अयोध्या, काशी, जगन्नाथ पुरी… हर तरफ दिखी न्यू ईयर की धूम, 2025 के पहले दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ – Aaj Tak

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नए साल की शुरुआत के साथ ही देशभर के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. श्रद्धालुओं ने नए साल का स्वागत पूजा-अर्चना और भगवान का आशीर्वाद लेकर किया. प्रसिद्ध मंदिरों जैसे वाराणसी के काशी विश्वनाथ, जयपुर के गोविंददेव जी, ओडिशा के जगन्नाथ पुरी और दिल्ली के कालकाजी मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें सुबह से ही लग गईं. पर्यटकों के मामले में अयोध्या ने आगरा को पीछे छोड़ दिया. देश के बड़े मंदिरों में नए साल के मौके पर पैर रखने की भी जगह नहीं है.
वर्ष 2025 की पहली तारीख पर भारत के लोगों ने मन्दिरों में हिन्दू देवी-देवताओं के दर्शन करने का एक नया रिकॉर्ड बनाया है. 1 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में 5 लाख से ज्यादा लोगों ने दर्शन किए हैं. तो वहीं, काशी विश्वनाथ मन्दिर में 7 लाख, उज्जैन के महाकाल मन्दिर में 6 लाख, आंध्र प्रदेश के श्री तिरुपति मंदिर में 4 लाख, ओडिशा के श्री ”जगन्नाथ” पुरी मंदिर में 5 लाख और हरिद्वार में गंगा नदी के घाटों पर 3 लाख लोग पहुंचे हैं.
देशभर के मंदिरों में आई ये भीड़ दो बातें बताती है. पहली बात- भारत के लोग नए साल पर सिर्फ पार्टी नहीं करते. दूसरी- लोगों में ऐसा विश्वास है कि अगर वो नए साल की शुरुआत देवी-देवताओं के आशीर्वाद से करेंगे तो पूरा साल उनके लिए शुभ रहेगा. 
ताजमहल से ज्यादा लोग राम मन्दिर में दर्शन को उमड़े
इस साल ‘ताज-महल’ का दीदार करने वाले लोगों की संख्या 16 करोड़ 70 लाख रही, जबकि अयोध्या के राम मन्दिर में दर्शन करने वाले लोगों की संख्या 18 करोड़ 10 लाख रही. ये संख्या ताजमहल के मुकाबले 1 करोड़ 40 लाख ज्यादा है. भारत के अब तक के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब ताजमहल से ज्यादा लोग किसी मन्दिर का दर्शन करने आए हैं. इस सूची में काशी विश्वनाथ मन्दिर भी है, जहां वर्ष 2024 में 8 करोड़ 30 लाख, आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति मन्दिर में ढाई करोड़, अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर में 3 करोड़ और अजमेर शरीफ की दरगाह में 73 लाख लोग आए. बता दें कि ये आंकड़े अलग-अलग अनुमानों पर आधारित हैं.
गंगा आरती के साथ नए साल का स्वागत
हमारे देश में नए साल के मौके पर ये बताने की परंपरा रही है कि सिडनी के Opera house, New York के Times Square या ”दुबई” के बुर्ज खलीफा पर नए साल का किस तरह से स्वागत किया गया. लेकिन लगातार दूसरे साल ऐसा हुआ है, जब दुनिया के मीडिया में इस बात की चर्चा हो रही है कि भारत में नए साल का स्वागत अलग-अलग स्थानों पर गंगा आरती के साथ हुआ है.
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