Sai Pallavi Hindi: ‘सीता जी’ को हिंदी नहीं आती! रामायण एक्ट्रेस साई पल्लवी क्यों हुई… – TV9 Bharatvarsh

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फिल्म कलाकारों से हम पर्दे पर अभिनय और मनोरंजन के अलावा और क्या-क्या अपेक्षाएं रखते हैं, इसका एक ताजा उदाहरण अभिनेत्री साई पल्लवी से जुड़ा भाषा विवाद है. दरअसल साई पल्लवी का टूटी-फूटी हिंदी बोलना ना तो उनके प्रशंसकों को पसंद आया और ना ही उन्हें सीता जी के रूप में देखने के लिए बेताब दर्शकों को रास आया. गौरतलब है कि कोई भी फिल्म कलाकार सबसे पहले अपनी कला और अभिनय के लिए जाने जाते हैं लेकिन अक्सर हम उन्हें सांस्कृतिक प्रतिनिधि, सोशल वर्कर या कथित तौर पर क्रांतिकारी भी मान लेते हैं. कुछ ऐसा हुआ रामायण एक्ट्रेस साई पल्लवी के साथ. सीता का रोल करने की वजह से कुछ लोगों ने उन्हें शुद्ध हिंदी की वक्ता भी मान लिया.
ये जरूरत से ज्यादा अपेक्षा है. कभी-कभार हम कलाकारों से जन प्रतिनिधि से भी ज्यादा उनके सामाजिक और सांस्कृतिक होने की उम्मीद करते हैं. फलां फिल्म कलाकार ने फलां मौके पर कोई बयान नहीं दिए तो फलां एक्टर ने आगे बढ़ कर फलां मु्द्दे पर पहल नहीं की आदि आदि… अक्सर कई फिल्म कलाकार इन आरोपों से घिरे रहते हैं. अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान भी इन आरोपों से नहीं बच सके हैं. हम भूल जाते हैं कि ये कलाकार केवल किरदारों को निभाते हैं, उन्हें निजी जिंदगी में नहीं उतारते. कोई जरूरी नहीं कि वे किसी किरदार के आदर्शों को भी अपनाते हों.
दरअसल अपनी आगामी फिल्म ‘एक दिन’ के प्रमोशन के मौके पर मीडिया से बातचीत के बाद रामायण अभिनेत्री साई पल्लवी सोशल मीडिया पर अचानक ही अपने प्रशंसकों के निशाने पर आ गईं. ‘एक दिन’ फिल्म का निर्माण आमिर खान, मंसूर खान और अपर्णा पुरोहित द्वारा किया गया है. इसके निर्देशक सुनील पांडे हैं. और साई पल्लवी के साथ बतौर अभिनेता आमिर के बेटे जुनैद खान हैं. यह थाई फिल्म का रीमेक है.
साई की आने वाली फिल्म ‘एक दिन’ का प्रमोशन मुंबई में रखा गया था. पत्रकारों से बातचीत करने के लिए अभिनेत्री भी वहां मौजूद थीं. सवाल हिंदी को लेकर अपने आप ही उठ गया. प्रमोशन के दौरान ‘एक दिन’ फिल्म पर बातचीत तो हुई ही, रामायण में सीता जी की भूमिका निभाने के चलते कमजोर हिंदी बोलने पर वह निशाने पर आ गईं. हालांकि साई पल्लवी ने उस दौरान साफ-साफ बताया कि उनकी हिंदी अच्छी नहीं हैं. वह हिंदी सीख रही हैं. यह उनकी पहली हिंदी फिल्म है. इस दौरान उन्होंने हिंदी-अंग्रेजी में मिला जुला कुछ वाक्य कहा भी.
लेकिन ट्रोलर को साई का यह कबूलनामा या साफगोई पसंद नहीं आई. और सोशल मीडिया पर तीर-कमान निकाल कर प्रहार करने लगे. कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि वह साई पल्लवी जो ठीक से हिंदी नहीं बोल सकतीं, अब वह रामायण में सीता माता के किरदार में कैसी दिखेंगी. चार हजार करोड़ के भारी भरकम बजट वाली फिल्म का आखिर क्या भविष्य होगा. क्या नितेश तिवारी ने साई पल्लवी को कास्ट करते समय यह नहीं सोचा?
