Shubham Raja
Date: 27-09-26 16:36
Divyastra Mk1 Drone: काकेशस क्षेत्र में भारत के हथियारों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. आर्मेनिया पहले ही भारत से पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर खरीद चुका है. अब खबरों में दावा किया जा रहा है कि उसकी नजर भारत के ‘दिव्यास्त्र Mk1’ लॉयटरिंग म्यूनिशन पर भी है.
अगर यह संभावित डील आगे बढ़ती है तो इसका असर आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच चल रहे रणनीतिक तनाव पर पड़ सकता है. अजरबैजान की मीडिया में इस संभावित खरीद को लेकर चिंता जताई गई है और भारतीय हथियारों की क्षमता पर चर्चा की जा रही है.
अजरबैजान की मीडिया में दिव्यास्त्र को लेकर चर्चा
अजरबैजानी भाषा की मिलिट्री वेबसाइट Armiya.az ने दिव्यास्त्र को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट में इस बात पर चर्चा की गई है कि अगर यह सिस्टम आर्मेनिया की सेना में शामिल होता है तो क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर इसका क्या असर हो सकता है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिव्यास्त्र की बताई गई लंबी रेंज के कारण अजरबैजान के कई संभावित ठिकाने इसकी पहुंच में आ सकते हैं. इसी वजह से अजरबैजान में इस संभावित डील को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
वहीं, आर्मेनियाई मीडिया की कुछ रिपोर्टों में भी दावा किया गया है कि देश ने अलग-अलग देशों के ड्रोन और हथियार सिस्टम का परीक्षण किया है. इनमें भारतीय सिस्टम को लेकर भी सकारात्मक चर्चा सामने आई है.
क्या है दिव्यास्त्र Mk1?
दिव्यास्त्र Mk1 को लखनऊ की कंपनी होवरिट ने विकसित किया है. कंपनी इसे एक मल्टी-रोल ऑटोनोमस टैक्टिकल स्ट्राइक सिस्टम के तौर पर पेश करती है. बताई गई जानकारी के अनुसार, इस सिस्टम की अधिकतम रेंज करीब 500 किलोमीटर है और यह कई घंटे तक हवा में रह सकता है.
इसमें करीब 15 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता बताई गई है. यह सिस्टम केवल हमला करने के लिए ही नहीं, बल्कि निगरानी और टोह लेने जैसे मिशनों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
स्वार्म तकनीक क्या है?
दिव्यास्त्र Mk1 की एक खासियत इसका स्वार्म फीचर बताया जाता है. आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि एक समय में कई ड्रोन को एक साथ ऑपरेट किया जा सकता है. ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल किसी इलाके की निगरानी, लक्ष्य की पहचान और जरूरत पड़ने पर हमले के लिए किया जा सकता है. हालांकि किसी भी हथियार की वास्तविक क्षमता उसके इस्तेमाल के तरीके, ऑपरेशनल सिस्टम और दूसरी सैन्य सुविधाओं पर निर्भर करती है.
500 किलोमीटर की रेंज पर क्यों है चर्चा?
दिव्यास्त्र की बताई गई करीब 500 किलोमीटर की रेंज इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है. इतनी दूरी तक काम करने वाले सिस्टम को किसी देश की सैन्य रणनीति में अहम माना जा सकता है.
हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आर्मेनिया इसे कितनी संख्या में खरीदता है, कहां तैनात करता है और इसके साथ किस तरह का कमांड और कंट्रोल सिस्टम इस्तेमाल करता है. इसके अलावा खुफिया जानकारी, टारगेटिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हथियार के कॉन्फिगरेशन जैसे कई दूसरे फैक्टर भी इसकी क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं.
भारत-आर्मेनिया रक्षा संबंध हुए मजबूत
पिछले कुछ वर्षों में भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग बढ़ा है. आर्मेनिया भारत से पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर समेत कई रक्षा प्रणालियां हासिल कर चुका है. दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच दिव्यास्त्र Mk1 को लेकर सामने आई खबरों ने अजरबैजान का ध्यान भी खींचा है. हालांकि, इस संभावित खरीद को लेकर अंतिम आधिकारिक जानकारी का इंतजार है.
दिव्यास्त्र परिवार पर आगे भी काम जारी
होवरिट की ओर से दिव्यास्त्र परिवार के दूसरे वर्जन पर भी काम किए जाने की जानकारी सामने आई है. कंपनी से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, दिव्यास्त्र Mk3 नाम के जेट-पावर्ड लॉयटरिंग म्यूनिशन ने हाल ही में अपनी पहली उड़ान पूरी की है.
इससे साफ है कि कंपनी इस तकनीक को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है. अगर आर्मेनिया और भारत के बीच दिव्यास्त्र को लेकर कोई डील होती है, तो इससे दोनों देशों के रक्षा सहयोग को एक नया आयाम मिल सकता है.
ये भी पढ़ें- पाकिस्तान को मिला तुर्की का किलर ड्रोन, क्या भारत के एयर डिफेंस को भेद पाएगा Baykar K2? जानें ताकत
भारत 24 लाइव — भारत का विश्वसनीय हिंदी समाचार पोर्टल। ताज़ा खबरें, विश्लेषण, वीडियो।
लाइव भारत 24 ऐप डाउनलोड करें और लाइव समाचार देखें