Purnia News: पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले की पुलिसिंग की तस्वीर जल्द बदलेगी। एसएसपी डॉ शौर्य सुमन ने अपने कार्यालय में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बदला स्वरूप जिले में स्थापित टीओपी एवं ओपी में जल्द नजर आएगा। शहरी क्षेत्र के सात टीओपी की जगह अब पुलिस का चेकिंग प्वाइंट स्थापित होगा। उसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में भी कुछ ओपी पुलिस चेकिंग प्वाइंट का स्वरूप लेगा। वहीं जीएमसीएच में पुलिस ओपी का फिर से गठन होगा। शहरी क्षेत्र में चेकिंग प्वाइंट का स्वरूप लेने वाले टीओपी में फणीश्वरनाथ रेणु, कटिहार मोड़, बियाडा, सिटी, भट्ठा, सुदीन चौक व भट्ठा बाजार टीओपी शामिल है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में डंगराहा एवं रूपेश्वरी ओपी का स्वरूप बदलकर यहां महज चेकिंग प्वाइंट रह जाएगा। मसलन अब इन जगहों पर संबंधित थाना का सीधा नियंत्रण होगा और संबंधित क्षेत्र में घटना की जबावदेही संबंधित थाना की होगी। शेष बचे ओपी व टीओपी की विभागीय स्तर से अधिसूचना जारी करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। विभागीय स्तर से अधिसूचना जारी होने के बाद टीओपी व ओपी के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि होगी। इसके अलावा यहां सीसीटीवी एवं मैन पावर बढ़ाए जाएंगे। गुलाबबाग टीओपी का कार्य क्षेत्र कटिहार मोड़ टीओपी के कार्य क्षेत्र तक विस्तारित होगा.
— शहर में ट्रैफिक पुलिसिंग से लेकर गश्ती में सुधार होगा। थाना स्तर से गश्ती के अलावा विशेष गश्ती दल की व्यवस्था लागू होगी। विशेष गश्ती दल से जोन में बांटकर शहर की निगरानी होगी। अब डायल 112 सेवा से गश्ती करवाने पर रोक लगेगी। ट्रैफिक पुलिस में जवानों की संख्या बढ़ा कर 110 की जाएगी। जिससे ट्रैफिक कंट्रोल के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जा सके। एसएसपी ने बताया कि जिले को पर्याप्त बल मिल गया है। जिसका समुचित यूटिलाइजेशन होगा। हर बड़े थानों में 20- 20 अतिरिक्त बल तैनात किए जाएंगे.
— पत्रकारों से वार्ता के दौरान जिले में पुलिसिंग खासकर थानों की मौजूदा स्थिति से एसएसपी असंतुष्ट दिखे। खासकर डगरूआ थाना क्षेत्र से एक बच्चे की लाश बरामदगी की घटना के एक महीने बीत जाने के बाद भी शून्य उपलब्धि पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यहां केस निष्पादन के फर्जी आंकड़े दिखाने (पॉकेट डिस्पोजल) की कायम प्रवृत्ति को समाप्त करने की पुलिस पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है। साथ ही कहा कि चोरी एवं लूट के हर मामले में अब हर थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करना होगा। इससे केस की संख्या भले बढ़ेगी, परन्तु केस अनुसंधान के कारण अपराध नियंत्रण में तेजी आएगी.
— अब आपराधिक घटनाओं के लिए हर थाने के हर पुलिस पदाधिकारियों की जबावदेही तय होगी। आर्म्स एक्ट के दर्ज मामलों के अनुपात में सजा के कम आंकड़े पर एसएसपी असंतुष्ट दिखे। उन्होंने बताया कि आर्म्स एक्ट में महज दस प्रतिशत मामलों में सजा हो रही है। आर्म्स एक्ट एवं नारकोटिक्स के मामले में स्पीडी ट्रायल की व्यवस्था करने के लिए प्रयास चल रहा है। थाना में बेवजह लोगों की आवाजाही पर रोक के लिए आगंतुक पंजी एवं सीसीटीवी फुटेज के मिलान के लिए उन्होंने तत्काल सदर वन एसडीपीओ को निर्देश दिया।
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