आज का एक्सप्लेनर: ट्रम्प ने चीन-कनाडा पर तलवार चलाई, क्या अगला नंबर भारत का; टैरिफ ने दुनिया में कैसे मचाई … – Dainik Bhaskar

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका की तमाम दिक्कतों के लिए एक पसंदीदा सॉल्यूशन खोज लिया है- टैरिफ। 1 फरवरी को ट्रम्प ने मेक्सिको और कनाडा से आने वाले सामान पर 25% और चीन के सामान पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। एक दिन बाद यानी रविवार 2 फरव
टैरिफ क्या है, ट्रम्प मित्र देशों पर भी क्यों लगा रहे हैं, इससे अमेरिका को फायदा या नुकसान और भारत अब तक कैसे बचा हुआ है, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल 1: टैरिफ क्या है जो ट्रम्प एक के बाद एक देशों पर लागू कर रहे हैं?
जवाब: टैरिफ एक तरह का बॉर्डर फीस या टैक्स होता है, जो कोई भी देश विदेशों से अपने यहां आने वाले सामान पर लगाता है। इसे घटा-बढ़ाकर ही देश आपस में व्यापार को कंट्रोल करते हैं।
कोई देश टैरिफ बढ़ाता है तो उसकी घरेलू मार्केट में विदेशी सामान महंगे हो जाते हैं। इससे सरकार की कमाई भी बढ़ती है। साथ ही विदेशी सामान की खपत कम होती है और घरेलू कंपनियों के सामान की खपत बढ़ती है। इस तरह सरकार घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा देती है।
कोई देश एकतरफा टैरिफ न बढ़ा दे, इसके लिए सभी देश विश्व व्यापार संगठन के साथ बातचीत करके एक रेट तय करते हैं।
अमेरिका को अपनी मजबूत करेंसी यानी डॉलर के चलते बाकी देशों से खरीदे प्रोडक्ट्स सस्ते पड़ते हैं। इसलिए अमेरिका एक्सपोर्ट की जगह ज्यादा सामान इम्पोर्ट करता है। इसी के चलते कई देशों के विदेशी व्यापार में अमेरिका बड़ी भूमिका निभाता है।
सवाल 2 : अब तक ट्रम्प किन देशों पर टैरिफ लगा चुके हैं?
जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 फरवरी को कनाडा और मेक्सिको पर 25% और चीन पर एक्स्ट्रा 10% टैरिफ का ऐलान किया है। जबकि ये देश अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले देशों की लिस्ट में टॉप 3 में हैं।
सवाल 3: अमेरिका ने इन देशों पर टैरिफ क्यों लगाया?
जवाब: अमेरिका के इस फैसले की दो प्रमुख वजहें हैं-
1. अपना व्यापार घाटा कम करना: आपस में व्यापार करने वाले वाले दो देशों में से अगर एक देश दूसरे देश से ज्यादा सामान खरीदता है, तो इस अंतर को उस देश का ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा कहते हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 फरवरी को टैरिफ बढ़ाने की घोषणा करते हुए हुए कहा था, ‘हमारी धमकियां सिर्फ सौदेबाजी के लिए नहीं हैं। इन तीनों देशों के चलते हमारा बड़ा व्यापारिक घाटा होता है।’
असल में पूरी दुनिया का ज्यादातर व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है। दूसरी करेंसीज की तुलना में डॉलर की कीमत ज्यादा होने के चलते अमेरिका को बाकी देशों से खरीदे प्रोडक्ट्स सस्ते पड़ते हैं। इसलिए अमेरिका एक्सपोर्ट की बजाय ज्यादा सामान इम्पोर्ट करता है। ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2024 में अमेरिका ने लगभग 30 लाख करोड़ रुपए (352 बिलियन डॉलर) से ज्यादा का इम्पोर्ट किया है।
रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (RIS) के मुताबिक, चीन, मेक्सिको और कनाडा से अमेरिका को सबसे ज्यादा व्यापार घाटा झेलना पड़ता है। 2023 में अमेरिका को चीन से 30.2%, मेक्सिको से 19% और कनाडा से 14.5% व्यापार घाटा हुआ। कुल मिलाकर ये तीनों देश 2023 में अमेरिका के करीब 670 अरब डॉलर के व्यापार घाटे के लिए जिम्मेदार हैं।
