Sambhal News: गंगा किनारे स्थित असदपुर-सुखैला गांव का बहुचर्चित सरकारी भूमि आवंटन घोटाला अब केवल फर्जी पट्टों या सरकारी फाइलों का मामला नहीं रह गया है। प्रशासन की कार्रवाई के बीच जब हिन्दुस्तान की टीम गांव पहुंची तो सरकारी कागजों के पीछे छिपी एक ऐसी सच्चाई सामने आई, जिसने दर्जनों गरीब परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी। गांव में ऐसे कई परिवार मिले, जिन्होंने सरकारी जमीन मिलने के लालच में अपनी पुश्तैनी खेती तक बेच दी। किसी ने रिश्तेदारों से कर्ज लिया, किसी ने वर्षों की जमा पूंजी लगा दी, लेकिन आज उनके हाथ में सिर्फ पट्टे का कागज है। जमीन पर कभी कब्जा नहीं मिला और अब वही पट्टे निरस्त होने की प्रक्रिया में हैं। गांव के लोगों का कहना है कि उस समय गांव में यह प्रचार किया गया था कि सरकार गरीबों को जमीन दे रही है। बस नाम चढ़वाना है और कुछ खर्चा करना पड़ेगा। गरीबों को भरोसा दिलाया गया कि कुछ ही दिनों में कब्जा भी मिल जाएगा। इसी भरोसे में कई लोगों ने दस-दस हजार रुपये दिए। किसी ने रिश्तेदारों से उधार लिया तो किसी ने खेत बेचकर पैसे जुटाए। लेकिन वर्षों बीत गए, जमीन पर कब्जा नहीं मिला。
गांव के एक परिवार की कहानी इस पूरे घोटाले का सबसे दर्दनाक पहलू सामने लाती है। परिवार के छह भाइयों को एक कथित दलाल और तत्कालीन प्रधान प्रतिनिधि ने भरोसा दिलाया कि सरकारी चरागाह भूमि पर 10-10 बीघा के पट्टे आसानी से मिल जाएंगे। इसके लिए पहले पैसे की व्यवस्था करनी होगी। सरकारी जमीन मिलने के सपने में छह भाइयों ने अपनी मां के नाम दर्ज करीब 10 बीघा पुश्तैनी खेती बेच दी। उसी पैसे से पांच भाइयों के नाम सरकारी चरागाह भूमि के पट्टे करा दिए गए। उस समय परिवार को लगा कि छोटी जमीन बेचकर उससे कई गुना अधिक भूमि मिल गई। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। प्रशासनिक जांच में पूरा आवंटन फर्जी और नियम विरुद्ध निकला। अब पट्टे निरस्त हो रहे हैं। न मां की जमीन बची और न सरकारी जमीन मिली। परिवार आज न्याय की तलाश में अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
ग्रामीण बताते हैं कि अधिकांश लोगों से करीब 10-10 हजार रुपये लेकर पट्टे दिलाने का भरोसा दिया गया। पट्टा तो मिल गया लेकिन जमीन पर कब्जा किसी को नहीं दिया गया। कई लाभार्थी वर्षों तक यह सोचते रहे कि कभी न कभी प्रशासन कब्जा दिला देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब जब पूरे मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच तेज हो गई है तो लोगों को समझ में आ रहा है कि जिस जमीन को वे अपनी मान बैठे थे, वह सिर्फ कागजों तक सीमित थी।
जांच में सामने आया कि जिस भूमि का आवंटन किया गया, वह गंगा की रेतीली और प्रतिबंधित श्रेणी की सरकारी भूमि थी। समय के साथ गंगा की धारा बदल गई और जमीन का स्वरूप भी बदलता रहा। यही कारण रहा कि अधिकांश लोगों ने कभी वास्तविक कब्जा लेने का प्रयास भी नहीं किया। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर कोई सीमांकन नहीं हुआ और न ही प्रशासन ने कभी कब्जा दिलाया।
ग्राम सभा की खुली बैठक नहीं हुई।
पात्रों का पारदर्शी चयन नहीं किया गया।
लॉटरी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
कई लाभार्थी संबंधित गांव के निवासी तक नहीं थे।
भूमि की असली श्रेणी छिपाकर उसे कृषि योग्य दर्शाया गया।
आवंटन के बाद भी किसी को विधिवत कब्जा नहीं दिया गया।
अब दलालों के घर के चक्कर काट रहे पीड़ित
गांव में जिन लोगों ने पैसे देकर पट्टे कराए थे, वे अब कथित दलालों और तत्कालीन प्रधान प्रतिनिधि के घरों के चक्कर लगा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अब पैसे वापस मांगने पर उन्हें टाल दिया जाता है। कई लोगों का कहना है कि उनसे अभद्र व्यवहार तक किया जा रहा है। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, जमीन भी गई, पैसा भी गया… अब किसके पास जाएं।
जुनावई। गुन्नौर तहसील क्षेत्र के गांव असदपुर-सुखैला में 71.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि के कथित फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस ने विवेचना तेज कर दी है। अब जांच का फोकस वर्ष 2019 में आवंटित किए गए 162 पट्टों पर है। विवेचक एक-एक पट्टाधारक से जुड़े दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और अन्य साक्ष्य जुटाने में लगे हैं, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि किन परिस्थितियों में पट्टे आवंटित हुए और लाभार्थियों की भूमिका क्या रही।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विवेचना के दौरान प्रत्येक पट्टे की फाइल, संबंधित राजस्व अभिलेख, आवंटन प्रक्रिया और लाभार्थियों से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर पट्टाधारकों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आवंटन प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई और किन-किन लोगों को इसका लाभ पहुंचाया गया। बता दें कि मामले में भौना नंगला की लेखपाल स्वाती शर्मा की तहरीर पर गुन्नौर थाने में तत्कालीन एसडीएम, तहसील एवं चकबंदी विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, पूर्व ग्राम प्रधान सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि शेष वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। आईओ ने बताया कि विवेचना पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
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