'आई थी, बैठकर रो रही थी…' बचते बचाते जहां पहुंची अतुल की सास, वहां के मैनेजर ने बताई पूरी बात – Aaj Tak

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बीते दिनों  बेंगलुरू में काम कर रहे 34 साल के AI इंजीनियर इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या (Atul Subhash Suicide Case) ने देश को हिला कर रखा दिया है.अतुल ने खुद पर दहेज उत्पीड़न से लेकर हत्या समेत 9 मामले दर्ज करने से लेकर सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप अपनी पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा, पत्नी के भाई अनुराग और पत्नी के चाचा सुशील पर लगाया है. ये लोग जौनपुर के रहने वाले हैं.
जौनपुर पहुंची बेंगलुरु पुलिस की टीम
ऐसे में जांच करने के लिए सब इंस्पेक्टर रंजीत कुमार के नेतृत्व में बेंगलुरु पुलिस की एक टीम गुरुवार को जौनपुर पहुंची है.वहीं अतुल सुभाष के ससुराल वाले बुधवार देर रात ही घर में ताला लगाकर वहां से निकलते दिखाई पड़े. निकिता सिंघानिया की मां निशा सिंघानिया और उनका साला रात के अंधेरे में अपने घर पर ताला लगाकर जाती हुई दिखाई दिए. इस दौरान मीडिया के सवालों से बचती हुई अतुल की सास निशा सिंघानिया का वीडियो भी सामने आया था. वह रिपोर्टर के हाथ जोड़ रही थी, लेकिन किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और फिर वो बाइक पर बैठकर चली गई. 
घर में ताला लगाकर कहां गईं निकिता की मां
सवाल है कि इसके बाद वे कहां गई? ताजा जानकारी के अनुसार देर रात घर से बाइक से निकलने के बाद निकिता की मां और भाई एक निजी होटल में कुछ देर रुके थे. यहां वह रिसेप्शन पर पहुंचकर सोफे पर थोड़ी देर बैठे रहे.
‘यहां बैठकर रो रही थी’
मैनेजर के मुताबिक, वह काफी उदास थीं और बेठकर रो रही थीं. इसके बाद होटल मैनेजर ने उन्हें गरम पानी ऑफर किया. कुछ देर बाद वह फिर होटल के बाहर एक गाड़ी आई और  निकिता की मां उसमें बैठकर कहीं और निकल गईं. उनके होटल में घुसने का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है.
इससे पहले निकिता की मां ने आजतक से बात करते हुए अपनी बेटी और परिवार पर लगाए गए उत्पीड़न के सभी आरोपों को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था, ‘ये जो आरोप लगे हैं, सारे निराधार है. मैं सारे सबूत दुनिया के सामने रखूंगी. अतुल सुभाष ने अपना फ्रस्ट्रेशन हम पर निकाला है. मेरी बेटी कभी किसी को आत्महत्या के लिए नहीं बोल सकती.’
अतुल छोड़ गए थे 24 पन्नों का सुसाइड नोट
बताते चलें कि बिहार के समस्तीपुर के अतुल सुभाष ने खुदकुशी से पहले 24 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा. इसके अलावा 81 मिनट का वीडियो भी बनाया था जो वाकई उनकी त्रस्त मानसिक स्थिति को साफ दिखाता है. इनमें उन्होंने अपनी पूरी व्यथा कथा कह डाली है. उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा, ‘मेरे ही टैक्स के पैसे से ये अदालत, ये पुलिस और पूरा सिस्टम मुझे और मेरे परिवार और मेरे जैसे और भी लोगों को परेशान करेगा. और मैं ही नहीं रहूंगा तो ना तो पैसा होगा और न ही मेरे माता-पिता, भाई को परेशान करने की कोई वजह होगी.’
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