विदेशी मामलों के जानकार प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक,
ट्रम्प का फोकस अमेरिका का घरेलू व्यापार बढ़ाने पर है। वह टैरिफ लगाकर अमेरिका का व्यापार घाटा कम करना चाहते हैं।
2. अमेरिका के इन देशों से रिश्ते खराब हैं: बीते दिनों अमेरिका ने मेक्सिको पर आरोप लगाया था कि उसके ड्रग्स के डीलर्स के साथ संबंध हैं और वह उनके जरिए अमेरिका में ड्रग्स पहुंचा रहा है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने यहां तक कहा कि कनाडा, मेक्सिको और चीन से हमारे देश में अवैध फेंटेनाइल ड्रग और हथियार पहुंच रहा है, जिससे लाखों अमेरिकी मारे गए हैं।
असल में फेंटेनाइल एक सिंथेटिक ड्रग है। इसका ओवरडोज दिमाग में ऑक्सीजन की सप्लाई को कम कर देता है। इससे इंसान कोमा में जा सकता है, मौत भी हो सकती है।
वहीं ट्रेड के मामले में चीन अमेरिका सबसे बड़ा कॉम्पिटीटर है। राजन कुमार कहते हैं, ‘चीन और अमेरिका के बीच व्यापार के अलावा राजनीतिक मतभेद भी हैं। अमेरिका चीन को एक दुश्मन की तरह देखता है।’
सवाल 4: ट्रम्प के फैसले के बाद कनाडा, मेक्सिको जैसे देशों ने क्या एक्शन लिया?
जवाब: आज यानी 4 फरवरी से कनाडा पर अमेरिकी टैरिफ लागू होगा। 1 फरवरी को ट्रम्प के ऐलान के तुरंत बाद कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले सामान पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया था। कनाडाई पीएम ट्रूडो ने कहा कि अमेरिकी शराब और फलों के आयात पर 4 फरवरी से नए टैरिफ लागू होंगे।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने भी कहा कि उन्होंने अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लागू करने के निर्देश दे दिए हैं। हालांकि आज यानी 4 जनवरी से लागू हो रहे अमेरिकी टैरिफ से एक दिन पहले मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम और ट्रम्प के बीच एक समझौता हो गया। इसके तहत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा पर भी कई समझौते हुए हैं। ट्रम्प ने कहा कि 10 हजार सैनिकों को अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर प्रवासियों और अवैध ड्रग्स के प्रवाह को रोकने के लिए तैनात किया जाएगा।
वहीं चीन ने ट्रम्प के फैसले को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चुनौती देने का फैसला किया है। चीन ने कहा है कि अमेरिका का टैरिफ WTO के नियमों का उल्लंघन है। तनाव बढ़ाने की जगह बातचीत करके सहयोग मजबूत करना चाहिए।
सवाल 5: क्या अमेरिका के इस टैरिफ वॉर में अगला नंबर भारत का है?
जवाब: अब तक ट्रम्प ने सीधे-सीधे भारत का नाम नहीं लिया है। हालांकि इससे पहले उन्होंने कई बार ब्रिक्स देशों पर हाई टैरिफ लगाने की धमकी दी है। चीन की तरह ही भारत और ब्राजील जैसे देश ब्रिक्स का हिस्सा हैं।
ट्रम्प का कहना है कि अगर ब्रिक्स देशों ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से डॉलर को हटाने की कोशिश की तो वह इन पर 100% टैरिफ लगा देंगे।
ट्रम्प भारत की तरफ से अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर ज्यादा टैरिफ लगाने की शिकायत भी कर चुके हैं।
वहीं अमेरिका को जिन देशों से सबसे ज्यादा व्यापार घाटा होता है, उस लिस्ट में भारत 9वें नंबर है।
2024 में अमेरिका के व्यापार घाटे में भारत की हिस्सेदारी करीब 3.2% थी। अमेरिका को भारत से व्यापार में 3.5 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। ऐसे में भारत पर भी अमेरिकी टैरिफ बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
सवाल 6: भारत अब तक अमेरिका के टैरिफ से कैसे बचा हुआ है?
जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भले ही अमेरिका ने ब्रिक्स देशों पर टैरिफ लगाने की बात की हो, लेकिन भारत अमेरिका को नाराज करने वाला कोई कदम नहीं उठा रहा है। इसलिए उसके खिलाफ अमेरिका भी कोई एकतरफा एक्शन नहीं लेगा।
भारत ने ट्रम्प के टैरिफ से बचने के लिए अपने यहां कई अमेरिकी सामानों पर टैरिफ कम करना शुरू कर दिया है। 1 फरवरी को पेश हुए बजट में भारत ने अमेरिका से आने वाले सामान जैसे- 1600 सीसी से कम इंजन की मोटरसाइकिल, सैटेलाइट के लिए ग्राउंड इंस्टॉलेशन और सिंथेटिक फ्लेवरिंग एसेंस जैसे सामानों पर टैक्स घटा दिए हैं।
इसके अलावा भारत ‘ब्रिक्स की अपनी करेंसी’ की चर्चा में खुले तौर पर शामिल नहीं है। दिसंबर 2024 में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम नहीं करना चाहता है, साथ ही भारत का ‘ब्रिक्स करेंसी’ लाने का भी कोई प्रस्ताव नहीं हैं।
राजन कुमार कहते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच कोई जियोपॉलिटिकल मुद्दा नहीं है। अमेरिका भारत को एक पार्टनर की तरह देखता है। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय अप्रवासियों के मुद्दे या किसी व्यापारिक मामले पर भारत, अमेरिका से बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने पर काम कर रहा है। इसलिए भारत पर टैरिफ जैसा खतरे की आशंका नहीं है।
सवाल 7: क्या मोदी से मीटिंग के बाद ट्रम्प कोई फैसला ले सकते हैं?
जवाब: बीते दिनों प्रेसिडेंट ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच फोन पर बात हुई थी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 27 जनवरी को ट्रम्प ने कहा, ‘मैंने आज सुबह उनसे लंबी बातचीत की। वह अगले महीने व्हाइट हाउस आने वाले हैं। भारत के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं।’
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा था कि अवैध प्रवासियों के मामले पर पीएम मोदी से बात हुई। भारत वही करेगा जो सही होगा।’
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि मोदी अमेरिका कब जा रहे हैं, लेकिन यह कहा जा रहा है कि वह 10-11 फरवरी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्शन समिट के लिए पेरिस जाने वाले हैं, इसके बाद ही वह वाशिंगटन जाएंगे।
प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक,
दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच मीटिंग के दौरान व्यापरिक साझेदारी और अवैध प्रवासियों जैसे मुद्दों पर सहमति बन सकती है। भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच एक अच्छी मकैनिज्म है। अमेरिका भारत पर टैरिफ लगाने जैसा निर्णय नहीं लेगा, लेकिन दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अमेरिका का व्यापार घाटा कम करने और कुछ सामानों पर टैक्स घटाने-बढ़ाने को लेकर नेगोशिएशन हो सकता है।
सवाल: क्या डॉलर की ताकत बनाए रखने के लिए ट्रम्प, ब्रिक्स देशों पर टैरिफ लगाना चाहते हैं?
