प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस में संविदा नर्सिंगकर्मी दीपक खारवाल की मौत ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। नौकरी से हटाए गए नर्सिंगकर्मियों के आंदोलन के बीच हुई इस मौत के बाद शुक्रवार को अस्पताल परिसर विरोध का अखाड़ा बन गया। मृतक के साथियों ने इमरजेंसी के बाहर मोर्चा खोल दिया और देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए कि अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं करीब पांच घंटे तक प्रभावित रहीं।
अस्पताल के इमरजेंसी ब्लॉक के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारी जुट गए। नारेबाजी, धरना और हंगामे के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदेशभर से इलाज के लिए पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि अस्पताल प्रशासन हालात सामान्य बनाने की कोशिशों में जुटा रहा।
मृतक के भाई महेश खारवाल ने दीपक की मौत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका भाई सिर्फ नौकरी जाने के कारण आत्महत्या नहीं कर सकता। उन्होंने मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि परिवार को राजनीति नहीं, बल्कि सच्चाई और न्याय चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम के बाद भी शव परिजनों को समय पर नहीं सौंपा गया।
बढ़ते तनाव को देखते हुए एनएचएम मिशन निदेशक जोगाराम, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बी.एल. गोयल, कलेक्टर संदेश नायक, एडीएम युगांतर शर्मा और एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन मुआवजे और अन्य मांगों पर सहमति नहीं बनने से प्रदर्शन जारी रहा।
दिनभर चले विरोध के बाद शाम को माहौल और गर्म हो गया। कुछ प्रदर्शनकारी अस्पताल परिसर के मुख्य गेट तक पहुंच गए और वहां तोड़फोड़ शुरू कर दी। गेट के शीशे तोड़ दिए गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
हंगामे के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक के हाथ में चोट लगी, जबकि एसीपी नारायण बाजिया के कान में चोट आई। दोनों अधिकारियों को तत्काल उपचार के लिए भेजा गया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई।
दरअसल, हाल ही में कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स के तहत 859 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्तियां दी गई हैं। इसके चलते वर्षों से प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए काम कर रहे करीब 460 संविदा नर्सिंगकर्मी सेवा से बाहर हो गए। यही कर्मचारी पिछले कई दिनों से एसएमएस मेडिकल कॉलेज के बाहर आंदोलन कर रहे थे।
मामले ने राजनीतिक रंग तब पकड़ लिया जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल मोर्चरी पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात की और मामले में न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।
घंटों चली बातचीत के बाद प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ मांगों पर सहमति बनी। मृतक की पत्नी को कॉलेज में संविदा नौकरी देने, सहयोग राशि एकत्र कर आर्थिक मदद करने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर सहमति बनी।
समझौते के तहत परिवार को पालनहार योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ने का फैसला किया गया। वहीं आरएलपी की ओर से 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई। इसके बाद आंदोलन शांत हुआ, लेकिन दीपक खारवाल की मौत को लेकर उठे सवाल अभी भी जांच के दायरे में हैं।
सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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