ओडिशा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने BJP पर लगाया ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का आरोप, चौथी सीट पर फंसा गणित – AajTak

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ओडिशा में आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा हाई है. इसी बीच, ओडिशा कांग्रेस ने इस चुनाव में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) की आशंका जताकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है.
राज्य की चार राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली इस जंग में असली पेंच ‘चौथी सीट’ को लेकर फंस गया है. विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, सत्ताधारी बीजेपी दो सीटें आसानी से जीतती दिख रही है, जबकि विपक्षी बीजेडी के खाते में एक सीट पक्की मानी जा रही है. लेकिन चौथी सीट के लिए न तो दोनों में से किसी के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद नहीं है. 
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दिल्ली का रुख किया है. शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें राजनीति में विधायकों की खरीद-फरोख्त रोकनी होगी. राज्यसभा चुनावों में विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) नहीं होनी चाहिए.’
दास का आरोप है कि बीजेपी सत्ता में होने की वजह से किसी भी हद तक जा सकती है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीजेपी के पास बहुमत नहीं है, तो उनके नेता चार में से तीन सीटें जीतने का दावा कैसे कर रहे हैं? दास ने पूछा, बीजेपी के लोग सत्ता में हैं, इसलिए वो कुछ भी कर सकते हैं. वो किसी भी हद तक जा सकते हैं.
दास ने आगे कहा, बची हुई एक सीट के लिए कांग्रेस समेत किसी भी पार्टी के पास जीतने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है. लेकिन बीजेपी नेता दावा कर रहे हैं कि उन्हें तीन सीटें मिलेंगी. बिना खरीद-फरोख्त के ये कैसे मुमकिन हो सकता है?

ओडिशा विधानसभा के 147 सदस्यों के गणित को समझें, तो एक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 30 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है. सत्ताधारी बीजेपी के पास अपने 79 विधायक और 3 निर्दलीयों का समर्थन मिलाकर कुल 82 सदस्य हैं. तीन सांसदों को जिताने के लिए उन्हें 90 वोटों की जरूरत है, यानी वो अभी भी 8 वोट पीछे हैं. नवीन पटनायक की पार्टी बीजडी के पास 48 विधायक हैं. 
एक उम्मीदवार को जिताने के बाद उनके पास सिर्फ 18 वोट बचेंगे, जबकि दूसरी सीट के लिए उन्हें 12 और वोटों की दरकार होगी. कांग्रेस के पास कुल 14 विधायक हैं और सीपीआई (एम) का एक सदस्य है.
इस राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने और खरीद-फरोख्त रोकने के लिए भक्त चरण दास ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है. उन्होंने सुझाव दिया है कि कांग्रेस और बीजेडी को मिलकर किसी ऐसे प्रतिष्ठित स्वतंत्र उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए जो राज्य के हितों के लिए लड़ सके. 
दास ने कहा, ‘मैं संभावित उम्मीदवारों के पांच नामों के साथ दिल्ली जा रहा हूं. मैंने इस बारे में चर्चा के लिए बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक से मिलने का समय भी मांगा है.’ जब उनसे पूछा गया कि धुर विरोधी होने के नाते बीजेडी कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन क्यों करेगी, तो उन्होंने कहा, ‘हम किसी ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति को मैदान में उतार सकते हैं जिसे बीजेडी का समर्थन हो. यही एकमात्र तरीका है जिससे विधायकों की खरीद-फरोख्त को रोका जा सकता है.’

दूसरी तरफ, बीजेपी और बीजेडी भी अपना समीकरण बना रही है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दिल्ली में बीजेपी नेता नितिन नबीन से मुलाकात की है, जिन्हें संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है. माझी ने सोशल मीडिया पर कहा, आज बीजेपी के अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और ओडिशा में संगठनात्मक समन्वय को मजबूत करने और विकास पहलों को गति देने पर सार्थक चर्चा की. हमने सुशासन, समावेशी विकास और अपने राज्य की जनता के कल्याण के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की.
बीजेडी ने भी एक सीट के लिए बहुमत होने के बावजूद नामांकन के 6 सेट खरीदे हैं, जो इस बात का संकेत है कि वो भी मैदान में एक से ज्यादा उम्मीदवार उतार सकती हैं.
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