 प्रतिशत वही बातें हैं, जो आज कानून मंत्री ने कहीं. उस समय भी ऐसी ही बातें थीं. तब भी हमने यही कहा था कि हमारी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे सरल कीजिए, ताकि जब पारित हो तभी लागू हो जाए. इसे परिसीमन के साथ न जोड़ें.
लोकसभा में तीनों बिलों पर चर्चा शुरू हुई है. वोटिंग में पक्ष में 251 वोट पड़ने के बाद ये चर्चा शुरू हुई है. अब भाजपा की तरफ से अुर्जन राम मेघवाल ने चर्चा की शुरुआत की. उन्होंने कहा- हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान को यह शक्ति दी है कि संशोधन करके लोकहित के फैसले ले सकते हैं. ये तीनों बिल, महिलाओं के लिए हैं. 
लोकसभा में पेश किए गए तीनों बिलों पर 17 अप्रैल को शाम 4 बजे वोटिंग होगी. आज और कल इस पर चर्चा होगी. सदन में चर्चा के लिए घंटों को तय करने की बात हुई.संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार यहां सुनने और जवाब देने के लिए है. सरकार ने 12 घंटे चर्चा का समय तय किया है.
बिलों को पुर्नस्थापित करने के लिए ध्वनि मत से पास कराया जा रहा था. इस दौरान विपक्ष की मांग पर मत विभाजन किया गया. इसके लिए वोटिंग कराई गई. वोटिंग का फाइनल रिजल्ट आया है इसमें पक्ष में 251, विपक्ष में 185 वोट पड़े.
सदन में बिलों को पेश करने के लिए करने के लिए ध्वनि मत से पास कराने की कोशिश की गई. इसके बाद विपक्ष ने मत विभाजन मांगा. इसके बाद स्पीकर ने इसके लिए वोटिंग की अनुमति दी. पक्ष में 207, विपक्ष में 126 वोट पड़े हैं.
डीएमके सांसद टीआर बालू ने सदन में पेश तीनों बिलों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये तीनों बिल ही सैंडविच बिल हैं, हम विरोध करते हैं. क्योंकि ये आपस में इंटरलिंक हैं. हमारी पार्टी इसका विरोध करती है. हमने काले झंडे दिखाए. इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आप चाहे पीले झंडे दिखाओ या काले दिखाओ. इससे सदन को कोई फर्क नहीं पड़ता.
अमित शाह ने कहा कि, मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता. अखिलेश यादव बोले कि आपने अनडेमोक्रेटिक बात कही है. धर्म की बात कही होगी. पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है.
सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं करा रहे. आप धोखा देकर ये बिल लाना चाहते हैं. इस पर अमित शाह ने कहा- अध्यक्ष जी सदन की कार्रवाई को पूरा देश देख रहा हैय कुछ बयान ऐसे किए गए जो जनता में चिंता पैदा कर रहे हैं. अखिलेश पूछ रहे हैं जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं देश को बताना चाहता हूं जनगणना जारी है. उन्होंने कहा कि हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार इसका भी निर्णय ले चुकी है। और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है.
लोकसभा में परिसीन बिल पेश होते ही हंगामा शुरू हो गया है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के संविधान में हम संसद को पावर इस बात की दी गई है कि संविधान की रक्षा करें, सुरक्षा करें, लेकिन सभापति जी आज ऐसे बिल आए हैं कि जो हमारे संविधान को ही तोड़-मरोड़ रहे हैं और इसका हम समाजवादी पार्टी के लोग पुरजोर विरोध करते हैं.  सभापति जी जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से पृथक किया जा रहा है. ये मैं समझता हूं कि ये संविधान की भावनाओं के पूरी तरह से विरोध में हैं. समाजवादियों से बड़ा महिलाओं का हितैषी इस देश की कोई पार्टी नहीं है. आज भी आपसे ज्यादा सदस्य हमारे पास हैं. इसलिए सभापति जी आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस बिल को संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल को केंद्र आज संशोधन बिल को वापस लिया जाए.
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश कर दिया है. बिल के लोकसभा में पेश करते ही कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल का विरोध किया तो सदन में हंगामा शुरू हो गया.
लोकसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू हो गई है. इस मौके पर सबसे पहले आशा भोसले के निधन पर शोक जताया.
टीडीपी सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि सदन में सरकार की तरफ़ से कहा जायेगा कि परिसीमन बिल से सभी राज्यो में लोकसभा और विधानसभा में 50 प्रतिशत सीट बढ़ाई जायेंगी.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद पहुंच गए हैं, यहां वे महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन पर केंद्रित विशेष सत्र में हिस्सा लेंगे. 
 
