TCS के बाद अब TATA की Air India की बारी, कंपनी कर सकती है छंटनी; 20 हजार करोड़ के नुकसान से मची खलबली! – Jagran

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टाटा समूह की एयर इंडिया ₹20000 करोड़ के अनुमानित घाटे और मध्य पूर्व तनाव के कारण बढ़े ईंधन मूल्यों के चलते छंटनी और उड़ान संचालन में कटौती पर विचार कर …और पढ़ें
टाटा ग्रुप की Air India में हो सकती है छंटनी?
नई दिल्ली। पिछले साल टाटा की TCS में बड़ी छंटनी हुई थी। सूत्रों के अनुसार 2026 में टाटा ग्रुप द्वारा संचालित भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया में छंटनी हो सकती है।

इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, टाटा ग्रुप के मालिकाना हक वाली एयर इंडिया FY26 में करीब 20,000 करोड़ रुपये के अनुमानित घाटे के बाद, अपनी फ्लाइट ऑपरेशंस में कटौती करने पर विचार कर रही है। कंपनी अपने अपने ऑपरेशंस में 15-20 प्रतिशत की कटौती पर विचार कर रही है। इसके साथ ही वर्कफोर्स में कटौती को लेकर भी विचार किया जा रहा है।
अगर कंपनी ऑपरेशन्स में 15 से 20 फीसदी की कटौती करती है तो मौजूदा 1,100 से ज्यादा डेली फ्लाइट्स के शेड्यूल में से 100 से ज्यादा फ्लाइट्स प्रभावित हो सकती हैं। एयर इंडिया, अकेले तौर पर, अभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन्स पर हर दिन 700 से ज्यादा फ्लाइट्स ऑपरेट करती है।
टाटा ग्रुप के सपोर्ट वाली एयर इंडिया बढ़ते ऑपरेटिंग प्रेशर के बीच फाइनेंस को स्टेबल करने की बड़ी कोशिश के तहत वर्कफोर्स को कम करने के प्रस्तावों का रिव्यू कर रही है। एयरलाइन की उड़ानों और वर्कफोर्स कटौती को लेकर अंतिम फैसला एयरलाइन के बोर्ड द्वारा लिया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एयरलाइन अपने खर्चों पर काबू पाने की कोशिशों के तहत कई उपायों पर विचार कर रही है। इनमें करीब 10 प्रतिशत क्रू सदस्यों को कुछ समय के लिए काम से हटाना (बेंच करना) और कुल कर्मचारियों की संख्या में 5-7 प्रतिशत तक की संभावित कटौती करना शामिल है। हालांकि, अभी इस पर सिर्फ विचार ही चल रहा है।
वर्तमान में टाटा की स्वामित्व वाली एयर इंडिया ग्रुप में करीब 24 हजार लोग काम करते हैं। अगर इसमें से 5% वर्कफोर्स कम करने का फैसला लिया जाता है तो यह संख्या करीब 1200 होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन प्रस्तावों की समीक्षा एयरलाइन की मैनेजिंग कमेटी ने की है और अगले महीने इन्हें बोर्ड के सामने पेश किए जाने की संभावना है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हुए युद्ध की वजह से एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। अभी फिलहाल संघर्ष विराम चल रहा है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाला व्यापार अभी भी प्रभावित है। गैस और तेल लेकर मालवाहक जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि इसका सीधा असर फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है।
मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से न सिर्फ फ्यूल की कीमतें बढ़ी हैं बल्कि कई क्षेत्रों के हवाई क्षेत्र बंद है। इसका सीधा असर विमानन कंपनियों के ऑपरेशन पर पड़ा है। ऐसे में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ी हुई कीमतें, हवाई क्षेत्र का बंद होना और रुपये की गिरती कीमत ने एयर इंडिया ग्रुप एयरलाइन की बैलेंस शीट पर काफी दबाव डाला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मौजूदा आर्थिक माहौल का असर विमानों के बेड़े में नए विमान शामिल करने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए चल रहे निवेश पर भी पड़ सकता है।

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