‘एक दिन’ में जुनैद खान और साई पल्लवी
आपको बताएं कि साई पल्लवी रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म रामायण में सीता माता बनी हैं. इसका पहला पार्ट इसी साल दिवाली के मौके पर पूरी भव्यता के साथ रिलीज होने जा रहा है. रामायण फिल्म का एक टीजर आया हाल ही में आया था, जिसमें रणबीर कपूर के श्रीराम वाले लुक की भरपूर सराहना मिली है. पहले रणबीर कपूर को भी राम की भूमिका लेकर ट्रोल का सामना करना पड़ा था. लेकिन रामनवमी के मौके पर आए टीजर में रणबीर कपूर को देखने के बाद ट्रोल आर्मी शांत हो गई. अब साई पल्लवी निशाने पर हैं. रामायण का निर्देशन चूंकि नितेश तिवारी कर रहे हैं लिहाजा ट्रोलर ने डायरेक्टर को भी नहीं बख्शा.
वैसे यह भी बताना जरूरी है कि रामायण महाकाव्य की मूल भाषा संस्कृत है. तुलसीदास ने अवधि और ब्रजभाषा में रामचरित मानस लिखी है. जिसका अनुवाद भारत समेत दुनिया की अनेक प्रमुख भाषाओं में हुआ है. खुद नितेश तिवारी निर्देशित और नमित मलहोत्रा निर्मित रामायण जब हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओं में भी रिलीज करेंगे तब ट्रोलर्स का रुख क्या होगा? क्या रामायण की मेकिंग केवल हिंदी भाषा में ही होनी चाहिए? जाहिर है इस तरह के विवाद किसी भी वृहद परिप्रेक्ष्य की प्रस्तुति को सीमित ही करते हैं.
मुझे लगता है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की टिप्पणियां बेपरकी से कम नहीं. साई पल्लवी दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने वाली नई अभिनेत्री हैं. उन्होंने तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्मों में ज्यादातर काम किया है. रामायण उनकी पहली हिंदी फिल्म है.
इतिहास में झांककर देखें तो साई पहली ऐसी अभिनेत्री नहीं हैं जिनकी हिंदी कमजोर है. सत्तर-अस्सी के दशक में दक्षिण या पश्चिम बंगाल से आने वाली अनेक अभिनेत्रियां रही हैं, जिन्होंने फिल्में करते हुए हिंदी सीखी और पत्रकारों के सवालों का जवाब हिंदी में देना शुरू किया. ऐसे कलाकारों में इनमें बैजयंती माला से लेकर रेखा, हेमा, श्रीदेवी, जया प्रदा आदि तक शामिल हैं. सबसे हाल में रश्मिका मंदाना ने भी थोड़ा बहुत हिंदी बोलना सीखा.
कैटरीना कैफ जब आईं तो वह भी हिंदी नहीं बोल पाती थीं, उन्होंने बाद में हिंदी सीखी. अभिनेताओं में तो रजनीकांत और कमल हासन ने जब हिंदी फिल्मों में पहली बार अभिनय किया था, तब भी उनको हिंदी नहीं आती थी. कमल हासन की पहली फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ थी, तो रजनीकांत की पहली हिंदी फिल्म ‘अंधा कानून’ थी. ‘एक दूजे के लिए’ में कमल हासन के संवाद की हिंदी बहुत ही टूटी फूटी थी. लेकिन बाद के दौर में दक्षिण भारत के बहुत से कलाकारों ने बखूबी हिंदी बोलना सीखा.
अब साई पल्लवी को भी मौका दिया जाना चाहिए. पहली बार हिंदी फिल्म करने का स्वागत किया जाना चाहिए. उम्मीद करनी चाहिए कि अगर भविष्य में मुंबईया सिनेमा में आगे बढ़ना है तो वो अपनी हिंदी सुधारेंगी.
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संजीव श्रीवास्तव का पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी में है लेकिन पिछले करीब ढाई दशक से दिल्ली से लेकर मुंबई तक मीडिया की मुख्यधारा में सक्रिय हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ से लेकर क्रिएटिव राइटिंग तक का हुनर रखते हैं, देश-विदेश की राजनीति, फिल्म, लिटरेचर, क्राइम जैसे विषयों पर बेबाकी से लिखते हैं. आसानी से समझ आने वाली और सोचने-विचारने वाली भाषा लिखना पसंद है. सिनेमा प्रिय विषय है- लिहाजा फिल्मों पर अब तक तीन किताबें, दो उपन्यास और कुछ पटकथा-संवाद भी लिख चुके हैं. कुछेक प्रिंट मीडिया में सब एडिटरी के बाद साल 2000 से टीवी न्यूज़ की दुनिया में प्रवेश. सबसे पहले जैन टीवी फिर सहारा समय में करीब 14 साल गुजारा, जहां प्राइम टाइम स्पेशल शोज/प्रोग्राम बनाने से लेकर मुंबई की एंटरटेंमेंट फील्ड में रिपोर्टिंग तक की. उसके बाद सूर्या समाचार, एबीपी न्यूज़ और न्यूज़ इंडिया के आउटपुट होते हुए अब डिजिटल मीडिया में TV9 से सम्बद्ध.

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