Vyatipat Yog Benefits: सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में कुछ ऐसे विशेष काल और मुहूर्त बताए गए हैं, जो मनुष्य के जीवन और उसकी आध्यात्मिक उन्नति की दिशा बदल सकते हैं आमतौर पर लोग किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त देखते हैं. ज्योतिषीय गणना में ‘व्यतिपात योग’ को सांसारिक कार्यों के लिए भले ही वर्जित और अशुभ माना जाता हो, लेकिन अध्यात्म की दुनिया में इसे महापुण्यशाली काल का दर्जा प्राप्त है.
शास्त्रों के अनुसार, व्यतिपात योग एक ऐसा अलौकिक दिन होता है जिसकी शक्ति 1,000 अमावस्या तिथियों पर किए जाने वाले पुण्य कर्मों से भी कहीं अधिक होती है. इस विशेष मुहूर्त में की गई छोटी से छोटी साधना भी साधक को कई जन्मों के दुखों से मुक्ति दिला सकती है.
व्यतिपात योग की मुख्य तिथियां और समय (श्रावण कृष्ण पक्ष पंचांग)
शुरुआत : 11 अगस्त 2026, दिन मंगलवार को शाम 06:51 बजे से
समाप्ति : 12 अगस्त 2026, दिन बुधवार को दोपहर 03:26 बजे तक
कुल अवधि : यह योग लगभग 20 घंटे 35 मिनट तक रहेगा.
वाराह पुराण में व्यतिपात योग की उत्पत्ति को लेकर एक बेहद रोचक प्रसंग मिलता है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब चंद्रदेव ने एक बार मार्ग से भटककर अपने गुरु बृहस्पति की पत्नी पर गलत नजर डाली, तब भगवान सूर्यनारायण ने उन्हें समझाने का प्रयास किया. सूर्यदेव को जब महसूस हुआ कि चंद्रदेव के मन में अपने गुरु के प्रति आदर और श्रद्धा समाप्त हो चुकी है, तो गुरु के प्रति इस अनादर को देखकर सूर्यदेव अत्यंत व्यथित हो उठे और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. जिन विशेष क्षणों में सूर्यदेव के ये आंसू गिरे, उसी समय को सृष्टि में ‘व्यतिपात योग’ कहा गया. यही कारण है कि इस योग के दौरान साधना करने से भगवान सूर्य नारायण और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
व्यतिपात योग की सबसे बड़ी महिमा यह है कि इस अवधि में किए गए किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक कार्य का फल 1 लाख गुना अधिक होकर मिलता है. यदि आप इस समय एक माला का जप करते हैं, तो उसका पुण्य फल एक लाख माला जपने के बराबर प्राप्त होता है. इसी तरह इस काल में किया गया दान, प्राणायाम, मानसिक सिमरन या मौन साधना सीधे अक्षय पुण्य में बदल जाती है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा का योग विशेष अंशों (213° 20′ से 226° 40′) के बीच होता है, तब व्यतिपात योग बनता है। इसके अधिपति देवता भगवान रुद्र (शिव) हैं. इस समय ब्रह्मांड में ऊर्जा का स्तर बहुत तीव्र और आध्यात्मिक होता है, इसलिए सांसारिक और भौतिक कार्यों के लिए इसे पूरी तरह वर्जित माना गया है.
इस काल में विवाह, सगाई, या कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए
नए व्यापार, दुकान, नए रोजगार या किसी बड़े वित्तीय सौदे की शुरुआत करने से बचें
गृह प्रवेश या नई संपत्ति की खरीदारी इस मुहूर्त में नुकसानदेह साबित हो सकती है
मानसिक जप: किसी भी गुरु-मंत्र, गायत्री मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का मानसिक जप करें.
दान-पुण्य: इस दिन गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल या छाते का दान करने से महापापों का नाश होता है.
श्राद्ध और तर्पण: पितरों की शांति के लिए इस योग में किया गया तर्पण 1,000 अमावस्या के श्राद्ध के समान तृप्ति प्रदान करता है.
यह महायोग हर 27 से 28 दिनों में एक बार आता है और लगभग 24 घंटे तक प्रभावी रहता है. अगली बार जब भी पंचांग में व्यतिपात योग आए, तो सांसारिक उलझनों को कुछ समय के लिए थामकर प्रभु साधना में जरूर बैठें, क्योंकि यह समय स्वयं भाग्य को सुदृढ़ करने की शक्ति रखता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Faith Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
नेहा अवस्थी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 सालों का अनुभव है. नेहा टीवी और डिजिटल दोनों माध्यमों की जानकार हैं. इन 18 सालों में इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों … और पढ़ें
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED