शामली। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने शामली कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। उन्होने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित ऐसे किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का विरोध किया, जिससे भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र, एमएसपी व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। भाकियू जिलाध्यक्ष सांता प्रधान के नेतृत्व में किसान कलक्ट्रेट में पहुंचे। कलक्ट्रेट सभागार के बाहर परिसर में ही धरने पर बैठ गए। किसानों ने कृषि मजदूरों और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग की।
किसानों का कहना था खेती की बढ़ती लागत, फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिलना, गन्ना भुगतान में देरी, खाद की कमी और प्राकृतिक आपदाओं से किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसानों ने सभी फसलों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद कानून लागू करने की मांग की। इसके अलावा गन्ने का न्यूनतम मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, लंबित गन्ना भुगतान ब्याज सहित कराने, किसानों एवं कृषि मजदूरों की संपूर्ण ऋण माफी और ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। किसान नेताओं ने कृषि कार्य के लिए निशुल्क बिजली, घरेलू एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट निशुल्क बिजली देने, स्मार्ट मीटर व्यवस्था और बिजली निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग भी की। उन्होंने डीएपी, यूरिया सहित अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग उठाई। ज्ञापन में बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करने, मनरेगा में 200 दिन का रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने सहित कई मांगें शामिल रहीं। भाकियू पदाधिकारियों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित ऐसे किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का विरोध किया, जिससे भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र, एमएसपी व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने कहा कि कृषि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उक्त आशय का एक ज्ञापन डीएम को सौंपा। साथ ही किसानों का कहना था कि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इस अवसर पर मास्टर जाहिर, विदेश मलिक, आशीष चौधरी, देवराज पहलवान, कुलदीप पंवार, नौशाद, आदि मौजूद रहे।
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