US Vs Iran: अमेरिका का अटैक, ईरानी पलटवार, फिर खौफ में दुनिया… तेल की कीमतों आग – AajTak

अमेरिका और ईरान के बीच सुलह होती नजर नहीं आ रही है. पाकिस्तान की तमाम कोशिशें भी शांति वार्ता पर दोनों को एक साथ लाने में हर बार नाकाम साबित हो रही हैं. दुनिया एक बार फिर युद्ध के खौफ में हैं, क्योंकि अमेरिका के ईरानी पोर्ट बंदर अब्बास पर स्ट्राइक के बाद ईरानी पलटवार ने ग्लोबल टेंशन को हाई पर पहुंचा दिया है. 
मिसाइल और ड्रोन्स अटैक के बीच बीते कुछ दिनों से फिसल रही कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उबाल आने लगा है. गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड प्राइस करीब 4 फीसदी के आसपास उछल गया. हालांकि, अभी ये 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना हुआ है. 
US-Iran में ताबड़तोड़ अटैक 
सबसे पहले बताते हैं कि आखिर दोनों देशों के बीच अचानक कैसे संघर्ष फिर से बढ़ गया है. बुधवार रात अमेरिका ने ईरान के अंदर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए. निशाना बना ईरानी बंदर अब्बास पोर्ट. रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक यूएस ऑफिशियल के हवाले से कहा गया कि US सेना ने रात भर ईरान में नए अटैक किए. 
अमेरिकी अटैक के बाद ईरान की IRGC ने भी दावा किया है कि बंदर अब्बास पोर्ट के पास हमलों के जवाब में उसने अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए हमले किए हैं. हालांकि इस बात की जानकारी नहीं आई है कि ईरानी गार्ड्स ने किस अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है.
तनाव बढ़ने से तेल में उथल-पुथल 
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है और ये फिर से उछाल मारने लगी हैं. क्रूड ऑयल प्राइस पर नजर डालें, तो बीते कारोबारी दिन बुधवार तक तेजी से टूट रहा तेल, अचानक उछल पड़ा है.
ब्रेंड क्रूड की कीमत (Brent Crude Oil Price) खबर लिखे जाने तक 3.60% की तेजी के साथ 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, तो वहीं WTI Crude Oil Price 3.70% चढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. हालांकि, अभी भी इसका 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहना राहत भरा है. 
महंगाई का जोखिम बढ़ने का खौफ  
अमेरिका-ईरान में अटैक के बाद से ही क्रूड ऑयल दुनिया को डराता हुआ नजर आ रहा है. बीते कुछ समय में इस मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते गहराए तेल संकट ने पहले ही मुसीबतों का पहाड़ खड़ा किया है और इसमें अचानक आए उछाल से दुनिया में महंगाई बढ़ने का खौफ बढ़ता नजर आ रहा है.
सबसे ज्यादा चिंता उन देशों के लिए, जो ज्यादातर तेल के आयात पर निर्भर हैं. भारत भी इस लिस्ट में शामिल है और अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. 
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