1 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर रील शेयर करते हुए देशवासियों से अपील की- ‘जब तक जरूरत न हो, सोना न खरीदें.’ PM मोदी ने विदेश यात्राओं और विदेशों में शादी करने से भी बचने की सलाह दी. ये सिर्फ 114 दिनों में दूसरी बार है जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को इस तरह की अपील की है. इससे पहले 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक रैली में उन्होंने ‘एक साल तक सोना न खरीदने’ का आग्रह किया था. आखिर PM मोदी बार-बार अपील क्यों कर रहे, पीछे क्या मजबूरी है और पिछली अपील का कितना असर हुआ…
आखिर क्या समस्या है जो PM मोदी बार-बार अपील कर रहे?
PM मोदी की 4 महीने बाद दोबारा अपील करने की 4 बड़ी वजहें समझ आती हैं:
वजह- 1: सोने का बढ़ता आयात बिल
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर देश है. इसके बावजूद देश के अंदर गोल्ड प्रोडक्शन न के बराबर है. भारत अपनी जरूरत का 99 फीसदी से ज्यादा सोना इम्पोर्ट करता है:
ये 72 बिलियन डॉलर भारत के कुल आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है. जब भारत सोना खरीदता है, तो उसे डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपए पर दबाव पड़ता है.
वजह-2: ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट
28 फरवरी 2026 से अमेरिका-ईरान युद्ध जारी है. इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है. इस रास्ते से दुनिया के कुल तेल निर्यात का 20 फीसदी गुजरता है. इसका सीधा असर तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत के आयात बिल को और बढ़ा दिया है. अब तेल और सोना दोनों मिलकर भारत के आयात बिल पर भारी दबाव डाल रहे हैं.
वजह- 3: करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का बढ़ता खतरा
जब कोई देश जितना निर्यात करता है, उससे ज्यादा आयात करता है, तो उसे करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का सामना करना पड़ता है.
वजह- 4: सोना सिर्फ निवेश नहीं, भावना है
भारत में सोना सिर्फ एक निवेश नहीं है. ये संस्कृति, भावना, बचत और शादी-त्योहार से जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री का ये आग्रह ‘असामान्य’ माना जा रहा है. जिस चीज को लोग पीढ़ियों से सुरक्षित निवेश मानते आए हैं, उसे न खरीदने की अपील दिखाती है कि हालात कितने गंभीर हैं.
PM मोदी ने पिछली अपील में क्या कहा और असर कितना हुआ?
10 मई 2026 को हैदराबाद में एक रैली में PM मोदी ने सात सूत्री अपील की थी:
PM मोदी ने कहा था, ‘एक साल तक, चाहे कोई भी त्योहार या शादी हो, हमें सोने के गहने नहीं खरीदने चाहिए.’
इस अपील से बाजारों में हलचल मच गई थी. ज्वैलरी शेयरों में भारी गिरावट आई और बाजार में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने की अटकलें तेज हो गईं. फिर मई 2026 में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया.
RBI के वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में सोने के आयात की वृद्धि दर में भारी कमी आई. जनवरी 2026 में सोने का आयात करीब 100 टन था, जो फरवरी में घटकर 65-66 टन और मार्च में 20-22 टन रह गया.
लोकल सर्कल्स के सर्वे के मुताबिक, 60 फीसदी भारतीयों ने PM की अपील के बाद सोना खरीदने पर पुनर्विचार किया. 28 फीसदी ने खरीदारी कम करने की बात कही, जबकि 36 फीसदी ने अगले एक साल में बिल्कुल न खरीदने का इरादा जताया.
हालांकि आयात की रफ्तार कम हुई है, लेकिन कुल वार्षिक आयात 72 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड है. यानी, अपील का असर हुआ है, लेकिन पूरी तरह से नहीं. वहीं, सोने की कीमतें भी बढ़ रही हैं. 1 सितंबर 2026 को MCX पर सोना 1,54,282 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रहा था. जब कीमतें बढ़ती हैं, तो लोग निवेश के तौर पर और ज्यादा सोना खरीदते हैं. ये एक विडंबना है.
अगर पिछली अपील का कुछ असर हुआ था, तो दोबारा क्यों?
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया 3 बड़ी वजहें बताते हैं:
कितना बड़ा फर्क पड़ सकता है?
अजय केडिया कहते हैं, ‘अगर 10 में से 1 भारतीय PM मोदी की अपील मानकर इस साल सोने के गहने नहीं खरीदता, तो देश को 7.2 अरब डॉलर की बचत हो सकती है. अगर सोने का आयात 30-40 फीसदी घट जाए, तो 20-25 अरब डॉलर की बचत होगी. अगर 50 फीसदी की कमी आती है, तो 36 अरब डॉलर जो कि अनुमानित CAD का लगभग आधा है. यानी अगर अपील सफल होती है, तो ये भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है.’
हालांकि, त्योहारी सीजन भी आने वाला है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या लोग PM मोदी की अपील मानते हैं या नहीं.
ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.
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