जवाब: BRICS में भारत, रूस और चीन समेत 9 देश शामिल हैं। 22 से 24 अक्टूबर 2024 को रूस में हुई मीटिंग के दौरान BRICS देशों ने ग्लोबल ट्रेड के लिए डॉलर के बजाय अपना पेमेंट सिस्टम बनाने या किसी दूसरे देश की करेंसी का इस्तेमाल करने को लेकर चर्चा की थी। तब भारत ने भी BRICS देशों को पेमेंट सिस्टम के लिए अपना UPI देने की पेशकश की थी।
ये डी-डॉलराइजेशन नए तरह से ग्लोबल इकोनॉमी और मार्केट को आकार देगा। इसीलिए ट्रम्प डी-डॉलराइजेशन को अमेरिका के लिए बड़ा खतरा मानते हैं। 31 जनवरी को ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा,
BRICS देश डॉलर से हटने की कोशिश करते रहेगें तो हम सिर्फ देखते नहीं रहेंगे।
हालांकि प्रोफेसर राजन कुमार कहते हैं, ‘ट्रम्प ने अनजाने में ये बयान दिए हैं। वह सिर्फ दबाव बनाना चाहते हैं। ब्रिक्स देश फिलहाल कोई करेंसी लाने लाने की नहीं सोच रहे हैं। भारत, रूस जैसे देश डॉलर की बजाय सीधे एक-दूसरे की करेंसी में ट्रेड कर रहे हैं।’
सवाल 8: क्या चीन, कनाडा जैसे देशों पर टैरिफ लगने से भारत को फायदा होगा?
जवाब: एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीनी प्रोडक्ट्स पर 10% टैरिफ लगाने से अमेरिकी मार्केट में भारतीय सामान की बिक्री बढ़ेगी।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की एक एनालिसिस के मुताबिक, जब ट्रम्प के पहले कार्यकाल में चीन के साथ टैरिफ वॉर शुरू हुआ था, तो इससे व्यापारिक फायदा पाने वाले देशों में भारत चौथे नंबर पर था।
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा, ‘अमेरिका के टैरिफ लगाने से चीन और उसके व्यापारिक सहयोगी देश जैसे- दक्षिण कोरिया और जापान भी प्रभावित होंगे। लेकिन भारत को इससे फायदा होगा, क्योंकि अमेरिकी बाजार में उसे चीन जैसे देशों की कंपनियों से कम टक्कर मिलेगी। इसके अलावा ऐसी कंपनियां जिनकी चीन और भारत दोनों जगह फैक्ट्रियां हैं, उन्हें भारत में ज्यादा ऑर्डर मिलने लगेंगे।’
सवाल 9: अगर भारत पर अमेरिकी ने टैरिफ लगाया तो इसका क्या असर होगा?
जवाब: प्रोफेसर राजन कुमार इस संभावना से पूरी तरह इनकार करते हैं कि सभी ब्रिक्स देशों पर अमेरिका एक साथ 100% टैरिफ लगा सकता है। वह कहते हैं, ‘ब्रिक्स में भारत और UAE जैसे कई देशों से अमेरिका के बहुत अच्छे संबंध हैं। ब्राजील जैसे जिन देशों से उसके संबंध अच्छे नहीं हैं, उन पर भले ही अलग से कुछ टैरिफ लगाया जाए।’
फिर भी अगर मान लें कि अमेरिका भारत पर 100% टैरिफ लगा दे तो इससे भारत को नुकसान होगा। भारत अपना 17% से ज्यादा विदेशी व्यापार अमेरिका से करता है। अमेरिका भारत के एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स जैसे फल और सब्जियों का सबसे बड़ा खरीदार है। 2024 में अमेरिका ने भारत से 18 मिलियन टन चावल भी इम्पोर्ट किया है। अगर अमेरिका ने भारत पर 100% टैरिफ लगाया तो अमेरिकी बाजारों में भारतीय प्रोडक्ट्स भी दोगुनी कीमत पर बिकने लगेंगे। इससे अमेरिकी जनता के बीच इसकी डिमांड कम हो जाएगी।
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