Varanasi News: गंगा-गोमती ने दी राहत की सांस, दुश्वारियों की बरकरार है फांस – livehindustan.com

Varanasi News: वाराणसी, विशेष संवादाता। गंगा का रौद्र रूप शुक्रवार भोर से शांत होने के साथ सहायक नदियों-वरुणा, गोमती और नाद का भी वेग थम गया। सुबह आठ बजे जलस्तर की घटाव गति 0.5 सेंमी/घंटा रात आठ बजे एक सेंमी हो गई थी। रात 8 बजे गंगा का जलस्तर 70.56 मीटर पर था। शुक्रवार को 12 घंटे के दौरान जलस्तर 10 सेंमी घटा है। केन्द्रीय जल आयोग के मुताबिक, प्रयागराज से बनारस वाया मिर्जापुर, गंगा में घटाव का ट्रेंड फिलहाल जारी रहेगा। गंगा और सहायक नदियों के रूख में बदलाव से बाढ़ विस्थापितों और बाढ़ का दायरा बढ़ने से आशंकित लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि प्रभावित इलाकों में दुश्वारियों की फांस बरकरार है बल्कि शांत होने के पहले गंगा औ गोमती आठ नए गांवों को चपेट में ले चुकी थीं। विगत लगभग एक हफ्ते के दौरान 16 मोहल्लों एवं 24 गांवों से 836 परिवारों के 3876 लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों एवं सुरक्षित स्थानों पर आश्रय ले चुके हैं। शुक्रवार को 567 परिवारों के 2486 लोग राहत शिविरों में पहुंचाए गए। पीड़ितों की संख्या बढ़ी तो शिविरों की भी संख्या 19 से 20 हो गई। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए छह अतिरिक्त नाव-मोटरबोट की शुक्रवार को व्यवस्था की। बाढ़ क्षेत्र में कुल 42 नावें लगाई गई हैं। दबाव बढ़ने पर एनडीआरएफ की भी एक अतिरिक्त टीम (कुल दो) प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय की गई।

शुक्रवार को महापौर एवं नगर आयुक्त ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में इंतजाम देखे, कर्मचारियों को जरूरी निर्देश दिया मगर गुरुवार की तरह ही ज्यादातर बाढ़ग्रस्त मोहल्लों में गंदगी, बदबू की शिकायतें न सिर्फ बरकरार हैं बल्कि बढ़ गईं। फौरी राहत के लिए पीड़ित सघन फॉगिंग की जरूरत महसूस कर रहे हैं। राहत शिविरों एवं बाढ़ग्रस्त एरिया से सटे मोहल्लों और गांवों में मौसमी के साथ जलजनित बीमारियों का दायरा बढ़ता जा रहा है।

महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शुक्रवार को मोटरबोट से कोनिया, दानियालपुर, हुकुलगंज, सरैया, पुरानापुल में बाढ़ की स्थिति देखी। महापौर ने अंधरापुल में राहत शिविर में सुविधाओं को जाना और बाढ़ प्रभावितों से संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों को समय पर दूध, बिस्किट आदि के साथ पेयजल, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा। इस दौरान पार्षद मदन मोहन दुबे, अशोक मौर्या, ओकास अंसारी, जोनल अधिकारी पवन कुमार आदि मौजूद रहे। हिमांशु नागपाल ने सलारपुर वार्ड के रसूलगढ़, सलारपुर, सरैया, पुलकोहना और खालिसपुर क्षेत्रों का जायजा लिया। अधिकारियों को राहत एवं सफाई के संबंध में दिशा-निर्देश दिए।

सीएमओ डॉ. एनपी सिंह ने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की 16 टीमें सक्रिय हैं। वे बाढ़ पीड़ितों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। जिन्हें सर्दी, जुकाम और बुखार है, उन्हें दवा दी जा रही है। बताया कि बाढ़ के मद्देनजर 61 टीमें बनी हैं। सभी अलर्ट हैं। आगे जरूरत पड़ेंगी तो सक्रिय हो जाएंगी।

गंगा का जलस्तर घटने से नगवा, सामने घाट क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है। नगवा नाला से गुरुवार रात से शुक्रवार शाम तक लगभग आधा फीट पानी घट गया। इससे सीवर ओवरफ्लो होने की समस्या भी कम हो गई। अस्सी घाट पर पानी लगा है। रमना में खेतों से पानी निकलने लगा है।

