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संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है. यह सत्र हंगामेदार रहने वाला है. सरकार कई बिल पास कराने की तैयारी में है तो विपक्ष पेपर लीक और अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुकी है. महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को किसी भी कीमत पर सरकार पास कराना चाहती है जबकि विपक्ष की कोशिश फिर से मात देने की है.
अप्रैल में दो-तिहाई का बहुमत न जुटा पाने के चलते सरकार इन दोनों विधेयकों को पास नहीं करा सकी थी, लेकिन अब हालत बदल चुके हैं. अप्रैल से जुलाई आते-आते संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की संरचना में बदलाव आ चुका है. विपक्ष के 37 लोकसभा सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के समर्थन में खड़े हैं.
विपक्ष के कुनबे के बिखरने से केंद्र सरकार को दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को जुटाने में मदद मिलने की संभावना है. हालांकि, सरकार ने अभी इन महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन तेजी से बदलते समीकरण के लिहाज से माना जा रहा है कि सरकार दोनों विधेयक को पेश कर सकती है.
मानसून सत्र में सरकार पेश करेगी ये बिल
संसद के मानसून सत्र के लिए सरकार ने एजेंडा तय कर लिया है. इस बार सरकार संसद में अलग-अलग 8 बिल पेश करेगी. इसमें महिला आरक्षण और परिसीमन बिल शामिल नहीं है.
आयकर संशोधन विधेयक, 2026– ये बिल पहले जारी किए गए, जो अध्यादेश की जगह लेगा.
2. सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026- जजों की संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 किया जाएगा.
3. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026- राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण मिलेगा.
4. जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026- रजिस्ट्रेशन में देरी पर जुर्माने और नियम को सख्त बनाया जाएगा.
5. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक, 2026 – MSME को वित्तीय राहत देने और व्यापार को आसान बनाने के लिए सुधार होंगे.
6. विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक, 2026 – विदेशी चंदे के इस्तेमाल पर सख्त निगरानी होगी.
7. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: UGC, AICTE, NCTE की जगह एक रेगुलेटर अथॉरिटी बनाई जाएगी
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल होगा पास
मानसून सत्र में सभी की निगाहें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर है, जिसपर सरकार की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है. परिसीमन बिल तो अपने आप में दो बिल का पैकेज है. इसमें लोकसभा की सीट 550 से 850 तक बढ़ने और लोकसभा क्षेत्र का आकार दोबारा तय करने का प्रवधान है.
अप्रैल 2026 में सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर इस बिल को पेश किया था और उस समय तर्क दिया था कि 2029 तक 33 फीसदी महिला आरक्षण पास करने के लिए इस बिल को पास करना जरूरी है. विपक्ष ने इन दोनों बिल का ये कहते हुए विरोध किया कि बीजेपी इस बिल के जरिए अपना एजेंडा तय कर रही है. हालांकि लगता है इस बार कहानी कुछ बदली-बदली सी है.
सरकार ने अप्रैल में लोकसभा में बिल को पास कराने में विपक्ष रही थी, लेकिन तीन महीने में विपक्षी दलों में विभाजन ने सत्ताधारी गठबंधन को तो मजबूत किया है, लेकिन विपक्ष के खेमे में कटुता और असंतोष की भावना को और बढ़ा दिया है. हालांकि, सरकार के सूत्रों ने कहा कि संसद में तेजी से बदलते समीकरणों को देखते हुए विधेयक पेश करने से पहले उसे प्रतीक्षा करने और स्थिति पर नजर रखने की नीति अपनानी होगी.
संसद में विपक्ष का बिगड़ता समीकरण
हाल के दिनों में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के बिखरे हुए दिखने के बावजूद सत्ता पक्ष की ताकत बढ़ी है. विपक्ष अप्रैल में वे यह कहते हुए एकजुट हुए थे कि सरकार का मकसद परिसीमन के जरिए देश का चुनावी नक्शा बदलना है. वितरित विधेयकों में सत्ता पक्ष के मौखिक आश्वासनों के बावजूद सभी राज्यों के लिए सीटों में 50 फीसदी की वृद्धि का कोई उल्लेख नहीं था. पिछले कुछ दिनों में इसमें बिखराव के संकेत दिखे हैं.
