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सफीपुर (Safipur) उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा और नगर पंचायत है. यह उन्नाव शहर से करीब 27 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है और सफीपुर तहसील का मुख्यालय भी है. सड़क मार्ग से आसपास के कई कस्बों और शहरों से अच्छी तरह जुड़ा होने के कारण सफीपुर क्षेत्रीय स्तर पर प्रशासन, व्यापार और शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.
सफीपुर का इतिहास कई सदियों पुराना है. बताया जाता है कि 14वीं शताब्दी में एक ब्राह्मण साईं सुकुल ने इस नगर की स्थापना की थी. उनके नाम पर पहले इसका नाम साईपुर रखा गया. वर्ष 1389 के आसपास जौनपुर सल्तनत के इब्राहिम शर्की ने इस क्षेत्र पर विजय प्राप्त की. इसके बाद यहां कई प्रभावशाली परिवारों और अधिकारियों का प्रभाव बढ़ा.
16वीं शताब्दी में यहां प्रसिद्ध मुस्लिम संत मखदूम शाह सफी रहते थे. उनके निधन के बाद उनकी याद में साईपुर का नाम बदलकर सफीपुर कर दिया गया. उनकी दरगाह आज भी नगर की प्रमुख धार्मिक पहचान है. इस दरगाह परिसर में समय के साथ मकबरा और मस्जिद का निर्माण कराया गया. सफीपुर में मखदूम सैयद बका उल्लाह शाह, इफ्हामुल्लाह शाह, कुदरतुल्लाह शाह, हाफिजुल्लाह शाह और अब्दुल्लाह शाह जैसी अन्य धार्मिक हस्तियों से जुड़ी दरगाहें भी मौजूद हैं.
मुगल काल में सफीपुर का महत्व काफी बढ़ा. इसका उल्लेख प्रसिद्ध ग्रंथ ‘आइन-ए-अकबरी’ में एक परगना मुख्यालय के रूप में मिलता है. अवध के नवाबों के दौर में भी यहां के कई लोगों ने प्रशासनिक पदों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. दीवान उमेद राय ने यहां बाजार और सराय बनवाई, जबकि मौलवी फजल अजीम ने कुएं, मस्जिदें और इमामबाड़ा बनवाने में योगदान दिया.
20वीं सदी की शुरुआत में सफीपुर को एक विकसित और व्यवस्थित कस्बे के रूप में जाना जाता था. यहां बाजार, तहसील मुख्यालय, पुलिस स्टेशन, अदालत, डिस्पेंसरी और स्कूल जैसी सुविधाएं मौजूद थीं. आज भी सफीपुर उन्नाव जिले के प्रमुख कस्बों में गिना जाता है.
यहां स्टील के बक्से और अलमारियां, फर्नीचर तथा अगरबत्ती जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इतिहास, धार्मिक आस्था, स्थानीय कारोबार और प्रशासनिक महत्व के कारण सफीपुर आज भी उन्नाव जिले की एक खास पहचान बनाए हुए है.
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