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NCERT ने अपनी हाल ही में जारी कक्षा 6 की कन्नड़ R3 भाषा पाठ्यपुस्तक पर लगे धार्मिक और खानपान संबंधी पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि किताब के टाइटल और फूड कंटेंट को लेकर की जा रही आलोचना ‘बेबुनियाद’ है और पाठ्यपुस्तक की असल कंटेंट के उलट है.
दरअसल पाठ्यपुस्तक के टाइटल ‘कृष्णा’ और इस दावे पर सवाल उठाए गए थे कि ये पुस्तक शाकाहार को बढ़ावा देती है और मांसाहारी भोजन परंपराओं को नजरअंदाज करती है. अब NCERT ने उन आपत्तियों का जवाब दिया है.
‘कृष्णा’ टाइटल को लेकर विवाद पर NCERT ने कहा कि इसका संबंध कृष्णा नदी से है, न कि किसी धर्म से. परिषद ने कहा कि ये उसके आर3 भाषा पाठ्यपुस्तकों के नामकरण परंपरा के मुताबिक है, जिसके तहत सभी किताब का नाम भारतीय नदियों पर रखा गया है.
‘कृष्णा’ नाम पर दी सफाई
परिषद के मुताबिक, हिंदी पाठ्यपुस्तक का नाम ‘गंगा’, अंग्रेजी का ‘कावेरी’ और उर्दू का ‘जमुना’ है, जो यमुना का लिप्यंतरण है. इसी तरह कन्नड़ पाठ्यपुस्तक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है, क्योंकि कृष्णा नदी का कर्नाटक की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान से गहरा नाता है.
NCERT ने कहा कि ये नामकरण पद्धति नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के हिसाब से है.
फूड चैप्टर में किसी तरह का पक्षपात नहीं: NCERT
NCERT ने इस आरोप को भी खारिज किया कि पाठ्यपुस्तक मांसाहारी भोजन परंपराओं की अनदेखी करते हुए शाकाहार को बढ़ावा देती है. परिषद के मुताबिक, ये विषय चैप्टर 6 ‘हेल्थ इज वेल्थ’ में शामिल है, जिसमें स्टूडेंट्स को संतुलित आहार, व्यायाम और स्वच्छता को अच्छे स्वास्थ्य के जरूरी तत्वों के तौर पर समझाया गया है.
चैप्टर में पेज नंबर 63 पर ‘संतुलित आहार’ शीर्षक से एक खंड है, जिसमें बताया गया है कि शरीर को रोजमर्रा के पोषण के लिए दूध, हरी पत्तेदार सब्जियां, अन्य सब्जियां, फल और दूसरे खाद्य पदार्थों की जरूरत होती है. NCERT ने ये भी बताया कि उसी पेज पर दी गई चित्रात्मक सामग्री में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के खाद्य पदार्थ दिखाए गए हैं.
इस चैप्टर में भारत के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक पौष्टिक भोजन का भी जिक्र है, जिससे पोषण शिक्षा को देश की विविध खाद्य परंपराओं से जोड़ा गया है. स्टूडेंट्स से ‘संतुलित आहार क्या है?’ जैसा सवाल भी पूछा गया है, जिसे NCERT ने इस बात का संकेत बताया कि पाठ किसी एक फूड सिस्टम को तरजीह नहीं देता, बल्कि भोजन की समावेशी समझ डेवलप करता है.
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NCERT ने अपने बयान में कहा, ‘पाठ्यपुस्तक में कहीं भी शाकाहार की व्याख्या या उसका मकसद नहीं बताया गया है, और न ही मांसाहारी भोजन का विरोध किया गया है.’ परिषद ने कहा कि इस पाठ का मकसद सिर्फ स्टूडेंट्स में स्वस्थ भोजन को लेकर अवेयरनेस पैदा करना है.
पाठ्यपुस्तकों की बढ़ती जांच के बीच आई सफाई
NCERT की ये सफाई ऐसे समय में आआ है जब स्कूल पाठ्यक्रम में किए जा रहे बदलावों को लेकर बहस और जांच तेज हो गई है. हाल के सालों में NCERT और दूसरे शैक्षिक संस्थानों को पाठ्यपुस्तकों की प्रस्तुति को लेकर लगातार सवालों का सामना करना पड़ा है.
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