#WATCH | Delhi | LoP Lok Sabha, Rahul Gandhi, arrives in Parliament, to attend the special session of Parliament with a focus on reservation for women and delimitation pic.twitter.com/jePOAZWpH8
 
 
पीएम मोदी ने X पर लिखा- ‘आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है. हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं.’
आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।

व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्।

ता त्वामुषर्वसूयवो… pic.twitter.com/8KWT1WLSje
 
मल्लिकार्जुन खड़गे बोले- वे विधेयक के सिद्धांत के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताई. खड़गे ने आरोप लगाया कि ये प्रक्रिया राजनीति से प्रेरित है और विपक्ष को दबाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दोहराया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके प्रस्तुतिकरण और लागू करने के तरीके पर सवाल उठा रहा है. खड़गे ने कहा कि हम संसद में एकजुट होकर लड़ेंगे. हमने तय किया है कि इस विधेयक और इसके संशोधनों के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाएंगे.
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्ष की अहम बैठक हुई. इसमें करीब 20 दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक के बाद विपक्ष ने एकजुट रुख दिखाते हुए सरकार के तरीके पर गंभीर आपत्तियां जताईं. इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, UBT के संजय राउत, AAP के संजय सिंह, DMK के टी.आर. बालू, CPI की एनी राजा, IUML के ई.टी. मोहम्मद बशीर, के.सी. वेणुगोपाल और कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे.
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी सहयोगियों के साथ पहुंचे. इसके अलावा टीएमसी सांसद सागरिका घोष, एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले, निलोत्पल बसु और एन.के. प्रेमचंद्रन भी चर्चा में शामिल हुए. कुछ नेता वर्चुअली भी जुड़े. इनमें उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन और दीपांकर भट्टाचार्य शामिल रहे. बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष का साझा रुख स्पष्ट किया.
दक्षिण भारत के कई राज्यों को डर है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा होने से उनकी राष्ट्रीय स्तर पर ताकत कम हो सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि सभी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी, जिससे संतुलन बना रहेगा. फिर भी, क्षेत्रीय दल इसे अपने प्रभाव में संभावित कमी के रूप में देख रहे हैं. कुल मिलाकर, ये सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने वाला कदम है. असल में, ये कहानी 2023 से शुरू होती है, जब संसद ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पारित किया था.
Sansadइस कानून में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान तो था, लेकिन इसे लागू करने के लिए पहले नई जनगणना और परिसीमन जरूरी बताया गया था. इसी कारण कई लोगों को लगा कि इस बदलाव को जमीन पर उतरने में काफी समय लग सकता है. लेकिन हर कहानी में एक दूसरा पक्ष भी होता है. जैसे ही ये विधेयक सामने आए, विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना है कि यह कदम पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले महिलाओं को आकर्षित करने की कोशिश है और इसे उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति बताया. अब सबकी नजरें उस विशेष संसद सत्र पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि ये प्रस्ताव कानून बनते हैं या नहीं.

 
संसद में पेश होने वाले परिसीमन विधेयक के विरोध में तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने काला झंडा लहराया है. उन्होंने बिल की प्रतियां भी जलाईं और कहा कि “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो. पहले भी जब तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग भड़की थी, तो उसकी तपिश दिल्ली तक पहुंची थी। वह आग तब ही शांत हुई, जब दिल्ली को झुकना पड़ा.  

 
#Delimitation: Let the flames of resistance spread across Tamil Nadu!
Let the arrogance of the fascist BJP be brought down!

🔥 Then, the fire of resistance against #HindiImposition that rose from Tamil Nadu scorched Delhi. It quietened only after Delhi was forced to yield.

