Protest against EC LIVE: एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सवालों के घेरे में आ गए हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनके दो जूनियर चुनाव आयुक्त उनकी बात पर सहमत नहीं थे और इसलिए 10 महीने में 14 बार आपत्ति जताई। इस रिपोर्ट के बाहर आने के बाद सीजेपी और विपक्ष दोनों ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आक्रामक हो गए। कांग्रेस ने देशभर में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। नई दिल्ली में चुनाव आयोग की बिल्डिंग के सामने विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
वही भारतीय युवा कांग्रेस ने भी 5. रायसीना रोड से जंतर मंतर तक मार्च का ऐलान किया है। वहीं सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को 78 घंटे के अंदर इस्तीफा देने का अल्टिमेटम दे दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते तो फिर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होगा।
12: 08 PM- कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर कल तक यानी शनिवार तक सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देता हैं तो फिर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प करना है।
12:00 PM- एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठे सवालों पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवा ने कहा कि सरकार में होते हुए मैं किसी का बचाव नहीं करना चाहता। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और अगर उसपर सवाल उठे हैं तो चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त की कि वह अपना पक्ष रखें। मैं इसको लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हूं कि विपक्ष क्या कह रहा है। विपक्ष का काम है विरोध करना और आरोप लगाना। उन्हें अपनी राजनीति करने दीजिए। सीईसी को विपक्ष को संतुष्ट करने के लिए कुछ नहीं करना चाहिए केवल लोगों को भरोसे में लेना चाहिए। यह लोकतंत्र की सुंदरता है।
11: 46 AM– मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने खड़े होकर नारेबाजी शुरू कर दी और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट, इरफान हफीज लोन और इफ्तिखार अहमद ने पोस्टर लहराए, जिन पर लिखा था, “वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ।”
11: 40 AM- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को अपना विरोध और तेज कर दिया है। पार्टी ने दिल्ली में पोस्टर लगाकर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के ओबीसी विभाग की ओर से शुक्रवार को लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था, “ज्ञानेश कुमार हटाओ, चुनाव आयोग बचाओ।”
11: 20 AM- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद के अनुरूप निष्पक्षता से काम नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर संचालित की गई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर उठे सवालों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
11: 00 AM- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पार्ट 2 के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के गोवा के डिलीट किए गए वोटरों की अपील पर कार्रवाई करने के निर्देश के बाद भी चुनाव आयोग के स्तर पर यह अटक गया और उन नामों को दोबारा शामिल नहीं किया गया। बीते दिनों एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में अगर अपीलेट ट्राइब्यूनल इसी गति से काम करता रहा तो अगले 12 साल में भी सभी मामलों का निपटारा नहीं हो पाएगा।
10: 40 AM- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीती देर रात कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनावी पराजय के बाद कांग्रेस अपनी नीतियों, नेतृत्व और कार्यशैली पर आत्ममंथन करने के बजाय जनादेश पर सवाल उठा रही है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कांग्रेस जब चुनाव जीतती है तो उसे चुनावी व्यवस्था और ईवीएम सही नजर आती है, लेकिन हारने पर कभी ईवीएम, कभी एसआईआर और अब चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए जाते हैं।”
10: 30 AM- अभिजीत दीपके ने यहां तक आरोप लगाया कि बीजेपी के भी कई नेता ज्ञानेश कुमार की व जह से हार गए। सीजेपी ने तीन मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि एसआईआर की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांत की जाए। दूसरी मांग है कि पहले वाली मतदाता सूची बहाल की जाए। इसते अलावा तीसरी मांग है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार किया जाए।
10: 20 AM- सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने विपक्ष से पूछा है कि जब चुनावों में धांधली होती है तो वे चुनाव लड़ते क्यों हैं। अभिजीत दीपके ने दावा किया कि ममता बनर्जी, स्टालिन और पिनारायी विजयन समेत विपक्ष के नेताओं की सीटों पर बड़ी संख्या में वोट काटे गए।
10: 15 AM- कांग्रेस महासचिव महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और प्रधानमंत्री मोदी की तुलना करते हुए कहा, ”एक प्रधानमंत्री ने जेन-जी को वोट का अधिकार दिया, दूसरे ने उसे छीनने की कोशिश की।” उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने दिसंबर, 1988 में संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी। उनके मुताबिक, यह ऐसा कदम था जिसने युवाओं को सशक्त किया। संविधान (61वां संशोधन) अधिनियम, 1988 के तहत अनुच्छेद 326 में 21 वर्ष की जगह 18 वर्ष की आयु का प्रावधान किया गया था।
विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का ‘C सर्टिफिकेट’ भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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