टीएमसी और उद्धव ठाकरे की पार्टी में टूट के बाद एनडीए का समीकरण मजबूत हुआ है. मोदी सरकार को उम्मीद है कि अगर विधेयक में 50 फीसदी के मॉडल को शामिल कर लिया जाता है तो विपक्ष की कुछ पार्टियां रजामंद हो जाएंगी. शरद पवार की बेटी और एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि बिल में सभी राज्यों के सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी का साफ जिक्र हो, तो उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी.
डीएमके ने पिछली बार परिसीमन का ज़ोरदार विरोध किया था, तमिलनाडु में सत्ता गंवाने के बाद से ज़्यादा सतर्क हो गई है और अपने पत्ते ज़ाहिर नहीं कर रही है. डीएमके ने कहा कि अगर केंद्र उनकी सिफारिशों को शामिल करता है, तो उनकी पार्टी को इसका विरोध करने की कोई ज़रूरत नहीं है. डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि महिला आरक्षण बिल मौजूदा 543 सीटों के साथ पास हो सकता है, पर सरकार किस तरह से परिसीमन बिल लाना चाहती है हम नहीं जानते हैं.
अगर ये किसी भी तरह दक्षिण के राज्यों को प्रभावित करता है, तो डीएमके इसका समर्थन नहीं करेगी. दूसरी पार्टी के एक मेंबर कह रहे हैं कि हम समर्थन दे रहे हैं, ये बिलकुल सही नहीं है. मैं बार- बार कह रहा हूं कि हम दक्षिण राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, स्टालिन के नेतृत्व में दक्षिण राज्यों के सीएम की मीटिंग में हमने प्रस्ताव पास किया है कि ऐसी स्थिति में 25 साल के लिए परिसीमन को रोक देना चाहिए.’
मोदी सरकार ने संविधान (130वां संशोधन) बिल को फिलहाल टालने का फैसला किया, जिसका मकसद गंभीर अपराधों के लिए 30 दिनों तक लगातार गिरफ्तार रहने वाले मंत्रियों को पद से हटाना है. इसके बाद सोमवार को होने वाली ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025’ पर संसद की संयुक्त समिति की बैठक रद्द कर दी गई. इस तरह से सरकार ने विपक्ष के बीच पैठ जमाने की कोशिश में है.
क्या है लोकसभा का नंबर गेम?
केंद्र की सरकार मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पेश करती है तो पास कराने के लिए दो-तिहाई का बहुमत चाहिए होगा. लोकसभा में कुल 543 सीटें है, जिसमें से फिलहाल 3 सीटें खाली है. इस लिहाज से संविधान संसोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत 360 सदस्यों के जरूरत होती है. अप्रैल में एनडीए को 298 सांसदों का समर्थन मिला था. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है.
तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई के 20 सांसदों के साथ-साथ डीएमके के 22 सांसदों का भी समर्थन सरकार को मिलता है, तो संसद में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है. मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए के पास फिलहाल लगभग 293 सांसद हैं. इसमें टीएमसी से एनसीपीआई में गए 20 और डीएमके के 22 सांसद जुड़ते हैं, तो यह संख्या करीब 335 तक पहुंच जाएगी.
केंद्र सरकार को समय-समय पर वाईएसआरसीपी के 4 सांसदों और एक निर्दलीय सांसद का भी समर्थन मिलता रहा है. ऐसे में यह संख्या लगभग 340 तक पहुंच सकती है. हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ आने के बाद यदि इन्हें भी एनडीए के समर्थन में जोड़ा जाए तो गठबंधन की ताकत करीब 346 सांसदों तक पहुंच सकती है.
शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद भी सरकार का समर्थन करते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 354 सांसदों तक पहुंच सकता है. ऐसे में उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल के लिए केवल छह और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. उद्धव ठाकरे के तीन सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो फिर ये नंबर 357 पहुंच जाएगा और उसे सिर्फ तीन सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. अब देखना है कि सरकार क्या महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को पेस कर पास कराने में कामयाब हो पाएगी?
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