राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को 15 महीने के लंबे इंतजार के बाद हरजीत सिंह ग्रेवाल के रूप में नया अध्यक्ष मिला है। यह नियुक्ति पंजाब में 2027 के विधानसभा …और पढ़ें
हरजीत सिंह ग्रेवाल (सोशल मीडिया)
हरजीत सिंह ग्रेवाल राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के नए अध्यक्ष नियुक्त।
15 महीने के लंबे इंतजार के बाद आयोग को मिला प्रमुख।
पंजाब 2027 विधानसभा चुनावों से पहले नियुक्ति राजनीतिक रूप से अहम।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) को आखिरकार 15 महीने के लंबे इंतजार के बाद अपना नया अध्यक्ष मिल गया है। वरिष्ठ भाजपा नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने मंगलवार को आयोग के अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया है। मोदी सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यक आयोग की कमान संभालने वाले ग्रेवाल दूसरे सिख अध्यक्ष हैं। इससे पहले इकबाल सिंह लालपुरा इस पद पर थे।
बता दें कि पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हरजीत सिंह ग्रेवाल की यह नियुक्ति राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। ग्रेवाल पंजाब से भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैं और राज्य में सिखों की एक मजबूत आवाज माने जाते हैं।
इस बात को ऐसे समझिए कि 1993 में आयोग के गठन के बाद से ज्यादातर मौकों पर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि ही इसके अध्यक्ष रहे हैं। तरलोचन सिंह (2003-2006) के बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में ही इकबाल सिंह लालपुरा और अब हरजीत सिंह ग्रेवाल को यह जिम्मेदारी दी गई है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 16 जुलाई को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी। नियम के मुताबिक, हरजीत सिंह ग्रेवाल का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से 3 साल का होगा। मंत्रालय ने कहा है कि उनकी नियुक्ति से अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण, सामाजिक-आर्थिक विकास और सशक्तिकरण के प्रयासों को नई गति मिलेगी।
गौरतलब है कि हरजीत सिंह ग्रेवाल के साथ-साथ आयोग में अन्य सदस्यों ने भी कार्यभार संभाला है। उपाध्यक्ष के तौर पर एस. मुनावारी बेगम, जो कि मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगी। सदस्य के तौर पर ग्लेन सूजा टिकलो जो कि ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे।
वहीं बर्जिस देसाई जो कि पारसी समुदाय का प्रतिनिधित्व संभाल रहे हैं, इन्होंने मार्च में पद संभाला था। बात अगर वर्तमान स्थिति की करें तो अध्यक्ष और तीन सदस्यों के आने के बाद भी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में अभी 3 पद खाली पड़े हैं, जिन्हें जल्द भरा जाना बाकी है।