Sahibganj News: साहिबगंज। पाकुड़ जिला स्वास्थ विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने रविवार को सदर अस्पताल का भ्रमण व निरीक्षण किया। टीम में डॉ. मनोज कुमार, मिथुन कुमार दुबे, पूनम मुर्मू शामिल थे।
टीम ने अस्पताल के ऊपरी मंजिल स्थित एसएनसीयू वार्ड का जायजा लेते हुए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। यहां प्रसव ओटी, मरीजों के लिए बनाए गए पेइंग वार्ड आदि का जायजा लिया। टीम एसएनसीयू वार्ड, ऑपरेशन थियेटर व पेइंग वार्ड में चल रहे कार्यों से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने यहां उपलब्ध सुविधा, मरीजों का समुचित देखभाल से लेकर डॉक्टर व स्वास्थ कर्मी के कार्य करने के तौर तरीके से प्रभावित होकर सीएस डॉ. रामदेव पासवान व डीएस डॉ. दिवेश कुमार की कार्यों की सराहना की है।
टीम ने बताया कि सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में निजी क्लिनिक की तरह सभी सुविधा उपलब्ध है। जबकि यहां ओटी में भी बेहतर ढंग से जटिल से जटिल ऑपरेशन का कार्य चल रहा है। सीएस के मार्गदर्शन पर यहां काफी कुछ सुधार हुआ है। टीम ने कहा कि यहां के सुविधा से वे काफी संतुष्ट है। उन्होंने डीएस से बातचीत करते हुए कहा कि पाकुड़ में भी इसी तर्ज पर एसएनसीयू वार्ड से लेकर ओटी बनाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने डीएस से सहयोग की अपील की। वही डीएस ने कहा कि सीएस के प्रयास से यहां काफी कुछ बदलाव हुआ है। पहले से बेहतर सुविधा बहाल हुई है। पाकुड़ टीम को जो भी सहयोग की जरूरत है इसके लिए सदर अस्पताल प्रशासन तैयार है.
फोटो: 106, सदर अस्पताल पहुंची पाकुड़ की टीम के सदस्य।
सरकारी स्कूलों में अब शिक्षक रखेंगे आवारा कुत्तों पर नजर
साहिबगंज। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अब एक नया काम करनी होगी। अब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को स्कूल परिसर में घुसने वाले आवारा कुत्तों की भी निगरानी करनी होगी। अब शिक्षक बच्चों को पढ़ाएं, उनका भविष्य संवारें या अन्य काम करें। यह प्रमुख सवाल व समस्या इस नये आदेश के बाद उठ खड़ी हुई है। इसे लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने राज्य के सभी जिलों को विद्यालय परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश और ठहराव पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विद्यालय स्तर पर नोडल पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। उनका नाम और विवरण स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शित करना होगा। शिक्षा परियोजना परिषद ने राज्य के सभी जिलों को विद्यालय परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश और ठहराव पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विद्यालय स्तर पर नोडल पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। उनका नाम और विवरण स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शित करना होगा। परिसर में आवारा कुत्ता दिखने पर संबंधित स्थानीय निकाय या नगर निकाय को सूचना देकर उसे हटाने की कार्रवाई करानी होगी। हर तीन महीने में निरीक्षण भी किया जाएगा.
शैक्षणिक कार्य से ज्यादा अब मिली निगरानी की जिम्मेदारी शिक्षकों को पहले से चुनाव, जनगणना, सरकारी सर्वे, आधार-राशन सत्यापन और आनलाइन आंकड़ों की फीडिंग जैसे कार्यों में लगाए जाते हैं। अब उन्हें यह भी देखना होगा कि स्कूल परिसर में आवारा कुत्ते कहां से आ रहे हैं, कहां ठहर रहे हैं और उन्हें हटाने के लिए संबंधित निकाय को सूचना दी गई या नहीं। बच्चों की सुरक्षा निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से पढ़ाई का कितना समय प्रभावित होगा। निर्देश जारी होने के बाद शिक्षकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि नोडल पदाधिकारी बनाया किसे जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि पत्र में इसकी भूमिका और जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है। पहले से ही शिक्षकों पर कई गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ है। ऐसे में विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि नोडल पदाधिकारी कौन होंगे, उनकी जिम्मेदारी क्या होगी और इसके लिए अलग मानव संसाधन की व्यवस्था होगी या फिर इसका बोझ भी शिक्षकों पर ही डाला जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बनी व्यवस्था विद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश और निवास की रोकथाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं। जिसमें विद्यार्थियों और विद्यालय कर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने को कहा गया है। इसी आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से संबंधित बिंदुओं पर अनुपालन प्रतिवेदन सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना है। इसी क्रम में राज्य मुख्यालय ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और अन्य संबंधित विद्यालयों से निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट मांगी है। स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों का प्रवेश रोकने के लिए चाहरदीवारी, गेट और अन्य सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने का भी निर्देश दिया गया है। स्कूलों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन भी सुनिश्चित करना होगा, क्योंकि खुले में पड़ा कचरा आवारा पशु बिखेर देंगे। विद्यार्थियों और शिक्षकों को आवारा पशुओं के आसपास सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरुक किया जाएगा.
राज्य शिक्षा परियोजना से मिले निर्देशों का पालन सभी स्कूलों को करना है और इसके लिए स्कूल के एक शिक्षक को नोडल पदाधिकारी बना कर उसकी सूचना मसलन, नोडल पदाधिकारी का नाम आदि स्कूल दीवार पर अंकित करना है।
नयन कुमार, डीईओ, साहिबगंज
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