🔥… pic.twitter.com/9zSaH9PBvL
 
महिला आरक्षण विधेयक सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि यह बीजेपी और उसके सहयोगियों के ताज़ा छल का एक “काला दस्तावेज़” है, जो दरअसल “चालाक लोगों की एक गुप्त योजना” है. इसके भीतर पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं को स्थायी रूप से कमजोर करने की साजिश छिपी हुई है. उन्हें वास्तविक जनप्रतिनिधित्व से वंचित करने के लिए एक चक्रव्यूह रचा जा रहा है. यह विधेयक वर्चस्ववादी सोच रखने वालों की हार की हताशा और महिलाओं के प्रति उनके शोषणकारी-दमनकारी सामंती मानसिकता से जन्मा है. महिला आरक्षण विधेयक असल में एक “जनविरोधी दिखावा” भर है.
महिला आरक्षण बिल भाजपा और उनके संगी-साथियों के नये धोखे का एक ऐसा ‘काला दस्तावेज़’ है, जो दरअसल ‘ख़ुफ़िया लोगों की गुप्त योजना’ है। जिसमें पिछड़े-दलित समाज की महिलाओं को हमेशा के लिए कमज़ोर करने की साज़िश है। उन्हें सच्चे जन प्रतिनिधित्व से वंचित रखने का चक्रव्यूह रचा जा रहा है।… pic.twitter.com/O5p20zt7db
 
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुख्य मुद्दा आज महिलाओ को आरक्षण देना है. 33% रिजर्वेशन देने के बाद इतिहास हो जायेगा. बाकि मुद्दा उठा कर के महिला आरक्षण को हानि पहुंचा रहे हैं. Delimitation को लेकर दक्षिण भारत में भ्रम फ़ैलाने का कोशिश  की जा रही है. ऐसा नहीं करना चाहिए. डीएमके कार्यकर्ता आज सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री M. K. Stalin के निर्देश पर पूरे राज्य के जिलों में विरोध प्रदर्शन करेंगे. तमिलनाडु में नारे लग रहे हैं. “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो.
 
तीनों विधेयक पास होते हैं तो 2029 के आम चुनाव से ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है. ये प्रस्ताव 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान था.
सबसे बड़ा प्रस्ताव- लोकसभा की सीटों को बढ़ाना. अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि इन्हें बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाए, ताकि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व बेहतर हो सके.
दूसरा अहम प्रस्ताव- सरकार ने सुझाव दिया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके.
हालांकि उस कानून को लागू करने की शर्त ये थी कि पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन हो. उस समय चिंता जताई गई थी कि ये आरक्षण लागू होने में काफी समय (शायद एक दशक या उससे ज्यादा) लग सकता है. अब नए विधेयकों के जरिए सरकार उस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है, ताकि 2029 के आम चुनाव तक महिलाओं को आरक्षण मिल सके.
डीएमके कार्यकर्ता आज सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री M. K. Stalin के निर्देश पर पूरे राज्य के जिलों में विरोध प्रदर्शन करेंगे. तमिलनाडु में नारे लग रहे हैं. “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो. पहले भी जब तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग भड़की थी, तो उसकी तपिश दिल्ली तक पहुंची थी। वह आग तब ही शांत हुई, जब दिल्ली को झुकना पड़ा. 
सीएम एमके स्टालिन ने कहा- आज मैंने एक बार फिर उस ‘काले कानून’ की प्रति जलाकर नई आग जलाई है, जो तमिलों को उनकी ही जमीन पर शरणार्थी बना देता है.यह आग अब पूरे द्रविड़ भूभाग में फैलेगी और बीजेपी के अहंकार को खत्म करेगी.उन्होंने कहा ‘तमिल हमारी मां है तमिल हमारी आत्मा की धधकती हुई चेतना है!’
 
यह भी पढ़ेंः तमिलनाडु में परिसीमन पर आर-पार की जंग, स्टालिन ने जलाई विधेयक की कॉपी, लहराया काला झंडा
1. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तय करना है.
2. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 जनसंख्या की नई परिभाषा, बढ़ती आबादी के मद्देनजर संसद में सदस्यों की संख्या को बढ़ाना इसका मकसद.
3. परिसीमन विधेयक 2026 लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है. सीटों का फिर से निर्धारण होगा.
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