एचआईवी मरीजों को उपचार से मिल रही नई जिंदगी – Hindustan

– समय पर पहचान से उपचार शुरू करने और संक्रमण को नियंत्रित करने में मिल रही मदद

– एचआईवी की जांच, काउंसलिंग और उपचार को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार कर रहा जागरूक, जांच केंद्रों पर पहुंच रहे लोगों में जागरूकता बढ़ने से संक्रमण की पहचान आसान

गुरुग्राम, साक्षी रावत। एचआईवी का नाम सुनकर डरने और बीमारी को छिपाने के बजाय अब लोग जांच और उपचार की ओर बढ़ रहे हैं। गुरुग्राम में एचआईवी की जांच के दौरान सामने आ रहे मामलों की संख्या इस बात का संकेत है कि संक्रमण की पहचान के लिए लोग स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रहे हैं।

जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में 302, 2024-25 में 272 और 2025-26 में 300 मामले सामने आए। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 तक 229 मामलों की पहचान हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच केंद्रों तक पहुंचने वाले सभी लोग एक जैसे नहीं होते। कुछ लोग संभावित जोखिम के बाद अपनी इच्छा से जांच कराने पहुंचते हैं, तो कई मरीजों को चिकित्सक जांच की सलाह देते हैं। गर्भवती महिलाओं की जांच, यौन रोगों से जुड़े मरीजों की जांच, क्षय रोग से पीड़ित लोगों और ऐसे मरीजों की जांच भी की जाती है, जिनमें चिकित्सकीय कारणों से एचआईवी की आशंका होती है। जांच के दौरान परामर्श भी दिया जाता है, ताकि व्यक्ति को संक्रमण से बचाव और आगे की स्वास्थ्य देखभाल की जानकारी मिल सके。

गुरुग्राम की स्थिति दूसरे जिलों से कुछ अलग है। यहां बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार और इलाज के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं। ऐसे में जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीज केवल गुरुग्राम के स्थायी निवासी हों, यह जरूरी नहीं है। दूसरे जिलों या राज्यों से आने वाले लोग भी यहां जांच और उपचार की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ सकते हैं। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों में स्थानीय और बाहर से आने वाले मरीजों का अलग-अलग विवरण नहीं है।

एचआईवी की पुष्टि होने के बाद मरीज को अकेला नहीं छोड़ा जाता। उसे परामर्श दिया जाता है और उपचार की व्यवस्था से जोड़ा जाता है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत जरूरत के अनुसार नियमित दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मरीज के स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है और उपचार के असर को देखने के लिए समय-समय पर जांच कराई जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एचआईवी की पुष्टि होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी सकता। नियमित उपचार और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से संक्रमण को नियंत्रित रखा जा सकता है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग अब बीमारी के डर के बजाय जांच, जानकारी और नियमित उपचार को अधिक महत्व दे रहा है।

जिला स्वास्थ्य विभाग के उप सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश के अनुसार, एचआईवी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि लोग किसी तरह की झिझक या सामाजिक डर के कारण जांच को टालें नहीं। समय पर जांच होने से संक्रमण की पहचान जल्दी की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर उपचार भी जल्द शुरू किया जा सकता है। एचआईवी को लेकर डरने या मरीज के साथ भेदभाव करने के बजाय समय पर जांच और उपचार पर ध्यान देना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। नियमित उपचार लेने वाले मरीज लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। लोगों को किसी भी तरह के संदेह की स्थिति में जांच कराने में संकोच नहीं करना चाहिए।

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