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एक समय था जब बॉलीवुड में भी दमदार कॉमेडी फिल्में बना करती थीं. साल 2000 से 2010 का वो समय, जब एक से बढ़कर एक कॉमेडी फिल्मों ने दस्तक दी और जनता का खूब प्यार पाया. लेकिन फिर ये दौर धीरे-धीरे गायब हुआ, रोमांटिक और एक्शन फिल्मों ने अपने पैर पसारने शुरू किए. आजकल तो धुरंधर, एनिमल, टॉक्सिक टाइप ‘वॉइलेंट’ फिल्मों का चलन है. ऐसे में अब एक ढंग की कॉमेडी फिल्म देखना नामुमकिन सा हो गया है.
कुणाल की कॉमेडी का जादू
बॉलीवुड ने पिछले कुछ समय में अच्छी कॉमेडी फिल्में बनाने की कोशिश की है. ये कोशिश ज्यादातर अक्षय कुमार और अजय देवगन की तरफ से दिखी. हालांकि उनकी फिल्में भी अपनी छाप छोड़ने में नाकामयाब रहीं. मगर कुणाल खेमू इकलौते ऐसे कलाकार रहे, जिन्होंने अपनी डेब्यू डायरेक्शन फिल्म मडगांव एक्सप्रेस से सबको अपना दीवाना बनाया. साल 2024 में आई वो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चली. लोग उसे देख खूब हंसे, और फिल्म को कल्ट घोषित कर गए.
कुणाल खेमू ने मडगांव एक्सप्रेस से साबित किया कि उनके अंदर भी अच्छा ह्यूमर है जिसे वो पर्दे पर ला सकते हैं. इसी कोशिश में उनकी नई फिल्म वाइब भी आई है, जो एक स्पाई-कॉमेडी मूवी है. बीते दिन सिनेमाघरों में ये फिल्म रिलीज हुई. मैंने इसे एक ऐसे थिएटर में देखा जहां ना ज्यादा ऑडियंस थी, और ना अच्छी-साफ स्क्रीन. लेकिन क्या इसके बावजूद, कुणाल मुझे एंटरटेन करने में कामयाब हुए? क्या इस फिल्म से मजेदार ‘वाइब’ मिली? चलिए विस्तार से बात करते हैं.
वाइब ने दिलाया मजा?
सबसे पहले फिल्म की कहानी से शुरुआत करते हैं. मुंबई की एक बड़ी टेक कंपनी में काम करने वाला बग्स (स्पर्श श्रीवास्तव), अपने जिगर-जान दोस्त ‘बड़े भइया’ हार्दिक (कुणाल खेमू) की बड़ी चिंता करता है. वो उसके लिए सबकुछ करता है. यहां तक कि उसे अपनी कंपनी में नौकरी दिला देता है. मगर हार्दिक एक ऐसा इंसान है, जो गलत समय में गलत जगह पहुंच जाता है और सबको मुसीबत में डाल देता है.
हार्दिक नासमझी में एक ऐसी मुसीबत में फंस जाता है, जहां से वो सिर्फ एक शर्त पर निकल सकता है. उसे बिना किसी एक्सपीरियंस इंडिया के लिए स्पाई यानी जासूस बनकर काम करना पड़ता है. ये जासूसी दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी के लिए होगी, जिसमें ना चाहते हुए भी बग्स को भी शामिल होना पड़ता है. दोनों वैसे तो ‘बहुमूल्य गधे’ हैं, लेकिन तब भी मैडम H (प्रीति जिंटा) को उन्हीं से अपना काम निकलवाना पड़ता है. अब क्या हार्दिक और बग्स, देश पर आए खतरे को टाल पाएंगे? यही वाइब का असली मसला है.
कॉमेडियन से कम नहीं ये जासूस
अब ये स्टोरी पन्ने पर बड़ी साधारण सी लगती होगी. आप सोच रहे होंगे कि इसमें स्पाई-यूनिवर्स जैसा ट्विस्ट एंड टर्न होगा, बहुत सारा एक्शन और कॉमेडी रहेगी. मगर कुणाल ने इसे अपनी राइटिंग के जरिए काफी मजेदार और हंस-हंसकर लोटपोट करने वाला बनाया है. हार्दिक, जो किरदार एक्टर ने निभाया है अपनी बेवकूफाना हरकतों और नासमझी के चलते हर समय आपको हंसाता रहता है. फिल्म शुरुआत से ही आपको हुक करके रखती है, क्योंकि जिस तरह के सिचुएशन्स इसमें डाले गए हैं वो देखने में सचमुच फनी और मजेदार हैं.
ये पूरी फिल्म कुणाल खेमू ने अपने कंधों पर उठाई जिसमें वो पूरी तरह सफल रहे. बाकी कास्ट में प्रीति जिंटा, स्पर्श श्रीवास्तव, यशपाल शर्मा, और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ भी उनके बढ़िया साथ देते हैं. फिल्म में कोई जबरदस्ती का ‘क्रिंज’ डायलॉग नहीं, जिससे आपको हंसाने की कोशिश हुई हो. बस सिचुएशन से पिक्चर में कॉमेडी पैदा की, जिससे हकीकत में आपको हंसी आती है. कुछ-कुछ ‘मेटा जोक्स’ भी फिल्म में डाले गए हैं, अगर आप पिक्चरें नहीं देखते हैं तो शायद वो जोक ना समझ सकें. ये ढाई घंटे की फिल्म अपना काम अच्छे से करके जाती है.
क्यों देखें कुणाल की वाइब?
हालांकि ये एक परफेक्ट फिल्म भी नहीं है. इसका फर्स्ट हाल्फ जहां बहुत मजेदार और कॉमिक सिचुएशन से भरा है. तो दूसरा हाल्फ सीरियस सा हो जाता है, जो फिल्म की पेसिंग को धीमा करता है. इसमें दुनियाभर में हो रहे आतंकवाद का मुद्दा बिजनेस के माध्यम से सामने रखा गया. कैसे आतंकवाद किसी देश के स्टॉक मार्केट पर असर करता है और कैसे उससे बाकी देशों को फायदा होता है. यहीं से फिल्म की रफ्तार धीमी हुई, और अंत में ये सिर्फ एक अच्छी कॉमेडी फिल्म बनकर रह गई.
अगर आप कुणाल की फिल्म को देखने का मन बना रहे हैं, तो ये आपका मौका पूरी तरह डिजर्व करती है. दिनभर की थकान और लाइफ में डिप्रेशन से कुछ समय के लिए छुटकारा पाना चाहते हैं, ‘वाइब’ आपको पक्का एंटरटेन करने वाली है. बस शर्त ये है कि अपने बच्चों को लेकर मत जाइएगा, क्योंकि इसमें एडल्ट जोक्स का इस्तेमाल किया गया है जो मैच्योर ऑडियंस ही देखे तो बेहतर है.
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