Passport News : दोहरी जन्मतिथि वाले पेंच ने रोकी विदेश की राह, इस वजह से अटके पड़े हजारों पासपोर्ट – Live Hindustan

गाजियाबाद क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस में हजारों लोगों के पासपोर्ट दोहरी जन्मतिथि के कारण अटक गए हैं। पासपोर्ट ऑफिस में पेंडिंग मामलों की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि बड़ी संख्या में आवेदकों ने पहले एक जन्मतिथि के आधार पर पासपोर्ट बनवाया, लेकिन बाद में शैक्षिक प्रमाणपत्र, आधार या अन्य दस्तावेजों में जन्मतिथि बदलवा ली। अब यही अंतर पासपोर्ट वेरिफिकेशन और रिन्यूअल में बड़ी बाधा बन गया है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में पेंडिंग मामलों में सबसे अधिक आवेदन जन्मतिथि में संशोधन से जुड़े किए गए हैं। नियमों के अनुसार, पासपोर्ट में जन्मतिथि बदलना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें आवेदक को मजिस्ट्रेट का आदेश या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध प्रमाण प्रस्तुत करना होता है।
केवल आधार या अन्य दस्तावेज बदलने से पासपोर्ट में संशोधन स्वतः मान्य नहीं होता। इस स्थिति में कई लोग नौकरी, विदेश यात्रा और वीजा प्रक्रिया में भी परेशान हो रहे हैं। पासपोर्ट ऑफिस का कहना है कि ऐसे मामलों में दस्तावेजों की गहन जांच की जाती है और नियमों के अनुरूप ही निर्णय लिया जाता है। गलत या अपूर्ण दस्तावेज होने पर आवेदन पेंडिंग या निरस्त कर दिए जाते हैं।
पहली बार में पासपोर्ट जिस जन्म तिथि के आधार पर जारी किया जाता है, बाद में पासपोर्ट का रिन्यूअल भी उसी जन्मतिथि पर होता है। पहली बार में जन्म तिथि बताने के लिए जो दस्तावेज जमा किए जाते हैं उन्हीं को असली माना जाता है। इतनी ही नहीं रिन्यूअल के दौरान भी आवेदक को पुरानी जन्मतिथि का कोई दस्तावेज उपलब्ध कराना होता है अन्य पासपोर्ट जारी नहीं हो पाता। इसीलिए अब आवेदक भटक रहे हैं।
दरअसल जिन आवेदकों ने दसवी पास करने से पहले अपना पासपोर्ट बनाया है उन्होंने उसके लिए जन्म प्रमाण पत्र जन्मतिथि के रूप में लगाया है। बाद में लोगों ने अपनी सुविधानुसार दस्तावेजों में अपनी जन्मतिथि बदल ली। उसके बाद सभी दस्तावेज भी नई जन्मतिथि के अनुसार बनवा लिए। अब पासपोर्ट आवेदन करने के बाद उनकी यह चालाकी सामने आ गई। जिन कारण अब ऐसे आवेदकों के पासपोर्ट अटक गए।
गाजियाबाद क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस में यूपी के 13 जिलों के लोगों के पासपोर्ट जारी किए जाते हैं। आगरा, अलीगढ़, बागपत, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हाथरस, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड, सहारनपुर, शामली, शामिल हैं। जन्मतिथि बदलने से आवेदक ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं।
राहुल शर्मा, निवासी मेरठ, ”मैंने 2015 में पासपोर्ट बनवाया था, तब जन्म तिथि स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार थी। बाद में आधार और अन्य दस्तावेजों में सुधार कराया तो आवेदन अटक गया।”
शबाना परवीन, निवासी लोनी, ”मेरा पहला पासपोर्ट दसवी कक्षा पास करने से पहले का बना हुआ है। उसमें जन्म तिथि अलग है। अब पासपोर्ट अटक गया है। कई बार पासपोर्ट ऑफिस के चक्कर लगा चुकी हूं।”
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