कमाल का टैलेंट! 2 साल की बच्ची ने तबले पर बजाईं 12 ताल, हुनर देख फैन हुए यूजर्स; इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज – India TV Hindi

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के होन्नावर तालुक की महज दो साल 10 महीने की नन्ही बच्ची स्वरश्री हेगड़े ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एक असाधारण रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने तबले पर 12 अलग-अलग तालों को उनके बोलों के साथ बिना किसी गलती के सुनाया और बजाया। इस उपलब्धि के लिए उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सबसे कम उम्र की तबला वादक के रूप में जगह मिली है।
इस वीडियो को एक्स पर @adarshahgd नामक हैंडल से शेयर किया गया है। स्वरश्री की इस उपलब्धि का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अक्टूबर 2026 के अंत में वायरल हुआ। वीडियो में नन्ही बच्ची तबले पर बैठी 12 ताल बजाती और उनके बोल सुनाती दिखती हैं। उनकी लयबद्धता और समन्वय देखकर दर्शक दंग रह गए। कई यूजर्स ने इसे उत्तर कन्नड़ का गर्व बताया तो कुछ ने सरस्वती देवी का आशीर्वाद करार दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वरश्री अडुकाला गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता गुरुराज हेगड़े प्रसिद्ध तबला वादक और संगीत शिक्षक हैं। वे विद्वान शेषाद्रि आयंगर के शिष्य माने जाते हैं। मां श्रीलता अंग्रेजी की प्रोफेसर होने के साथ-साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका भी हैं। परिवार होन्नावर में संगीत विद्यालय भी चलाता है। घर का संगीतपूर्ण माहौल ही स्वरश्री की प्रतिभा का आधार बना। 

अभिभावकों के अनुसार, स्वरश्री ने एक साल की उम्र से ही तबले में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी थी। वे अक्सर तबले पर हाथ रखतीं और कभी-कभी उसी पर सो भी जातीं। उनकी इस लगन को देखकर माता-पिता ने उनके लिए खास तौर पर दो छोटे तबले बनवाए। जब गुरुराज अपने छात्रों को प्रशिक्षण देते थे, तब स्वरश्री भी उनके बगल में बैठकर 12 तालों और उनके बोल सीखती थीं। 
स्वरश्री के हुनर को देख उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। परिवार इस उपलब्धि पर बेहद गर्वित है। मां श्रीलता ने कहा कि स्वरश्री ने तबले के ताल बोल सहित सुनाकर और बजाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जो जगह बनाई है, उस पर पूरा परिवार गर्व महसूस करता है। संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में यह कौशल असाधारण है क्योंकि आमतौर पर इतने तालों पर पकड़ बनाने में सालों का अभ्यास लगता है। 
ताल भारतीय शास्त्रीय संगीत का लय चक्र होता है। हर ताल में निश्चित संख्या में बीट्स होते हैं। बोल वे सिलेबल्स हैं जो तबले के विभिन्न स्ट्रोक्स को दर्शाते हैं। ताल बजाने के साथ उसके बोल सुनाना याददाश्त, एकाग्रता, हाथों के नियंत्रण और लय की गहरी समझ की मांग करता है। तीनताल, झपताल, एकताल, रूपक, दादरा और कहरवा जैसे प्रमुख तालों को इतनी कम उम्र में महारत हासिल करना सामान्य बात नहीं है।
यह उपलब्धि कर्नाटक और खासकर उत्तर कन्नड़ जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर लोग बच्ची की तारीफ कर रहे हैं और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। स्वरश्री अब भारतीय शास्त्रीय संगीत की नई पीढ़ी के प्रतीक के रूप में उभर रही हैं। उनकी यह शुरुआत आने वाले समय में और बड़ी उपलब्धियों का संकेत दे रही है। 
गौरतलब है कि, इससे पहले भी बच्चों से जुड़े वीडियो वायरल हो चुके हैं जिन्हें यूजर्स द्वारा काफी पसंद किया गया। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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