कन्हैया कुमार कहां हैं, कैमरों से बनाई दूरी; कांग्रेस में बदल गई भूमिका – Hindustan

कथित वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अपील के बाद इंडिया गठबंधन के साथ अब कई अन्य संगठन भी एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा हैं। बोरा पेपर लीक आंदोलन और उसके बाद लगातार युवाओं की आवाज बुंलद कर रही हैं।

INDIA गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में नेहा बोरा भी अपने साथियों के साथ शामिल रहीं। बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के दौरान ऐसे कई मौके आए जब राहुल गांधी अपने एक हाथ में प्रियंका गांधी तो दूसरे में नेहा बोरा का हाथ थामे मार्च करते दिखे। कई बार नेहा बोरा के नारों पर प्रियंका गांधी आवाज मिलाती दिखीं। विपक्ष के प्रमुख नेताओं के लिए तैयार किए गए ट्रक पर भी नेहा नजर आईं। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि कभी युवा आंदोलनों का चेहरा रहे और अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कन्हैया कुमार इन आंदोलन में नजर क्यों नहीं आ रहे हैं।

कन्हैया कुमार बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में शामिल थे पर वह कैमरों की चमक से दूर रहे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी की छात्र इकाई एनएसयूआई के प्रभारी होने के नाते उनकी भूमिका बदल गई है। उनकी खुद मौजूदगी से अधिक एनएसयूआई की उपस्थिति आवश्यक है। कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन में एनएसयूआई लगातार दिखाई दे रही है। एनएसयूआई इन मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है।

रणनीतिकार मानते हैं कि पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का आंदोलन हो या वोट चोरी का मुद्दा। नेहा बोरा पूरी ताकत के साथ इन मुद्दों को लेकर लड़ती रही है। यही वजह है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के मार्च में नेहा बोरा और अन्य छात्र संगठनों के नेता और नागरिक संगठनों से जुड़े लोगों को पूरी अहमियत दी। बकौल उनके यह लड़ाई सिर्फ राहुल गांधी या अखिलेश यादव की नहीं है। यह हम सबकी लड़ाई है और अपने अधिकार के लिए हम सबको मिलकर लड़ना होगा।

राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत 11 नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, यह याचिका शाम को दायर की गई, जिसमें 10 पार्टियों के विपक्षी नेता याचिकाकर्ता बने।

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याचिका कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) केडी राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी, माकपा (सीपीआई-एम) के महासचिव एम ए बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता ई टी मोहम्मद बशीर की तरफ से दायर की गई। विपक्ष ने याचिका में 10 राहत की मांग की है।

विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका में 14 मामूली खामियां पाई गई हैं। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर इन खामियों की जानकारी देते हुए याचिकाकर्ताओं से इसे दूर करने के लिए कहा गया है। प्रमुख खामियों में बताया गया है कि याचिका दाखिल करने की शुल्क का कम भुगतान किया गया है। शीर्ष अदालत ने 220 रुपये का और शुल्क भी जमा करने को कहा है। इसे दूर करने के लिए 90 दिन का वक्त दिया है।

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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