इंजन बंद… जहाज समुद्र में रुका था, तभी बरसा अमेरिकी हमला! ओमान में मारे गए 3 भारतीय नाविकों की मौत पर बड़ा – India.Com

Published By: Tanuja Joshi | Updated: Jul 22, 2026, 11:03 AM
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय अमेरिकी एयरस्ट्राइक हुई, उस वक्त Settebello नाम का तेल टैंकर अपनी यात्रा पर आगे नहीं बढ़ रहा था. जहाज का इंजन बंद था और वो ओमान की खाड़ी में समुद्र की लहरों के साथ बहते हुए दूसरे जहाज का इंतजार कर रहा था, ताकि समुद्र के बीच तेल का ट्रांसफर किया जा सके. रिपोर्ट में बताया गया है कि जहाज कई दिनों से उसी इलाके में मौजूद था और उस पर करीब 26,000 मीट्रिक टन बिटुमेन लदा हुआ था. इस नई जानकारी ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि पहले यह माना जा रहा था कि जहाज सामान्य रूप से अपनी यात्रा कर रहा था. अब सामने आए तथ्यों से साफ होता है कि हमला ऐसे समय हुआ जब जहाज किसी सक्रिय समुद्री ऑपरेशन के बजाय प्रतीक्षा की स्थिति में था.
अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नागरिकों की जान चली गई. इनमें मुख्य अभियंता सुरेश पटनाला, मैकेनिक शिवानंद चौरसिया और 23 साल के ट्रेनी कैडेट आदित्य शर्मा शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक हमले के समय मुख्य अभियंता और मैकेनिक अपनी ड्यूटी शुरू करने के लिए इंजन रूम में पहुंचे थे। वहीं प्रशिक्षु कैडेट इंजन रूम के पास स्थित कमरे में नाश्ता कर रहे थे। इसी दौरान एयरस्ट्राइक हुई और मिसाइल सीधे इंजन रूम वाले हिस्से में लगी. विस्फोट इतना तेज था कि तीनों की मौके पर ही मौत हो गई. घटना ने भारतीय समुद्री समुदाय को झकझोर दिया है और ये सवाल भी उठ रहा है कि अगर जहाज असर में रुका हुआ था तो इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई क्यों की गई और क्या इससे पहले सभी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया था.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि हमले से पहले जहाज को कई बार चेतावनी दी गई थी. सेना के मुताबिक रेडियो के माध्यम से लगभग 60 मौखिक संदेश भेजे गए और कई बार लड़ाकू विमानों की उड़ान तथा फ्लेयर के जरिए भी संकेत दिए गए. अमेरिकी पक्ष का दावा है कि जहाज के क्रू ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया और सहयोग नहीं किया. इसके अलावा अंतिम संदेश में कथित तौर पर इंजन रूम खाली करने के लिए 15 मिनट का समय भी दिया गया था. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध खुफिया जानकारी के आधार पर जहाज ईरानी तेल की ढुलाई कर रहा था. हालांकि जहाज पर किसी प्रकार का अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं था. ऐसे में कार्रवाई के औचित्य और चेतावनी प्रक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है.
जहाज पर मौजूद एक प्रशिक्षु कैडेट का बयान अमेरिकी सेना के दावों से बिल्कुल अलग है. कैडेट ने बताया कि हमले से पहले वो करीब तीन घंटे तक ब्रिज पर रेडियो ड्यूटी कर रहा था, लेकिन उसे किसी भी प्रकार की चेतावनी सुनाई नहीं दी. उसके अनुसार न तो रेडियो पर कोई स्पष्ट संदेश मिला और न ही ऐसी कोई सूचना दी गई, जिससे क्रू इंजन रूम खाली कर पाता. यही वजह है कि अब इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं. एक तरफ अमेरिकी सेना लगातार चेतावनी देने की बात कह रही है, जबकि जहाज पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी इससे इनकार कर रहे हैं. यही विरोधाभास इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग को और मजबूत करता है और यह जानना जरूरी हो जाता है कि वास्तविक घटनाक्रम क्या था.
रिपोर्ट के अनुसार, Settebello टैंकर में लगभग 26,000 मीट्रिक टन बिटुमेन लदा हुआ था। बिटुमेन पेट्रोलियम से बनने वाला एक गाढ़ा पदार्थ है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से सड़कों के निर्माण और मरम्मत में किया जाता है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जहाज पहले भी कई सालों से ईरानी तेल से जुड़े समुद्री कारोबार का हिस्सा रहा था. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना के समय जहाज किसी अमेरिकी प्रतिबंध लिस्ट में शामिल नहीं था. ये तथ्य भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि आमतौर पर प्रतिबंधित जहाजों के खिलाफ अलग तरह की कार्रवाई की जाती है. ऐसे में जहाज की कानूनी स्थिति और उस पर की गई सैन्य कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं.
इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत होने के कारण यह मामला भारत के लिए बेहद संवेदनशील बन गया है. भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में से एक है और हजारों भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर काम करते हैं. ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की मौत चिंता का विषय बन जाती है. ये घटना समुद्री सुरक्षा, युद्ध क्षेत्रों में काम कर रहे नागरिक कर्मचारियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन पर भी सवाल खड़े करती है. भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए युद्ध प्रभावित समुद्री मार्गों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल और अधिक मजबूत किए जाने की जरूरी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि Settebello पिछले लगभग पांच सालों से ईरानी तेल की ढुलाई से जुड़े समुद्री नेटवर्क का हिस्सा रहा था. बताया गया कि उसने चीन से यात्रा शुरू की और जून के पहले हफ्ते में समुद्र के बीच कई जहाजों से तेल लिया. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि इस तेल का स्रोत ईरान था. हालांकि, ये भी सामने आया है कि जहाज किसी अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल नहीं था. यही वजह है कि इस पूरे मामले को केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि क्षेत्रीय भू-राजनीति और ऊर्जा व्यापार से भी जोड़कर देख रहे हैं. इस घटना ने ईरान, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के बीच चल रहे तनाव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News