Travelling In India : ना किराया भारी, ना सफर उबाऊ… साल में एक बार चलती है ये स्पेशल ट्रेन, सिर्फ ₹25 में रवाएगी Incredible India की सैर – Dainik Tribune

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चंडीगढ़, 26 मई (ट्रिन्यू)
भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां आस्था और संस्कृति की गहराई हर कोने में देखने को मिलती है। इसी आध्यात्मिक परंपरा का एक अनोखा उदाहरण है- जागृति यात्रा ट्रेन, जो साल में सिर्फ एक बार चलती है। यह ट्रेन केवल एक माध्यम नहीं, बल्कि एक चलती-फिरती प्रेरणादायक यात्रा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को भारत की सामाजिक विविधता से परिचित कराना है।
क्या है जागृति यात्रा?
जागृति यात्रा एक विशेष सामाजिक पहल है, जो हर साल दिसंबर के महीने में आयोजित होती है। इस यात्रा का संचालन जागृति सेवा संस्था करती है। इसकी शुरुआत 2008 में हुई थी और तब से यह यात्रा हजारों युवाओं को जोड़ चुकी है। यह ट्रेन लगभग 15-18 दिन की होती है और भारत के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरती है। यह ट्रेन 15 दिनों में 800 कि.मी का सफर तय करती है।
किन-किन स्थानों से गुजरती है यह ट्रेन?
जागृति यात्रा ट्रेन देश के लगभग 12 से 15 शहरों से होकर गुजरती है, जिसकी शुरुआत दिल्‍ली से होती है। इसका पहला स्टॉपेज अहमदाबाद होता है। इस यात्रा की शुरुआत दिल्‍ली से होती है और इसका पहला स्टॉपेज अहमदाबाद होता है। इसके बाद यह ट्रेन मुंबई, बेंगलुरु, मदुरई, ओडिशा से होते हुए दिल्‍ली पहुंचती है। इस दौरान युवाओं को कई तीर्थ और पर्यटन स्‍थल घूमाए जाते हैं। जानकारी के अनुसार, इस ट्रेन का किराया महज 25 रुपए हैं।
कौन होते हैं यात्री?
इस ट्रेन में सवार होने वाले यात्री सामान्य यात्री नहीं होते। ये देशभर से चुने गए युवा होते हैं, जिनकी उम्र 20 से 27 साल के बीच होती है। इनमें छात्र, युवा पेशेवर, सामाजिक कार्यकर्ता और नवाचार के इच्छुक लोग शामिल होते हैं। चयन प्रक्रिया कठोर होती है, जिसमें आवेदन और साक्षात्कार दोनों होते हैं।
क्यों है यह ट्रेन खास?
यह ट्रेन युवाओं को देश में हो रहे सकारात्मक बदलावों से जोड़ती है। देशभर से आए युवाओं को एक मंच पर लाकर, साझा विचारों पर कार्य करने का अवसर देती है। ट्रेन में हर दिन समूह चर्चाएं, कार्यशालाएं और विचार-विमर्श होते हैं, जो आत्मविकास में सहायक होते हैं। यह ट्रेन सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि देश में परिवर्तन लाने की सोच रखने वालों का आंदोलन है। इस ट्रेन का विजन “उद्यम के माध्‍यम से भारत का निर्माण” है, जिसमें युवा आंत्रप्रेन्योर बनने के गुर सीख सकते हैं।

दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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