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नवी मुंबई की एक सरकारी आंगनवाड़ी में दो साल की मासूम बच्ची की बेरहमी से पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली. वीडियो में एक महिला बच्ची को लात और थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रही है. बच्ची मारपीट के दौरान सीढ़ी से नीचे गिर जाती है. वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि बच्ची को पीटने वाली महिला आंगनवाड़ी की कर्मचारी है. हालांकि पुलिस की जांच में मामला पूरी तरह अलग निकला. पुलिस के मुताबिक, बच्ची को पीटने वाली कोई आंगनवाड़ी कर्मचारी नहीं, बल्कि उसकी अपनी मां थी. यह घटना इसी सप्ताह नवी मुंबई के नांदगांव गांव स्थित सरकारी आंगनवाड़ी में हुई, जो पनवेल सिटी पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है.
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और उसकी सत्यता की जांच शुरू की. जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची और उसके परिवार का पता लगाया. पूछताछ में सामने आया कि बच्ची की मां अपनी दो साल की बेटी के बार-बार इधर-उधर घूमने और शांत होकर नहीं बैठने से नाराज हो गई थी. गुस्से में उसने बच्ची की पिटाई कर दी. वहां मौजूद एक व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
माता-पिता को बुलाकर दी गई चेतावनी
घटना सामने आने के बाद पुलिस ने बच्ची का मेडिकल परीक्षण भी कराया ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे कोई गंभीर या अंदरूनी चोट तो नहीं लगी है. पुलिस के अनुसार मेडिकल जांच में यह सुनिश्चित किया गया कि बच्ची की हालत सामान्य है और उसे किसी गंभीर चोट की जानकारी नहीं मिली. पुलिस ने बच्ची के माता-पिता को थाने बुलाकर पूछताछ की. दोनों की काउंसलिंग की गई और भविष्य में बच्चे के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार दोबारा नहीं करने की सख्त चेतावनी दी गई. पुलिस ने बताया कि इस मामले में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है.
महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि विभाग ने वीडियो सामने आते ही तुरंत संज्ञान लिया और संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी को मौके पर जांच के लिए भेजा. उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि के गलत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें. मंत्री ने कहा कि वायरल पोस्ट में जिस महिला को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बताया जा रहा है, वह दावा गलत और भ्रामक है.
आंगनवाड़ी कर्मचारियों का किया बचाव
अदिति तटकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में लाखों बच्चों की देखभाल करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपना काम करती हैं. ऐसे में बिना किसी तथ्य के उन पर आरोप लगाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि गलत जानकारी फैलाने से उन कर्मचारियों की छवि भी प्रभावित होती है, जो वर्षों से बच्चों और माताओं की सेवा कर रहे हैं.
वीडियो से पहले बना गलत नैरेटिव
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही महिला को आंगनवाड़ी कर्मचारी बताकर कई तरह के दावे किए जाने लगे. लेकिन पुलिस की जांच में सामने आया कि बच्ची के साथ मारपीट करने वाली उसकी अपनी मां थी. जांच के बाद पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग दोनों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि जरूर करें.
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