Santkabir Nagar News: हाईवे पर ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा उपायों की कमी – Live Hindustan

Santkabir Nagar News: हिन्दुस्तान टीम, संतकबीरनगर। गोरखपुर-लखनऊ नेशनल हाईवे पर जिले में जगह-जगह जिम्मेदारों की लापरवाही देखने को मिलती है। मगहर से लेकर टेमा के बीच कई जगह ब्लैक स्पॉट हैं। जहां पर आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। मोड़, कट और फ्लाईओवर के अंडर पास में कहीं भी न तो संकेतक है और ना ही कोई और व्यवस्था। जिम्मेदारों ने केवल ब्रेकर बनाकर कोरम पूरा कर लिया है। शहर में ही कई ब्लैक स्पॉट हैं, जहां सप्ताह में एक दो दुर्घटनाए हो ही जाती हैं। चौराहों पर हाईवे को लोग अपनी मर्जी के अनुसार पार करते हैं, यहां पर ट्रैफिक पुलिस की भी कोई व्यवस्था नहीं है। हाइवे पर चेतावनी बोर्ड न होने से चालकों को आगे के खतरों जैसे तीखे मोड़, गड्ढों या निर्माण कार्य का समय पर पता नहीं चलता। इससे वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं और गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका हर पल बनी रहती है।
हाईवे पर शहर का नेदुला बाईपास चौराहा ब्लैक स्पॉट में शामिल हैं। यहां पर रांग साइड से भी वाहन आते हैं। मेंहदावल बाईपास का फ्लाईओवर उतरने के बाद यह चौराहा पड़ता है। यहां लोग हाईवे पार करते हैं। आए दिन इस स्थान पर दुर्घटनाएं होती हैं। सबसे अधिक समस्या कोहरे और रात के समय में होती है। यहां पर कोई भी संकेतक नहीं लगा है। न ही किसी तरह के लाइट की व्यवस्था है। पूरे दिन बड़ी संख्या में लोग यहां से हाईवे पार होकर दूसरे लेन अथवा कलक्ट्रेट की ओर जाते हैं। कलक्ट्रेट की तरफ से आने वाले लोग शहर में भी यहीं से प्रवेश करते हैं। शहर का प्रमुख कट होने के बावजूद जिम्मेदार पूरी तरह से बेखबर हैं।
शहर के अन्तिम छोर पर स्थित सरैया बाईपास चौराहा भी ब्लैक स्पॉट है। यहां से लोग रॉंग साइड से सब्जी मंडी के लिए जाते हैं। उधर से आते समय में यहीं से हाईवे पार करके शहर में प्रवेश करते हैं। इस कारण यहां पर भीड़ भी अधिक होती है। लेकिन यहां न तो ब्रेकर बनाया गया है और न ही संकेतक ही लगाए गए हैं। हाईवे पर फर्राटा भरते वाहनों से खतरा बना रहता है। आए दिन यहां पर भी दुर्घटना होती है। कई मौतें भी हो गई हैं। उसके बाद भी जरूरी इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
कांटे। नेशनल हाइवे पर चेतावनी बोर्ड और संकेतक न होने से चालकों को आगे के खतरों का समय पर पता नहीं चल पाता है। तीखे मोड़, गड्ढे या निर्माण कार्य जैसी जानकारी न मिलने से वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। जनपद के नेशनल हाइवे पर स्थित बूधा कला चौराहे पर राहगीरों की जान जोखिम में है। यहां काफी समय से चेतावनी बोर्ड और संकेतक नदारद हैं। टूटे हुए बोर्डों को बदला नहीं गया है, जिससे हाइवे से गुजरने वाले वाहनों को आगे चौराहे का पता नहीं चल पाता और दुर्घटना का डर बना रहता है। टेमा रहमत चौराहे पर सफेद पट्टी तो लगाई गई है, लेकिन बड़े या छोटे वाहन गति कम नहीं करते हैं। तेज रफ्तार में निकल जाते हैं। अक्सर हर सप्ताह कोई न कोई दुर्घटना हो जाती है। पिछले लगभग एक वर्ष में यहां दर्जनों घटनाएं हो चुकी हैं।
टेमा रहमत में दुर्घटना के बाद सूचना मिलने पर पुलिस को पहुंचने में करीब 15 मिनट लग जाते हैं, क्योंकि कांटे चौकी की दूरी लगभग पांच किलोमीटर है। एंबुलेंस को आधे घंटे से अधिक का समय लगता है। इसका मुख्य कारण जिला मुख्यालय से अस्पताल से निकलते समय खलीलाबाद ब्रिज के पास लगने वाला जाम है। कभी-कभार चुरेब से एंबुलेंस आ जाती है। इसी वजह से लोग अक्सर अपनी सुविधा के अनुसार निजी वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुंचाते हैं या निजी अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाते हैं।
जनपद के बस्ती और संतकबीरनगर बॉर्डर पर बने पुल पर भी ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। कारण कि पुल से नीचे उतरने पर घुमावदार रास्ता है और चढ़ने पर आगे ज्यादा दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि अक्सर ठंड के मौसम में शीतलहर के दौरान दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है।
मगहर। राष्ट्रीय राजमार्ग पर फर्राटा मार वाहन दौड़ रहे हैं। इससे बचने के लिए हाईवे पर माकूल इंतजाम नहीं है। इस मार्ग पर कुछ ऐसी जगह हैं, जहां दुर्घटना न हो यह मुमकिन नहीं है। हाईवे पर स्थित बंगला ताल, मंझरिया, रैना पेपर मिल, कुईकोल मोड़, सेमरा बाईपास चौराहा, समरधीर मंदिर, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर व जनपद सीमा पर स्थित आमी नदी का पुल ब्लैक स्पॉट हैं, जहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। यहां बचाव के उपाय नहीं है।
रैना पेपर मिल के निकट बने कट पर हमेशा हादसे होते रहते हैं। जहां वाहन आपस में कम टकराते हैं। बल्कि डिवाईडर पर चढ़ कर गाड़ियों के पलटने की घटनाएं हमेशा होती रहती है। जिसका कारण यह है कि यहां डिवाइडर एक दूसरे के सामने न होकर दोनों पटरियों पर बने है। यहीं कारण है कि दोनों दिशा से आने वाले वाहने चालक अगर जरा भी ध्यान हटाते हैं तो उन्हें दुर्घटना के रूप में भारी कीमती चुकानी पड़ती है।
यही हाल रसूलाबाद कट के पास का भी है। जहां सीधे वाहन दीवार को तोड़कर पुल में गिर जाते हैं। यही कारण है कि पिछले एक माह के अन्दर दो घटनाएं इस तरह की हो चुकी है। हाईवे के किनारे पटरियां दुर्घटना का कभी कभी मुख्य कारण भी बन जाती हैं। इस दौरान अचानक सामने की गाड़ी अनियंत्रित हो जाने पर पीछे की गाड़ी बचने के चक्कर में अक्सर पलट जाती है। यही कारण है कि हाईवे के किनारे बसने वाले लोग अपने आप को हमेशा असुरक्षित महसूस तो करते हैं साथ ही दहशत में जीवन जीन रहे हैं। जिला मुख्यालय से जनपद सीमा तक दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। इसके बाद भी यहां को संकेतक लगाना जिम्मेदार मुनासिब नहीं समझ रहें है। हादसों की बात करें तो महीने का शायद कोई दिन ऐसा बीते जिस दिन हादसे न होते हो।
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