गंगा और गोमती नदी में आई बाढ़ का असर तटवर्ती इलाकों में दिखाई दे रहा है। वहीं, अजगरा के विधायक त्रिभुवन राम ने अधिकारियों और राजस्व टीम के साथ शुक्रवार को संकुलपुर, चंद्रावती, रामपुर, ढकवा, कैथी, रजवाड़ी, टैकोरी, लक्ष्मीसेनपुर, भगवानपुर, धौरहरा, हरिहरपुर, पिपरी, रजला और अजगरा आदि गंगा-गोमती के तटवर्ती क्षेत्रों का नाव से निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों की फसलों को हुए नुकसान का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलस्तर कम होने के बाद बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर उचित एवं समुचित मुआवजा दिलाने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाए। वहीं, राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, बच्चों के लिए दूध और पशु चारा आदि का मुकम्मल इंतजाम करने को भी कहा। विधायक ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जहरीले जीव-जंतुओं के काटने की स्थिति में एंटी-वेनम इंजेक्शन समेत जरूरी दवाएं उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।

चंद्रावती और रामपुर में क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों के लिए महिलाओं की ओर मुआवजे की मांग होने पर विधायक टी. राम ने मौके पर लेखपाल को बुलाकर क्षति का तत्काल आकलन करने और रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया कि समुचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान भाजपा के जिला उपाध्यक्ष वीरू सिंह, मंडल अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह, चोलापुर प्रधान संघ के अध्यक्ष रामसूरत यादव, जिला पंचायत सदस्य अंजनी नंदन पांडेय आदि भी साथ रहे।

चौबेपुर : नाद और गोमती नदी के जलस्तर में घटाव से लोगों ने राहत की सांस ली है। गंगा से चतुर्दिक घिरे पिपरी गांव में दो नावों के सहारे लोगों का आवागमन हो रहा है। टेकुरी गांव में बाढ़ चौकी एवं राहत केन्द्र बना है लेकिन शुक्रवार तक वहां कोई शरणार्थी नहीं पहुंचा था। बाढ़ से सैकड़ो एकड़ फसलें जलमग्न हो गई हैं। धौरहरा-बेला औेर मठिया-पिपरी मार्ग पर कमर भर पानी जमा है। लक्ष्मीसेनपुर के लोगों को भी अवागमन में परेशानी हो रही हैं। फसलें जलमग्न हैं। बाढ़ के चलते मार्कंडेय महादेव, चंद्रावती और गौरीशंकर महादेव घाटों की सीढ़ियों पर पानी जमा है। इससे गंगा स्नान करने वालों को परेशानी हो रही है।

चिरईगांव : ढाब क्षेत्र में रामपुर की दलित बस्ती में घुटने तक पानी भरने से 10 परिवारों के 68 लोग ट्रैक्टरों पर घरेलू सामान लादे शुक्रवार को राहत शिविर में पहुंचे। वहीं गंगा किनारे के लूठा, छितौना, छितौनी आदि गांवों में जाने वाले रास्तों पर जगह जगह पानी आ गया है। छितौना में गुरुबन्दे आश्रम तक जाने वाला सम्पर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न है। इधर नाले के रास्ते जाल्हूपुर पशु शवदाह गृह तक पानी पहुंच गया है। गांव के आरआरसी सेंटर में पानी भर गया है। जाल्हूपुर की दर्जनों बीघा धान की फसल पानी में डूब गई है। ब्लाक की बीडीओ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिया सैनी, एडीओ पंचायत अशोक कुमार चौबे, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरए चौधरी ने शुक्रवार को राहत शिविर में पहुंचे लोगों को हर सम्भव मदद करने का निर्देश दिया।

सारनाथ। वरुणा में शुक्रवार को घटाव देख लोगों में राहत की उम्मीद जागी मगर प्रभावित इलाकों में समस्याएं बरकरार हैं। लोगों के सामने रोजी-रोटी एवं रोजगार की समस्या है। नक्खीघाट क्षेत्र में बने राहत शिविर में दो सौ जबकि सलारपुर क्षेत्र के राहत शिविर में तीन सौ से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं। इनमें ज्यादातर को रोजगार एवं अपने घरों में रख छोड़े सामानों की चिंता सता रही है। अधिक परेशानी उन्हें है, जो घरों के पास ही टेंट में रह रहे हैं। गाय-बकरी साथ में होने से वे राहत शिविर में नहीं जा पा रहे हैं। डिपो कालोनी, सलारपुर में टेंट में रहने वाले लोगों को अब तक न तो राशन किट ली है न कोई हाल जानने पहुंचा है। दीनदयालपुर एवं पुरानापुल क्षेत्र में टेंट लगाकर रहने वालों को प्रशासनिक इमदाद का इंतजार है।

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